मीन राशि में स्थित गोचर के बृहस्‍पति का जनसामान्‍य पर प्रभाव

ज्‍योतिष में रूचि रखने वाले बहुत सारे लोगों को यह मालूम होगा कि सौरमंडल का सबसे विशाल ग्रह गुरू मई के पहले सप्‍ताह से ही मीन राशि में है। यूं तो इस राशि में बृहस्‍पति स्‍वक्षेत्रीय है , पर ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ के हिसाब से इसके बावजूद सबको शुभ फल से संयुक्‍त नहीं कर सकता। दिन ब दिन बृहस्‍पति के स्‍थैतिक शक्ति में हो रही वृद्धि किसी के लिए परेशानी तो किसी के लिए खुशी का कारण बनेगी। खासकर 23 जून 2010 से लेकर जुलाई के अंतिम सप्‍ताह तक यह कुछ लोगों की मन:स्थिति को सुखद बनाएगी , तो कुछ तनाव झेलने को भी विवश होंगे। इस तरह इस एक महीनें में लोग बृहस्पति के कारण उत्पन्न होनेवाले कार्य में उलझे रहेंगे। चूंकि बहस्पति धनु और मीन राशि का स्वामी है इसलिए धनु और मीन राशि से संबंधित कार्यों में ही सुख या दुख की अधिक संभावना रहेगी।

क्‍या आप के परिवार में किसी का जन्‍म निम्‍न समयांतराल में हुआ है ….

1934 , 1946 , 1958 , 1970 , 1982 ,1993 और 2005 में जन्‍म लेनेवाले उत्साहित होकर कार्य में जुटे रहेंगे। एक महीनें तक कार्य अच्छी तरह होने के पश्चात जुलाई के मध्‍य में किसी न किसी प्रकार के व्यवधान के उपस्थित होने से कार्य की गति कुछ धीमी पड़ जाएगी। मध्‍य सितंबर तक 2009 तक काम लगभग रुका हुआ सा महसूस होगा। उसके बाद ही काम के शुरू किए जाने के लिए आशा की कोई किरण दिखाई दे सकती है। मध्‍य नवंबर के बाद ही स्थगित कार्य पुन: उसी रुप में या बदले हुए रुप में उपस्थित होकर गतिमान होगा और दिसंबर के मध्‍य तक अपने निर्णयात्मक मोड़ पर पहुंच जाएगा। बृहस्पति के कारण होनेवाले इस निर्णय से भी इन लोगों को खुशी होगी। किसी खास संदर्भ में सफलता से इनका उत्‍साह बढा रहेगा।

किन्तु बृहस्पति की इस विशेष स्थिति से कुछ लोगों को कष्‍ट या तकलीफ भी होगी। वे निराशाजनक वातावरण में कार्य करने को बाध्य होंगे। मध्‍य जुलाई के बाद कार्य के असफल होने से उन्हें तनाव का सामना करना पड सकता है। सितंबर के मध्‍य तक उनके समक्ष किकर्तब्‍यविमूढावस्‍था की स्थिति बनी रहेगी। मध्‍य नवंबर के बाद निराशाजनक वातावरण में ही स्थगित कार्य पुन: उसी रुप में या बदले हुए रुप में उपस्थित होकर गतिमान होगा और दिसंबर के मध्‍य तक अपने निर्णयात्मक मोड़ पर पहुंच जाएगा। बृहस्पति के कारण होनेवाले इस निर्णय से भी इन लोगों को कष्‍ट पहुंचेगा। ऐसा 1932 , 1944 , 1956 , 1968 , 1980 ,1992 और 2004 में जन्‍म लेनेवाले में जन्मलेने वाले लोगों के साथ अधिक देखा जा सकता है । किसी खास मुद्दे को लेकर वर्षभर इनकी परेशानी बनी रह सकती है।

इसके अलावे गोचर के इस बृहस्‍पति के कारण तुला राशि वाले शुभ प्रभाव तथा सिंह राशि वाले बुरा प्रभाव महसूस करेंगे। कुछ हद तक अक्‍तूबर माह में जन्‍म लेनेवालों के लिए बृहस्‍पति की यह स्थिति शुभ प्रभाव देने वाली होगी , जबकि अगस्‍त माह में जन्‍म लेनेवाले इसके बुरे प्रभाव से युक्‍त हो सकते हें।

गुरू बृहस्‍पति धर्म और ज्ञान से भी जुडा है , इसलिए धार्मिक क्रियाकलाप भी इस एक महीनों में जमकर होंगे। पर जैसा कि आज के युग में धर्म का रूप भी वीभत्‍स हो गया है , इसलिए युग के अनुरूप ही दो चार वर्षों से बृहस्‍पति चंद्र की इस युति के फलस्‍वरूप यत्र तत्र धार्मिक और सांप्रदायिक माहौल को भडकते हुए भी पाया गया है । आइए ,’गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’के साथ गुरू बृहस्‍पति से प्रार्थना करें कि वे अपने शुभत्‍व को ही बनाए रखें और लोगों के समक्ष कल्‍याणकारी वातावरण ही बनाए रखें।

कम से कम मेरे सवालों का जबाब तो दे दें .. वैसे मैं हठी तो हूं ही

आज रविवार था , छुट्टियों के दिन में कोई काम न काज , सुबह उठकर 7 बजे ही कंप्‍यूटर पर ब्‍लॉगवाणी खोलकर बैठ गयी। एकदम ऊपर नया जमाना नाम के ब्‍लॉग में एक लेख दिखाई पडा ..  विज्ञान से भागते ज्‍योतिषी। शीर्षक तो मेरे लिए आकर्षित करने वाला था ही , आलेख का जो भाग पढ सकी , उससे मालूम हुआ कि उन्‍होने इस लेख में अपने ब्लॉग की एक सुंदर विदुषी और हठी यूजर की बात की है, जो ज्योतिषी भी हैं और तरह-तरह से ब्लॉगिंग में ज्योतिष का प्रचार करती रहती हैं। लिंक पर क्लिक न करने का सवाल ही न था , पढने पर जो बात समझ में आयी वह कि इनके ब्‍लॉग पर मेन्‍े गलत टिप्‍पणी की है। दरअसल एक दिन पहले जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जी का एक आलेख पढने को मिला , जिसमें उन्‍होने लिखा था कि ….
मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि सैंकड़ों सालों से ग्रहों के बारे में ज्योतिष में कोई नयी रिसर्च नहीं हुई है।

इसका जबाब देते हुए मैने लिखा था …

आपने पूछा है कि हाल फिलहाल में ज्‍योतिष पर कोई रिसर्च किया गया है .. आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि ज्‍योतिष के क्षेत्र में 25 वर्ष पूर्व हमरे केन्‍द्र द्वारा किए गए रिसर्च में कुछ महत्‍वपूर्ण तथ्‍य सामने आए हैं .. ग्रहों की गत्‍यात्‍मक और स्‍थैतिक उर्जा की खोज ने ज्‍योतिष को बहुत सटीक बना दिया है .. इसके बारे में जानकारी आपको इस लिंक पर मिल सकेगी।

थोडी ही देर में टिप्‍पणी के रूप में जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जी का जबाब हाजिर था ..
.
संगीता जी ,आपने जो सामग्री लिंक में दी है वह प्राचीन फलित ज्योतिष की किताबों में उपलब्ध है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भारत के किसी भी संस्कृत विश्वविद्यालय में आधुनिक वेधशाला नहीं है और नहीं आधुनिक अनुसंधान की किसी भी तरह की व्यवस्था है। आप ज्योतिषी हैं यह अच्छी बात है लेकिन किसी भी ज्योतिषी ने अभी तक कोई आधिकारिक रिसर्च ग्रहों पर नहीं की है। पुराने ज्योतिषी ग्रहों के बारे में अनुमान से जानते थे उनके सारे अनुमान गलत साबित हुए हैं। सिर्फ पृथ्वी से विभिन्न ग्रहों की दूरी को ही लें तो पता चल जाएगा कि पुराने ज्योतिषी सही हैं या आधुनिक विज्ञान सही है। आशा है इंटरनेट पर उपलब्ध ग्रहों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी को कृपया पढ़ने की कृपा करेंगी। सिर्फ अंग्रेजी में नाम मात्र लिख दें हजारों पन्नों की जानकारी घर बैठे मुफ्त में मिल जाएगी,आज जितनी जानकारी ग्रहों के बारे में विज्ञान की कृपा सें उपलब्ध है उसकी तुलना में एक प्रतिशत जानकारी भी प्राचीन और आधुनिक ज्योतिषी उपलब्ध नहीं करा पाए हैं।

मैने इस टिप्‍पणी के जबाब में यह लिखा …..

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जी .. मैने जो सामग्री आपको दी .. उसे पढे बिना ही आपने कह दिया कि यह प्राचीन ज्‍योतिष की पुस्‍तकों में है .. प्राचीन ज्‍योतिष की किस पुस्‍तक में इस प्रकार की दशा पद्धति का विवरण है .. सबके जीवन पर क्रमवार सातों ग्रहों का प्रभाव पडता है .. इसे हमलोगों ने ढूंढा है .. हमलोग अपने इस रिसर्च का दावा कहां पेश करें .. आप ही बताएं .. मैं प्रमाणित करके दिखा सकती हूं .. पुराने ज्‍योतिष के पास ग्रहों की जितनी जानकारी थी .. उतना ही किसी व्‍यक्ति के बारे में जानकारी देने में पर्याप्‍त है .. और आज किसी भी संस्कृत विश्वविद्यालय में आधुनिक वेधशाला नहीं है और न हीं आधुनिक अनुसंधान की किसी भी तरह की व्यवस्था है .. इसमें सरकार की गल्‍ती है .. भला किसी विषय का क्‍या दोष ??

आप उस लिंक में भी जाकर देख सकते हैं ,मैने कौन सी आपत्तिजनक बाते कहीं कि उन्‍हे आज अपने नए लेख विज्ञान से भागे हुए ज्‍योतिषी में लिखना पडा …

हमारे ब्लॉग की एक सुंदर विदुषी और हठी यूजर हैं,वे ज्योतिषी भी हैं और तरह-तरह से ब्लॉगिंग में ज्योतिष का प्रचार करती रहती हैं उनका नाम है संगीता पुरी।

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जी ने न तो मेरी बातों पर गौर किया , न मेरे प्रश्‍नों का जबाब ही दिया , ना मुझे कोई पता बताया , जहां अपने रिसर्च का दावा पेश कर सकूं , वरन् उन्‍होने मुझे हठी कहा .. वैसे मैं तो हठी हूं ही , खासकर समाज से ज्‍योतिषीय भ्रांतियों को दूर करने के मामलों में , क्‍यूंकि मुझे मालूम है कि ज्‍योतिष वह भी नहीं , जो एक वैज्ञानिक कहते हैं और न ही वह है जो एक अंधविश्‍वासी कहते हैं। इन दोनो के मध्‍य से निकलकर एक रास्‍ता ज्‍योतिष की ओर जाता है , इसलिए मैं ज्‍योतिष के सटीक तथ्‍यों का प्रचार करने में पीछे तो नहीं रह सकती,इसे मेरी मजबूरी ही समझा जा सकता है। मैं ब्‍लॉगस्‍पाट वाले अपने ब्‍लॉग पर महत्‍वपूर्ण लेख लिख रही हूं , इसलिए इस पोस्‍ट को दूसरे ब्‍लॉग में डाल दिया है ।

मुझे पता भी नहीं , पाठक संख्‍या 50,000 से बढ गयी

काफी दिनों बाद फुर्सत मिलते ही एक पोस्‍ट डालने को कंप्‍यूटर पर तो आ गयी , पर ब्‍लागर अकाउंट न खुलने की वजह से उसपर पोस्‍ट कर पाना संभव नहीं था। दो ब्‍लाग होने से चिंता की कोई बात नहीं , मैने पोस्‍ट डालने के लिए वर्डप्रेस अकाउंट खोल लिया । पर इसका ब्‍लाग स्‍टेटस देखा तो खुशी की सीमा न रही। इसने तो चुपके  चुपके पाठको की आवाजाही का 50,000 का आंकडा पार कर लिया था। दरअसल कुछ पारिवारिक कार्यों में व्‍यस्‍तता की वजह से मैने अपने ब्‍लोगों को काफी दिनों से खोलकर भी नहीं देखा था ।  शुरूआत के एक साल पूरे होने से पहले ही इसने 25,000 का आंकडा पार कर लिया था और अभी दूसरे साल पूरे होने ही है कि इसने 50,000 का आंकडा भी पार कर लिया और अभी 50,873 पर पहुंच गया है।

 मेरे लिए ताज्‍जुब की बात तो यह है कि इस ब्‍लाग पर मै सालभर से कोई पोस्‍ट भी नहीं डाल रही हूं । पिडले दिनों भी ब्‍लागस्‍पाट पर समस्‍या आने पर मैने इसपर एक ब्‍लाग पोस्‍ट किया था। आरंभ से ही हमने देखा है कि ब्‍लागस्‍पाट की तुलना में सर्चइंजिन की सहायता से इसपर पाठक अधिक आते हैं । पर इसके बावजूद भी मैने ब्‍लागस्‍पाट पर अपना ब्‍लाग लिखना शुरू किया। यह माना जा सकता है कि ब्‍लागस्‍पाट के आलेखों को हमारे ब्‍लागर मित्र पढते हैं , पर वर्डप्रेस के आलेख उनके लिए पुराने है , इसलिए मेरे ख्‍याल से इसे हिन्‍दी पाठक सर्चइंजिनों की सहायता से ढूंढते हुए आते हें। इसलिए यह कहना बिल्‍कुल गलत है कि इंटरनेट पर हिन्‍दी के पाठकों की संख्‍या सीमित है। वास्‍तव में इंटरनेट पर हिन्‍दी के पाठक तेजी से बढ रहे हैं। यह हिन्‍दी भाषा के लिए काफी मायने रखनेवाली बात है।अंत में , उन पाठकों का बहुत बहुत धन्‍यवाद , जिनकी सहायता से मेरे चिट्ठे को यह उपलब्धि मिली।

तकनीकी जानकार बताएंगे .. मेरे ब्‍लाग में क्‍या समस्‍या है ???

मेरे ब्‍लागस्‍पाट वाले ब्‍लाग को खोलकर देखें .. थोडी ही देर में एक दूसरी साइट खुल जा रही है .. क्‍या समस्‍या है .. मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा। ऐसी स्थिति में तो मेरे इस ब्‍लाग को कोई पाठक पढ भी नहीं सकते। मैने इस ब्‍लाग पर 28 मई को अपना अंतिम पोस्‍ट डाला था .. उसके बाद मैं कहीं और व्‍यस्‍त हो गयी थी .. जब बोकारो वापस लौटी तो यह समस्‍या नजर आयी है। इसी कारण आज यह पोस्‍ट अपने वर्डप्रेसवाले ब्‍लाग पर डाल रही हूं .. ताकि तकनीकी जानकार इसे पढ सकें और समस्‍या का कोई समाधान निकल सके।

पहली वर्षगांठ के पूर्व ही 25,000 धड़कनें

जी हां, जीवन में धड़कनों का बड़ा महत्व होता है। शरीर के प्रत्येक अंग में रक्त संचार करते हुए किसी की जिंदगी को बनाए रखने में इसकी बड़ी भूमिका होती है। यदि हम प्रश्न करें कि एक ब्लाग को जीवित रखने में किसकी भूमिका सबसे अधिक है , तो शायद सबों का जबाब होगा-. हिट्स। हिट्स के बिना एक ब्लाग के अस्तित्व की कल्पना कर पाना भी नामुमकिन है, यानि हिट्स हैं ब्लाग की धड़कन। यदि ये बातें सही हैं, तो मेरे ब्लाग का दिल अबतक 25,000 बार धड़क चुका है,जिसके कारण मेरे ब्लाग की जीवनी शक्ति बढ़ गयी है। इस धड़कन का ही कमाल है कि गूगल पेज रैंकिंग में भी मेरे ब्लाग को चार अंक मिले हैं। और ये सब तब हुआ है, जब मेरे ब्लाग को वर्षगांठ मनाने में अभी दस दिनों की देर है।   

पिछले वर्ष सितम्बर महीनें में ही मैने ब्लाग लिखना आरंभ किया था। इस एक वर्ष में भी मैं नियमित रूप से लेखन न कर सकी, फिर भी मेरे ब्लाग को इतनी उपलब्धि मिली है, इसका कारण ज्योतिष के प्रति जनसामान्य का रूझान ही है, इसमें कोई शक नहीं , बावजूद इसके कि ज्योतिष को आज भी अंधविश्वास माना जाता है। मैंनें अपने आलेखों में ज्योतिष के वैज्ञानिक स्वरूप को ही उभारने की चेष्टा की है। ज्योतिष एक पूर्ण सांकेतिक विज्ञान है, इसके द्वारा किसी व्यक्ति की परिस्थितियों की पूरी चर्चा की जा सकती है, 40 वर्षों के गहन अध्ययन और मनन के बाद `गत्यात्मक ज्योतिषीय अनुसंधान केन्द्र´ के अपने रिसर्च गत्यात्मक दशा पद्धति´ एवं `गत्यात्मक गोचर प्रणाली´ के विकास के साथ ही ज्योतिष एक वस्तुपरक विज्ञान बन गया है ,जिसके आधार पर सारे प्रश्नों के उत्तर हॉ या नहीं में दिए जा सकते हैं। इस पद्धति की प्रायोगिक जॉच पाठक खुद भी निम्न प्रकार कर सकते हैं। ध्यान दें , क्या आपका या आपके परिवार में किसी व्यक्ति का जन्म निम्न समयांतराल में हुआ है———–

1) वर्ष 1990 में 6 जनवरी से 17 जनवरी, 18 मई से 2 जून और 17 सितम्बर से 1 अक्तूबर के मध्य।

2) वर्ष 1977 के 21 दिसम्बर से 1978 के 25 फरवरी तक।

3) वर्ष 1966 में 14 जनवरी से 11 फरवरी के मध्य।

4) वर्ष 1942 में 5 मार्च से 13 अक्तूबर के मध्य।

5) वर्ष 1930 में 22 मई से 10 अगस्त के मध्य।

                   `

गत्यात्मक ज्योतिषीय अनुसंधान केन्द्र´ का दावा है कि उपरोक्त समयांतराल में जन्म लेनेवाले सभी व्यक्ति पिछले छ: वर्षों से यानि 2002 से बढ़ते क्रम में मनोनुकूल सफलता में कमी प्राप्त कर रहे हैं, किसी न किसी संदर्भ में परेशानी महसूस कर रहे हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास काफी कम हो गया है, किसी प्रकार के निर्णय लेने में वे धबराहट महसूस करने लगे हैं, चाहे उनका स्टेटस कितना भी उंचा क्यो न हो। इस वर्ष उनकी परेशानी बड़े रुप में दिखाई पड़ रही है।

इस ब्लाग में मेरी यह अंतिम पोस्ट है ,क्योंकि मैंने एक नए पते पर ब्लाग लिखना आरंभ कर दिया है। यह पता है–.

www.sangeetapuri.blogspot.com

अब मेरे सारे आलेख इसी पते पर ही मिलेंगे। साथ ही पुराने आलेखों को भी धीरे.धीरे इस नए पते पर ले जाने की कोशिश की जाएगी , ताकि सभी पोस्ट पाठकों को एक जगह मिल सकें। पाठकों से सहयोग की अपेक्षा है , कुछ मेरे लिए भी और कुछ खुद उनके लिए भी , क्योंकि मेरा दावा है कि मेरे लेखों को पढ़ने के बाद उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण में बढ़ोत्तरी होगी। इसके अतिरिक्त ज्योतिष के वैज्ञानिक स्वरूप को जानने के लिए `गत्यात्मक ज्योतिषीय अनुसंधान केन्द्र´ के निदेशक श्री विद्यासागर महथाजी के ब्लाग को भी पढ़ सकते हैं , जिसका पता है—.

www.jyotishsachyajhuth.blogspot.com

 

 

 

कहीं ये हिन्दी चिट्ठाकार भाई.बहनों में सर्वाधिक उम्र के तो नहीं ?

तीन.चार दिनों पहले श्री विद्यासागर महथा नाम के एक 69 वर्षीय सज्जन ने चिट्ठा लिखना आरंभ किया है। उनके चिटठे का नाम है-.फलित ज्योतिष : सच या झूठ । इन्होने अपना सारा जीवन ज्योतिष के विकास में समर्पित कर दिया , पर अपने रिसर्च को पहचान दिला पाने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। उनका लक्ष्य इस चिट्ठे के द्वारा समाज में ज्योतिष और धर्म के नाम पर प्रचलित भ्रांतियों को दूर कर ज्योतिष को एक विज्ञान का दर्जा दिलाना है। इसमें ये कहां तक सफलता प्राप्त कर सकेंगे , यह तो समय के साथ ही मालूम हो सकेगा ,पर अभी शायद ये हिन्दी चिट्ठाकार भाई.बहनों में सर्वाधिक उम्र के या उनमें से एक माने जा सकते हैं। इनके अंदर के दर्द को इनके चिटठे में लिखे परिचय से महसूस किया जा सकता है—.

आज से पांच दशक पूर्व विज्ञान में स्नातक और हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर डिग्री लेने के बाद युवावस्था में नौकरी में हर जगह विपरीत परिस्थितियों को देखकर प्रारब्ध पर विश्वास हुआ। ज्योतिष का अधययन किया ,इसके गणित क्षेत्र से खासा प्रभावित हुआ,पर फलित पक्ष में निराशा ही हाथ लगी। इसी कारण आलोचनात्मक ढंग से ज्योतिष की पत्र.पत्रिकाओं में मेरा प्रवेश हुआ, पर निरंतर अध्ययन से धीरे.धीरे इसमें वैज्ञानिक तथ्य भी दिखाई पड़ते गए। ज्योतिष की कमजोरियों को दूर करने और इसे विज्ञान का दर्जा देने में 40 वर्षों तक अपनी जिंदगी भी ढंग से नहीं जी पाया,ज्योतिष की कमियों का विश्लेषण करने के कारण ज्योतिष प्रेमियों से सहयोग की अपेक्षा नहीं की जा सकती थी , कार्यक्षेत्र ज्योतिष होने के कारण वैज्ञानिक वर्ग का भी सहयोग नहीं मिल पा रहा है। मेरे द्वारा ज्योतिष में जो रिसर्च किया गया,उसके आधार पर आप किसी के जन्मतिथि,जन्मसमय और जन्मस्थान के आधार पर उसके पूरे जीवन के उतार.चढ़ाव और सुख.दुख का के लेखाचित्र के साथ.साथ अन्य कई प्रकार के लेखाचित्र प्राप्त कर सकते हैं। मुझे आंतरिक सुख देने के लिए इतनी सफलता काफी है,पर सांसारिक दृष्टि से देखा जाए,मुझे इस बात का अफसोस ही रहेगा कि आखिर मैने अपने मस्तिष्क का उपयोग फलित ज्योतिष के ही क्षेत्र में क्यों किया,अन्यत्र क्यों नहीं ?

अंत में मै बतला दूं कि श्री विद्यासागर महथाजी मेरे पिताजी हैं ,जिन्होने अपनी हालत को देखते हुए कभी नहीं चाहा था कि मैं भी इस क्षेत्र में आऊं। पर इसके प्रति मेरी रूचि ने मुझे इस क्षेत्र में  खींच ही लिया। मैने पिछले वर्ष ही चिटठा लिखना आरंभ किया है। इस मध्य एक सवा महीने उनके पास रहने का मौका मिला, मैने तो उनसे बहुत कुछ सीखा ही बदले में उन्हें भी चिटठा लिखने को प्रेरित किया। इस क्षेत्र में उन्हें लाकर मैं काफी खुश हूं ,क्योंकि मैं जानती हूं कि वह दिन कभी न कभी तो आएगा ,जब हमें अपना लक्ष्य प्राप्त हो सकेगा।

 

 

जनसामान्य को राहत मिलने के आसार

हिन्दी में ब्लागिंग करनेवाले सभी भाई.बहनों को मेरा नमस्कार। पारिवारिक और अन्य जिम्मेदारियों के कारण मुझे ब्लागिंग की दुनिया से दूर हुए दो.चार महीनें ही हुए हैं, पर ऐसा लग रहा है, मानो अर्सा हो गया विचारों के आदान प्रदान का रसास्वादन किए। पिछले वर्ष सितम्बर माह में ही मैनें इस मनोरंजक , ज्ञानवर्द्धक और हिन्दी.प्रेमियों की इस दुनिया में प्रवेश किया था , पर इस वर्ष फरवरी के बाद से ही किसी न किसी प्रकार की बाधा के उपस्थित हो जाने से निरंतरता में रूकावट आती रही। दस दिन पहले ही दिल्ली से वापस लौटना हुआ , इस बीच कई बार देर रात तक आलेखों को पढ्ती रही , कुछ टिप्पणिया भी कर डाली , पर नयी पोस्ट कर पाने के लिए निश्चंति नहीं हो पायी।

पिछले दो.तीन महीनों में मेरे समक्ष कई प्रकार की मुसीबतें आयीं ,परिवार के एक.एक सदस्यों को सब कामकाज छोड़कर छुट्टी लेनी पड़ी। । मेरे अपने जीवन के हिसाब से ये मुसीबतें बड़ी ही थी , क्योंकि ईश्वर की दया से मैने मुसीबतें देखी ही नहीं है और इस बार आयी तो अचानक से डबल.ट्रिपल होकर। आज भी ईश्वर का शुक्र है, सब कुछ सामान्य हो गया, समय और पैसों के अलावा कोई नुकसान नहीं हुआ। समय महत्वपूर्ण तो होता है,पर यदि सही उपयोग किया जाए, तो दो.चार महीनें या वर्षभर की कमी इतने लम्बे जीवन में कोई मायनें नहीं रखती। पैसा भी तो आने.जाने वाली वस्तु है , किसी के पास ठहरनेवाली नहीं , इसलिए उसका नुकसान भी मायने नहीं रखता है। यही सब सोंच संतोष देने के लिए काफी है। मै ग्रहों के जड़.चेतन पर पड़नेवाले प्रभाव से संबंधित विषय यानि ज्योतिष की विशेषज्ञा हूं। इस क्षेत्र में 20 वर्षों से अध्ययनरत हूं , मानती थी कि ग्रहों का प्रभाव मनुष्य पर पड़ता है, पर इतना अधिक , इतनी तीव्रता से , इस हद तक ,इसका अंदाजा भी न था।

पिछले दो महीनें से मंगल शनि के साथ सिंह राशि में युति करते हुए भारी तबाही मचा रहा था। कहीa आग लग रही थी , कहीं आकस्मिक दुर्घटना , तो कहीं बम ही फट रहे थे। लोगोa के क्रोध को भड़काने में भी मंगल.शनि की बड़ी भूमिका होती है , जिसके कारण भी कहीं मार.काट , कहीं उपद्रव , तो कहीं घरेलू मामलों में भी अशांति मची थी। हालांकि 23 अगस्त तक बुध और 25 अगस्त तक शुक्र के सिंह राशि में बनें रहने से समस्याओं कs पूर्ण तौर पर सुधरने की बहुत कम संभावनाएं हैं , पर आज से ही काफी राहत की बात इसलिए हो जाएगी , क्योंकि आज ही मंगल शनि का साथ छोड़कर कन्या राशि में जा रहा है। कम से कम उनलोगों को तो अवश्य , जो पिछले दो महीने से किसी न किसी समस्या से जूझ रहे हैं , जबकि जन्मकुंडली के हिसाब से कोई स्थायी परेशानी नहीं होनी चाहिए।

 

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