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काफी दिनों बाद फुर्सत मिलते ही एक पोस्‍ट डालने को कंप्‍यूटर पर तो आ गयी , पर ब्‍लागर अकाउंट न खुलने की वजह से उसपर पोस्‍ट कर पाना संभव नहीं था। दो ब्‍लाग होने से चिंता की कोई बात नहीं , मैने पोस्‍ट डालने के लिए वर्डप्रेस अकाउंट खोल लिया । पर इसका ब्‍लाग स्‍टेटस देखा तो खुशी की सीमा न रही। इसने तो चुपके  चुपके पाठको की आवाजाही का 50,000 का आंकडा पार कर लिया था। दरअसल कुछ पारिवारिक कार्यों में व्‍यस्‍तता की वजह से मैने अपने ब्‍लोगों को काफी दिनों से खोलकर भी नहीं देखा था ।  शुरूआत के एक साल पूरे होने से पहले ही इसने 25,000 का आंकडा पार कर लिया था और अभी दूसरे साल पूरे होने ही है कि इसने 50,000 का आंकडा भी पार कर लिया और अभी 50,873 पर पहुंच गया है।

 मेरे लिए ताज्‍जुब की बात तो यह है कि इस ब्‍लाग पर मै सालभर से कोई पोस्‍ट भी नहीं डाल रही हूं । पिडले दिनों भी ब्‍लागस्‍पाट पर समस्‍या आने पर मैने इसपर एक ब्‍लाग पोस्‍ट किया था। आरंभ से ही हमने देखा है कि ब्‍लागस्‍पाट की तुलना में सर्चइंजिन की सहायता से इसपर पाठक अधिक आते हैं । पर इसके बावजूद भी मैने ब्‍लागस्‍पाट पर अपना ब्‍लाग लिखना शुरू किया। यह माना जा सकता है कि ब्‍लागस्‍पाट के आलेखों को हमारे ब्‍लागर मित्र पढते हैं , पर वर्डप्रेस के आलेख उनके लिए पुराने है , इसलिए मेरे ख्‍याल से इसे हिन्‍दी पाठक सर्चइंजिनों की सहायता से ढूंढते हुए आते हें। इसलिए यह कहना बिल्‍कुल गलत है कि इंटरनेट पर हिन्‍दी के पाठकों की संख्‍या सीमित है। वास्‍तव में इंटरनेट पर हिन्‍दी के पाठक तेजी से बढ रहे हैं। यह हिन्‍दी भाषा के लिए काफी मायने रखनेवाली बात है।अंत में , उन पाठकों का बहुत बहुत धन्‍यवाद , जिनकी सहायता से मेरे चिट्ठे को यह उपलब्धि मिली।

मेरे ब्‍लागस्‍पाट वाले ब्‍लाग को खोलकर देखें .. थोडी ही देर में एक दूसरी साइट खुल जा रही है .. क्‍या समस्‍या है .. मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा। ऐसी स्थिति में तो मेरे इस ब्‍लाग को कोई पाठक पढ भी नहीं सकते। मैने इस ब्‍लाग पर 28 मई को अपना अंतिम पोस्‍ट डाला था .. उसके बाद मैं कहीं और व्‍यस्‍त हो गयी थी .. जब बोकारो वापस लौटी तो यह समस्‍या नजर आयी है। इसी कारण आज यह पोस्‍ट अपने वर्डप्रेसवाले ब्‍लाग पर डाल रही हूं .. ताकि तकनीकी जानकार इसे पढ सकें और समस्‍या का कोई समाधान निकल सके।

जी हां, जीवन में धड़कनों का बड़ा महत्व होता है। शरीर के प्रत्येक अंग में रक्त संचार करते हुए किसी की जिंदगी को बनाए रखने में इसकी बड़ी भूमिका होती है। यदि हम प्रश्न करें कि एक ब्लाग को जीवित रखने में किसकी भूमिका सबसे अधिक है , तो शायद सबों का जबाब होगा-. हिट्स। हिट्स के बिना एक ब्लाग के अस्तित्व की कल्पना कर पाना भी नामुमकिन है, यानि हिट्स हैं ब्लाग की धड़कन। यदि ये बातें सही हैं, तो मेरे ब्लाग का दिल अबतक 25,000 बार धड़क चुका है,जिसके कारण मेरे ब्लाग की जीवनी शक्ति बढ़ गयी है। इस धड़कन का ही कमाल है कि गूगल पेज रैंकिंग में भी मेरे ब्लाग को चार अंक मिले हैं। और ये सब तब हुआ है, जब मेरे ब्लाग को वर्षगांठ मनाने में अभी दस दिनों की देर है।   

पिछले वर्ष सितम्बर महीनें में ही मैने ब्लाग लिखना आरंभ किया था। इस एक वर्ष में भी मैं नियमित रूप से लेखन न कर सकी, फिर भी मेरे ब्लाग को इतनी उपलब्धि मिली है, इसका कारण ज्योतिष के प्रति जनसामान्य का रूझान ही है, इसमें कोई शक नहीं , बावजूद इसके कि ज्योतिष को आज भी अंधविश्वास माना जाता है। मैंनें अपने आलेखों में ज्योतिष के वैज्ञानिक स्वरूप को ही उभारने की चेष्टा की है। ज्योतिष एक पूर्ण सांकेतिक विज्ञान है, इसके द्वारा किसी व्यक्ति की परिस्थितियों की पूरी चर्चा की जा सकती है, 40 वर्षों के गहन अध्ययन और मनन के बाद `गत्यात्मक ज्योतिषीय अनुसंधान केन्द्र´ के अपने रिसर्च गत्यात्मक दशा पद्धति´ एवं `गत्यात्मक गोचर प्रणाली´ के विकास के साथ ही ज्योतिष एक वस्तुपरक विज्ञान बन गया है ,जिसके आधार पर सारे प्रश्नों के उत्तर हॉ या नहीं में दिए जा सकते हैं। इस पद्धति की प्रायोगिक जॉच पाठक खुद भी निम्न प्रकार कर सकते हैं। ध्यान दें , क्या आपका या आपके परिवार में किसी व्यक्ति का जन्म निम्न समयांतराल में हुआ है———–

1) वर्ष 1990 में 6 जनवरी से 17 जनवरी, 18 मई से 2 जून और 17 सितम्बर से 1 अक्तूबर के मध्य।

2) वर्ष 1977 के 21 दिसम्बर से 1978 के 25 फरवरी तक।

3) वर्ष 1966 में 14 जनवरी से 11 फरवरी के मध्य।

4) वर्ष 1942 में 5 मार्च से 13 अक्तूबर के मध्य।

5) वर्ष 1930 में 22 मई से 10 अगस्त के मध्य।

                   `

गत्यात्मक ज्योतिषीय अनुसंधान केन्द्र´ का दावा है कि उपरोक्त समयांतराल में जन्म लेनेवाले सभी व्यक्ति पिछले छ: वर्षों से यानि 2002 से बढ़ते क्रम में मनोनुकूल सफलता में कमी प्राप्त कर रहे हैं, किसी न किसी संदर्भ में परेशानी महसूस कर रहे हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास काफी कम हो गया है, किसी प्रकार के निर्णय लेने में वे धबराहट महसूस करने लगे हैं, चाहे उनका स्टेटस कितना भी उंचा क्यो न हो। इस वर्ष उनकी परेशानी बड़े रुप में दिखाई पड़ रही है।

इस ब्लाग में मेरी यह अंतिम पोस्ट है ,क्योंकि मैंने एक नए पते पर ब्लाग लिखना आरंभ कर दिया है। यह पता है–.

www.sangeetapuri.blogspot.com

अब मेरे सारे आलेख इसी पते पर ही मिलेंगे। साथ ही पुराने आलेखों को भी धीरे.धीरे इस नए पते पर ले जाने की कोशिश की जाएगी , ताकि सभी पोस्ट पाठकों को एक जगह मिल सकें। पाठकों से सहयोग की अपेक्षा है , कुछ मेरे लिए भी और कुछ खुद उनके लिए भी , क्योंकि मेरा दावा है कि मेरे लेखों को पढ़ने के बाद उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण में बढ़ोत्तरी होगी। इसके अतिरिक्त ज्योतिष के वैज्ञानिक स्वरूप को जानने के लिए `गत्यात्मक ज्योतिषीय अनुसंधान केन्द्र´ के निदेशक श्री विद्यासागर महथाजी के ब्लाग को भी पढ़ सकते हैं , जिसका पता है—.

www.jyotishsachyajhuth.blogspot.com

 

 

 

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