मेरे ब्लागस्पाट वाले ब्लाग को खोलकर देखें .. थोडी ही देर में एक दूसरी साइट खुल जा रही है .. क्या समस्या है .. मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा। ऐसी स्थिति में तो मेरे इस ब्लाग को कोई पाठक पढ भी नहीं सकते। मैने इस ब्लाग पर 28 मई को अपना अंतिम पोस्ट डाला था .. उसके बाद मैं कहीं और व्यस्त हो गयी थी .. जब बोकारो वापस लौटी तो यह समस्या नजर आयी है। इसी कारण आज यह पोस्ट अपने वर्डप्रेसवाले ब्लाग पर डाल रही हूं .. ताकि तकनीकी जानकार इसे पढ सकें और समस्या का कोई समाधान निकल सके।
जी हां, जीवन में धड़कनों का बड़ा महत्व होता है। शरीर के प्रत्येक अंग में रक्त संचार करते हुए किसी की जिंदगी को बनाए रखने में इसकी बड़ी भूमिका होती है। यदि हम प्रश्न करें कि एक ब्लाग को जीवित रखने में किसकी भूमिका सबसे अधिक है , तो शायद सबों का जबाब होगा-. हिट्स। हिट्स के बिना एक ब्लाग के अस्तित्व की कल्पना कर पाना भी नामुमकिन है, यानि हिट्स हैं ब्लाग की धड़कन। यदि ये बातें सही हैं, तो मेरे ब्लाग का दिल अबतक 25,000 बार धड़क चुका है,जिसके कारण मेरे ब्लाग की जीवनी शक्ति बढ़ गयी है। इस धड़कन का ही कमाल है कि गूगल पेज रैंकिंग में भी मेरे ब्लाग को चार अंक मिले हैं। और ये सब तब हुआ है, जब मेरे ब्लाग को वर्षगांठ मनाने में अभी दस दिनों की देर है।
पिछले वर्ष सितम्बर महीनें में ही मैने ब्लाग लिखना आरंभ किया था। इस एक वर्ष में भी मैं नियमित रूप से लेखन न कर सकी, फिर भी मेरे ब्लाग को इतनी उपलब्धि मिली है, इसका कारण ज्योतिष के प्रति जनसामान्य का रूझान ही है, इसमें कोई शक नहीं , बावजूद इसके कि ज्योतिष को आज भी अंधविश्वास माना जाता है। मैंनें अपने आलेखों में ज्योतिष के वैज्ञानिक स्वरूप को ही उभारने की चेष्टा की है। ज्योतिष एक पूर्ण सांकेतिक विज्ञान है, इसके द्वारा किसी व्यक्ति की परिस्थितियों की पूरी चर्चा की जा सकती है, 40 वर्षों के गहन अध्ययन और मनन के बाद `गत्यात्मक ज्योतिषीय अनुसंधान केन्द्र´ के अपने रिसर्च ‘गत्यात्मक दशा पद्धति´ एवं `गत्यात्मक गोचर प्रणाली´ के विकास के साथ ही ज्योतिष एक वस्तुपरक विज्ञान बन गया है ,जिसके आधार पर सारे प्रश्नों के उत्तर हॉ या नहीं में दिए जा सकते हैं। इस पद्धति की प्रायोगिक जॉच पाठक खुद भी निम्न प्रकार कर सकते हैं। ध्यान दें , क्या आपका या आपके परिवार में किसी व्यक्ति का जन्म निम्न समयांतराल में हुआ है———–
1) वर्ष 1990 में 6 जनवरी से 17 जनवरी, 18 मई से 2 जून और 17 सितम्बर से 1 अक्तूबर के मध्य।
2) वर्ष 1977 के 21 दिसम्बर से 1978 के 25 फरवरी तक।
3) वर्ष 1966 में 14 जनवरी से 11 फरवरी के मध्य।
4) वर्ष 1942 में 5 मार्च से 13 अक्तूबर के मध्य।
5) वर्ष 1930 में 22 मई से 10 अगस्त के मध्य।
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गत्यात्मक ज्योतिषीय अनुसंधान केन्द्र´ का दावा है कि उपरोक्त समयांतराल में जन्म लेनेवाले सभी व्यक्ति पिछले छ: वर्षों से यानि 2002 से बढ़ते क्रम में मनोनुकूल सफलता में कमी प्राप्त कर रहे हैं, किसी न किसी संदर्भ में परेशानी महसूस कर रहे हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास काफी कम हो गया है, किसी प्रकार के निर्णय लेने में वे धबराहट महसूस करने लगे हैं, चाहे उनका स्टेटस कितना भी उंचा क्यो न हो। इस वर्ष उनकी परेशानी बड़े रुप में दिखाई पड़ रही है।
इस ब्लाग में मेरी यह अंतिम पोस्ट है ,क्योंकि मैंने एक नए पते पर ब्लाग लिखना आरंभ कर दिया है। यह पता है–.
अब मेरे सारे आलेख इसी पते पर ही मिलेंगे। साथ ही पुराने आलेखों को भी धीरे.धीरे इस नए पते पर ले जाने की कोशिश की जाएगी , ताकि सभी पोस्ट पाठकों को एक जगह मिल सकें। पाठकों से सहयोग की अपेक्षा है , कुछ मेरे लिए भी और कुछ खुद उनके लिए भी , क्योंकि मेरा दावा है कि मेरे लेखों को पढ़ने के बाद उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण में बढ़ोत्तरी होगी। इसके अतिरिक्त ज्योतिष के वैज्ञानिक स्वरूप को जानने के लिए `गत्यात्मक ज्योतिषीय अनुसंधान केन्द्र´ के निदेशक श्री विद्यासागर महथाजी के ब्लाग को भी पढ़ सकते हैं , जिसका पता है—.
www.jyotishsachyajhuth.blogspot.com
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तीन.चार दिनों पहले श्री विद्यासागर महथा नाम के एक 69 वर्षीय सज्जन ने चिट्ठा लिखना आरंभ किया है। उनके चिटठे का नाम है-.फलित ज्योतिष : सच या झूठ । इन्होने अपना सारा जीवन ज्योतिष के विकास में समर्पित कर दिया , पर अपने रिसर्च को पहचान दिला पाने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। उनका लक्ष्य इस चिट्ठे के द्वारा समाज में ज्योतिष और धर्म के नाम पर प्रचलित भ्रांतियों को दूर कर ज्योतिष को एक विज्ञान का दर्जा दिलाना है। इसमें ये कहां तक सफलता प्राप्त कर सकेंगे , यह तो समय के साथ ही मालूम हो सकेगा ,पर अभी शायद ये हिन्दी चिट्ठाकार भाई.बहनों में सर्वाधिक उम्र के या उनमें से एक माने जा सकते हैं। इनके अंदर के दर्द को इनके चिटठे में लिखे परिचय से महसूस किया जा सकता है—.
आज से पांच दशक पूर्व विज्ञान में स्नातक और हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर डिग्री लेने के बाद युवावस्था में नौकरी में हर जगह विपरीत परिस्थितियों को देखकर प्रारब्ध पर विश्वास हुआ। ज्योतिष का अधययन किया ,इसके गणित क्षेत्र से खासा प्रभावित हुआ,पर फलित पक्ष में निराशा ही हाथ लगी। इसी कारण आलोचनात्मक ढंग से ज्योतिष की पत्र.पत्रिकाओं में मेरा प्रवेश हुआ, पर निरंतर अध्ययन से धीरे.धीरे इसमें वैज्ञानिक तथ्य भी दिखाई पड़ते गए। ज्योतिष की कमजोरियों को दूर करने और इसे विज्ञान का दर्जा देने में 40 वर्षों तक अपनी जिंदगी भी ढंग से नहीं जी पाया,ज्योतिष की कमियों का विश्लेषण करने के कारण ज्योतिष प्रेमियों से सहयोग की अपेक्षा नहीं की जा सकती थी , कार्यक्षेत्र ज्योतिष होने के कारण वैज्ञानिक वर्ग का भी सहयोग नहीं मिल पा रहा है। मेरे द्वारा ज्योतिष में जो रिसर्च किया गया,उसके आधार पर आप किसी के जन्मतिथि,जन्मसमय और जन्मस्थान के आधार पर उसके पूरे जीवन के उतार.चढ़ाव और सुख.दुख का के लेखाचित्र के साथ.साथ अन्य कई प्रकार के लेखाचित्र प्राप्त कर सकते हैं। मुझे आंतरिक सुख देने के लिए इतनी सफलता काफी है,पर सांसारिक दृष्टि से देखा जाए,मुझे इस बात का अफसोस ही रहेगा कि आखिर मैने अपने मस्तिष्क का उपयोग फलित ज्योतिष के ही क्षेत्र में क्यों किया,अन्यत्र क्यों नहीं ?
अंत में मै बतला दूं कि श्री विद्यासागर महथाजी मेरे पिताजी हैं ,जिन्होने अपनी हालत को देखते हुए कभी नहीं चाहा था कि मैं भी इस क्षेत्र में आऊं। पर इसके प्रति मेरी रूचि ने मुझे इस क्षेत्र में खींच ही लिया। मैने पिछले वर्ष ही चिटठा लिखना आरंभ किया है। इस मध्य एक सवा महीने उनके पास रहने का मौका मिला, मैने तो उनसे बहुत कुछ सीखा ही बदले में उन्हें भी चिटठा लिखने को प्रेरित किया। इस क्षेत्र में उन्हें लाकर मैं काफी खुश हूं ,क्योंकि मैं जानती हूं कि वह दिन कभी न कभी तो आएगा ,जब हमें अपना लक्ष्य प्राप्त हो सकेगा।
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