फलित ज्योतिष विज्ञान है या अंधविश्वास ? इस बात का उत्तर दे पाना किसी भी विचारधारा के व्यक्ति के लिए कठिन है। परंपरावादी और अंधविश्वासी विचारधारा के लोग , जो आगे बढ़ने की होड़ में अपनी कमजोरियों को दूर करने के लिए चमत्कारों की अंधी गलियों और सुरंगों में चलकर यानि कई स्थान पर ज्योतिष में विश्वास करने के कारण धोखा खा चुके हैं , भी इस शास्त्र पर संदेह नहीं करते ,सारा दोषारोपण ज्योतिषी पर ही होता है। वैज्ञानिकता से संयुक्त विचारधारा से ओत-प्रोत व्यक्ति भी किसी मुसीबत में पड़ते ही समाज से छुपकर ज्योतिषियों के शरण में जाते देखे जाते हैं। ज्योतिष की इस विवादास्पद स्थिति के लिए मै सरकार शैक्षणिक संस्थानों और पत्रकारिता विभाग को दोषी मानती हूं। इन्होनें आजतक ज्योतिष को न तो विज्ञान ही सिद्ध किया और न ही अंधविश्वास। सरकार यदि ज्योतिष को अंधविश्वास समझती , तो जन्मकुंडली बनवाने या जन्मपत्री मिलवाने के काम में लगे ज्योतिषियों पर कानूनी अड़चनें आ सकती थीं। यज्ञ हवन करवाने तथा तंत्र-मंत्र का प्रयोग करनेवाले ज्योतिषियों के कार्यों में बाधा उपस्थित हो सकती थी। सभी पत्रिकाओं में राfशफल के प्रकाशन में रोक लगाया जा सकता था। आखिर हर प्रकार की कुरीतियों और अंधविश्वासों , जैसे जुआ , मद्यपान , बालविवाह , सती प्रथा , आदि को समाप्त करने में सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी , पर ज्योतिष पर विश्वास करनेवालों पर कोई कड़ाई नहीं हो सकी। आखिर क्यो ?
क्या सरकार ज्योतिष को विज्ञान समझती है ? नहीं , अगर वह इसे विज्ञान समझती , तो इस क्षेत्र में कार्य करनेवालों के लिए कभी-कभी किसी प्रतियोगिता , सेमिनार आदि का आयोजन होता तथा विद्वानों को पुरस्कारों से सम्मानित कर पोत्साहित किया जाता। परंतु आजतक ऐसा कुछ भी नहीं किया गया। पतकारिता के क्षेत्र में देखा जाए , तो लगभग सभी पत्रिकाएँ यदा-कदा ज्योतिष से संबंधित लेख इंटरव्यू भविष्यवाणियॉ आदि निकालती रहती है , पर जब आजतक इसकी वैज्ञानिकता के बारे में कोई निष्कर्ष ही नहीं निकाला जा सका , जनता को कोई संदेश ही नहीं मिल पाया , तो ऐसे लेखों का क्या औचित्य ?इस तरह मूल तथ्य की परिचर्चा के अभाव में फलित ज्योतिष को जाने-अनजाने काफी नुकसान हो रहा है।




जितने लोग ज्योतिष में विश्वास रखते हैं, मैं समझता हूँ कि काफी हैं. लेकिन समस्या ये है जो आपने कहा.. वैज्ञानिकता से संयुक्त विचारधारा से ओत-प्रोत व्यक्ति भी किसी मुसीबत में पड़ते ही समाज से छुपकर ज्योतिषियों के शरण में जाते देखे जाते हैं। … अगर ये लोग छुपकर ज्योतिषी से न मिले तो सारी समस्या हल हो जाए…मेरे ख्याल से आपके इस गत्यात्मक ज्योतिष के बाद ज्योतिष में एकरूपता का आभाव और बढ़गा.
very best
i think jyotish is the science.
jyotis is truth in the world.
andh vishvas nahi khe sakte jyotish ko par han aise log jo jyotish ke name par dhandha kiye hue hain jinhe inki sahi jankari nahi hai vo jarur andh vishvas faila rahe hain.mujhe lagta hai ki jyotish vigyan hai,jisse anubhavi jytishachary se milne par apni pareshani kam ki jaa sakti ha,yadi jyotish andh vishvas hota to kisi bare me ya suka subhav ya uske samparki ke bare me gyat kaise hota,
mera to aap sabhi se yahi khena hai ki un jyotish ko rokna chahiye jinko jyotish ke bare me gyan nahi hai.to andh vishvas apne aap samapt ho jayega.
amit verma
agra
9358382713