परंपरागत ज्योतिष में किसी भी लड़के या लड़की की जन्मकुंडली में लग्न भाव , व्यय भाव , चतुर्थ भाव , सप्तम भाव या अष्टम भाव में मंगल स्थित हो , तो उन्हें मांगलिक कहा जाता है और ऐसे मंगल का प्रभाव बहुत ही खराब माना जाता है। यहॉ तक कि यदि पति मंगला हो , तो पत्नी का नाश तथा पत्नी मंगली हो , तो पति का नाश करती है। संभावनाबाद की दृष्टि से इस बात में कोई वैज्ञानिकता नहीं है। किसी कुंडली में बारह भाव होते हैं और पॉच भाव में मंगल की स्थिति को अनिष्टकर बताया गया है। इस तरह समूह का 5/12 भाग यानि लगभग 41 प्रतिशत लोग मांगलिक होते हैं। लेकिन यदि समाज में ऐसे लोगों पर ध्यान दिया जाए , जिनकी आपस में नहीं बनती या जिनकी पति या पत्नियाँ मर गयी हों , तो हम पाएंगे कि उनकी संख्या सैकड़ों या हजारों में भी एक नहीं है। मंगला-मंगली के अतिरिक्त ज्योतिष की पुस्तकों में कुंडली मिलाने के लिए एक कुंडली मेलापक सारणी का उपयोग किया जाता है। इस सारणी से केवल चंद्रमा के नक्षत्र-चरण के आधार पर लड़के और लड़कियों के मिलनेवाले गुण को निकाला जाता है , जो पूर्णतया अवैज्ञानिक है , क्योंकि उनके स्वभाव , व्यक्तित्व , और भविष्य का निर्धारण सभी ग्रह करते हैं . आज घर-घर में कम्प्यूटर और इंटरनेट के होने से मंगला-मंगली और कुंडली मेलापक की सुविधा से दो बायोडाटा को डालकर उनका मैच देखना काफी आसान हो जाने से यह और बड़ी समस्या बन गयी है। इसके चक्कर में अच्छे-अच्छे रिश्ते हाथ से निकलते देखे जाते हैं। उन दो बायोडाटा को डालकर देखने से , जिनकर बिना कुंडली मिलाए शादी हुई है और काफी अच्छी निभ रही है तथा जिनकी कुंछली मिलाकर शादी हुई है और नहीं निभ रही है , कम्प्यूटर और उसमें डाले गए प्रोग्राम की पोल खोली जा सकती है। इतने सारे जन्मकुंडली में किए गए रिसर्चों के बाद हमारा लोगों से अनुरोध है कि वे पुरानी मान्यताओं पर ध्यान दिए बिना , कुंडली मेलापक की चर्चा किए बिना अपने बच्चों का विवाह उपयुक्त पार्टनर ढूँढकर करें। किसी मंगला और मंगली की शादी भी सामान्य वर या कन्या से निश्चिंत होकर की जा सकती है।
कुंडली मिलाने की वैज्ञानिकता
September 12, 2007 by संगीता पुरी
Posted in अंधविश्वास | 9 Comments
9 Responses
Leave a Reply
Can not see Hindi ?
Go to view, then go to encoding and click on Unicode UTF-8. If still Hindi is not visible, visit this or that page.
Read in your own script
गत्यात्मक ज्योतिष : एक परिचय
भारत के बहुत सारे लोगों को शायद इस बात का ज्ञान भी न हो कि विगत कुछ वर्षों में उनके अपने देश में ज्योतिष की एक नई शाखा का विकास हुआ है , जिसके आधार पर वैज्ञानिक ढंग से की जानेवाली सटीक तिथियुक्त भविष्यवाणी न सिर्फ जिज्ञासु बुfद्धजीवी वर्ग के मध्य चर्चा का विषय बनीं हुई है, वरन् सिर्फ जन्म-तिथि , जन्म.समय और जन्मस्थान मात्र की जानकारी से जातक के पूरे जीवन के उतार.चढ़ाव का लेखाचित्र बहुत कुछ सोंचने को भी बाध्य करती है। सबसे पहले दिल्ली से प्रकाfशत होनेवाली पत्रिका `बाबाजी´ के अंग्रजी और हिन्दी दोनो के ही 1994-1995-1996 के विभिन्न अंकों तथा ज्योतिष धाम के कई अंकों में `गत्यात्मक ज्योतिष´ को ज्योतिष के बुfद्धजीवी वर्ग के सम्मुख रखा गया था। जनसामान्य की जिज्ञासा को देखते हुए 1997 में दिल्ली के एक प्रकाशक `अजय बुक सर्विस´ के द्वारा इसपर आधारित पुस्तक `गत्यात्मक दशा पद्धति : ग्रहों का प्रभाव´ पहले परिचय के रुप में पाठकों को पेश की गयी। इस पुस्तक का प्राक्कथन लिखते हुए रॉची कॉलेज के भूतपूर्व प्राचार्य डॉ विश्वंभर नाथ पांडेयजी ने `गत्यात्मक दशा पद्धति की प्रशंसा की और उसके शीघ्र ही देश-विदेश में चर्चित होने की कामना करते हुए हमें जो आशीर्वचन दिया था , वह इस पुस्तक के प्रथम और द्वितीय संस्करण के प्रकाfशत होते ही पूर्ण होता दिखाई पड़ा। इस पुस्तक की लोकप्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि शीघ्र ही 1999 में इस पुस्तक का द्वितीय संस्करण प्रकाfशत करवाना पड़ा।
पुस्तक के प्रकाशन के पश्चात् हर जगह `गत्यात्मक ज्योतिष´ चर्चा का विषय बना रहा। कादfम्बनी पत्रिका के नवम्बर 1999 के अंक में श्री महेन्द्र महर्षि जी के द्वारा इस सिद्धांत को प्रस्तुत किया गया। जैन टी वी के प्रिया गोल्ड यूचर प्रोग्राम में भी इस पद्धति की चर्चा-परिचर्चा हुई। दिल्ली के बहुत से समाचार पत्रों में भी इस पद्धति पर आधारित लेख प्रकाfशत होते रहें। रॉची दूरदशZन , रॉची द्वारा भी पिछले वर्ष श्री विद्यासागर महथा जी से इंटरव्यू लेते हुए इस सिद्धांत की जानकारी जनसामान्य को दी .
गत्यात्मक ज्योतिष के जनक
`गत्यात्मक ज्योतिष´ की चर्चा के साथ ही साथ इसका प्रतिपादन करनेवाले वैज्ञानिक ज्योतिषी श्री विद्यासागर महथा का परिचय आवश्यक होगा , जिनका वैज्ञानिक दृिष्टकोण ही इस वैज्ञानिक ज्योतिष के जन्म का कारण बना। महथाजी का जन्म 15 जुलाई 1939 को झारखंड के बोकारो जिले में स्थित पेटरवार ग्राम में हुआ। एक प्रतिभावान विद्यार्थी के रुप में मशहूर महथाजी रॉची कॉलेज , रॉची में बी एस सी करते हुए अपने एस्टोनोमी पेपर के ग्रह नक्षत्रों में इतने रम गए कि ग्रह नक्षत्रों की चाल और उनका पृथ्वी के जड़-चेतन पर पड़नेवाले प्रभाव को जानने की उत्सुकता ही उनके जीवन का अंतिम लक्ष्य बन गयी। ग्रह-नक्षत्रो की ओर गई उनकी उत्सुकता ने उन्हें ज्योतिष शास्त्र के अध्ययन को भी प्ररित किया। गणित विषय की कुशाग्रता और साहित्य पर मजबूत पकड़ के कारण तात्कालीन ज्योतिषीय पति्रकाओं में इनके लेखों ने धूम मचायी। 1975 में उन्हीं लेखों के आधार पर `ज्योतिष मार्तण्ड´ द्वारा अखिल भारतीय ज्योतिष लेख प्रतियोगिता में इन्हें प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया। उसके बाद तो `ज्योतिष-वाचस्पति´ , `ज्योतिष-रत्न´ , `ज्योतिष-मनीषी´ जैसी उपाधियों से अलंकृत किए जाने का सिलसिला ही चल पड़ा। 1997 में नाभा में आयोजित सम्मेलन में देश-विदेश के ज्योतिषियों के मध्य इन्हें स्वर्ण-पदक से अलंकृत किया गया।
इनके सभी लेख सर्वथा मौलिक नई दृिष्ट से संयुक्त थे , जिसमें सभी परंपरागत सिद्धांतों का गाणितिक मूल्यांकण होता रहा , इसलिए वे वैज्ञानिक दृिष्टकोण रखनेवालों के लिए प्रेरणास्पद बनें रहें। ज्योतिषीय जवाबदेहियों को निभाते हुए इन्होनें अपने पारिवारिक दायित्वों का भी बखूबी निर्वाह किया। अपने अनुसंधान को आवश्यक आधार देने तथा आवश्यक पारिवारिक जवाबदेहियों को पूरा करने के पश्चात् ये 1999 से नई दिल्ली में स्थायी तौर पर निवास कर रहे हैं। इन्होनें कभी अपनी सटीक हुई भविष्यवाणियों को तमगे की तरह सजाना नहीं जाना , बल्कि भविष्यवाणी को और सटीक बनाने के रिसर्च में ही जुटे रहें।लोगों के दिलोदिमाग से हर प्रकार के अंधविश्वास एवं ज्योतिषीय भ्रांतियों को दूर कर एक प्रगतिशील और वैज्ञानिक समाज की स्थापना करना इनका मुख्य उद्देश्य है।
About me
पोस्ट-ग्रेज्युएट डिग्री ली है अर्थशास्त्र में......पर सारा जीवन समर्पित कर दिया ज्योतिष को.....अपने बारे में कुछ खास नहीं बताने को अभी तक .......ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना......बस सकारात्मक सोंच रखती हूं.... सकारात्मक काम करती हूं....हर जगह सकारात्मक सोंच देखना चाहती हूं .....आकाश को छूने के सपने हैं मेरे ....और उसे हकीकत में बदलने को प्रयासरत हूं.....देखिए,सफलता कब मिलती है ।
पिछले अंकों को देखें यहाँ .
- July 2009 (1)
- June 2009 (1)
- August 2008 (3)
- May 2008 (4)
- April 2008 (8)
- March 2008 (2)
- February 2008 (10)
- January 2008 (12)
- December 2007 (15)
- November 2007 (17)
- October 2007 (15)
- September 2007 (21)
Categories
अब हमलोगों ने इधर लिखना शुरू किया है
-
इन्हें सबने पसंद किया , आप भी अवश्य पढे .
-
क्या ख़ूब कहा आपने , बहुत बहुत धन्यवाद .
Byas Jee Mishra on जन्मकुंडली बनाम् कर्मकुंड… seema on जन्मकुंडली बनाम् कर्मकुंड… hemlata on जन्मकुंडली बनाम् कर्मकुंड… dinesh on जन्मकुंडली बनाम् कर्मकुंड… -
कितने लोग आए गए .
- 62,243 बार पढ़ा गया
धन्यबाद उनका , जिनसे मुझे सहयोग मिला .
-

My blog is worth $6,209.94.
How much is your blog worth?



आप सही कह रहे हो भाई इन ज्योतिषियों और प्रोग्राम वालो को सड़क पर घसीट के रागेदना चाहिए …. ये मांगलिक वान्ग्लिक सब बेवकूफी है, लेकिन लोग अक्कल का इस्तेमाल कहाँ करते है… भाईजी इन कुरीतियों से ये विश्व न जाने कब छुटकारा पायेगा
ramesh patel to pagal ho gaya hai. hindu ho kar bhi aisi baat karta hai. ye sab gulami ki maansikta hai.
aaj govt crores rs weather ke liye deti hai par ve sahi nahi bata pate. jabki astrologers ko kuch nahi deti fir bhi ve 50% tak sahi predictions karte hain.
Bejnesh dukan dairy
जबाब-.सुदामाजी ,आप ठीक कहते हैं।
PAWAN
aap bilkul galat kahte hai sir mere vichar se aap kisi vidwan pandit se nahi mile hai,,,ज्योतिष ek Science hai,,,pahle iske bare mein achi tarah se study kijiye phir boliye,,,,thnx
aaj kal pandit 15 minute mae patri dekh kar prediction karte hai lekin agar sahi tareeke se patri ko dekhna ho to pura din bhi sufficient nahi hai, iseliye logo ka vishwas dheere dheere in jyotishiyo se uth raha hai
aap mujhe bta sakte hai ki me jis ladke se pyar karti hu kya wo mujhe mil jaiyga.wo mujhse pyar karta hai ya nahi.
mera janm 07/04/86 aur uska 24/10/81 ka hai
MERA LADKA KA JANAM 19.09.1982 KO RAAT(Khetri Nagar Rajasthan) KA9-15P.M. PER HUA HAI.LADKA NAE Msc.Microbiology,M.Phill kiya hai iskae sath Clinical Research mai diploma liya hai,parntu abhi tak uska service nahi laga hai,Please tell us uska naukari kab lagaiga