किसी धनाढ्य व्यक्ति के यहॉ लक्ष्मी-पूजन करने के लिए पंडित शुभ मुहूर्त निकालते हैं , पूजा हो जाती है , धन की वर्षा भी होने लगती है , किन्तु आश्चर्य की बात यह है कि एक पंडित अपने लिए वह शुभ मुहूर्त क्यों नहीं निकाल पाता ? वैसी हालत में धन की वर्षा उसी के यहॉ होती। उसे केवल दक्षिणा से संतुष्ट नहीं रहना पड़ता।
जहॉ एक ओर सामूहिक उत्सव , एक ही मेले में लाखों लोगों का एक साथ उपस्थित होना , सामूहिक विवाह , सौंदर्य प्रतियोगिता आदि सुखद अहसास खास समयांतराल के विषयवस्तु हो सकते हैं , वहीं दूसरी ओर भूकम्प , तूफान , युद्ध और दुर्घटनाओं से एक समय में लाखों लोगों का प्रभावित होना भी सच है। इस प्रकार अच्छे या बुरे समय को स्वीकार करना हमारी बाध्यता है , किन्तु किसी समय अमृतयोग , सिद्धियोग या महेन्द्रयोग चल रहा हो और उसी समय किसी विषय की परीक्षा चल रही हो , तो क्या लाखों की संख्या में परीक्षा दे रहे सभी विद्यार्थी पास कर ही जाएंगे ? कदापि नहीं , सभी विद्यार्थियों को उनकी योग्यता के अनुरुप ही फल की प्राप्ति होगी।
शकुन या लॉटरी की पद्धति से कई संभावनाओं में से एक को स्वीकार करने की प्रथा है। किन्तु हम अच्छी तरह जानते हैं कि बार-बार ऐसे प्रयोगों का परिणाम विज्ञान की तरह एक जैसा नहीं होता। अत: इस प्रकार के शकुन भले ही कुछ क्षणों के लिए आहत मन को राहत दे दे , भविष्य या वर्तमान जानने की विधि कदापि नहीं हो सकती।
स्मरण रहे , विज्ञान से सत्य का उदघाटन किया जाता है। अनुमान से कई प्रकार की संभावनाओं की व्याख्या करके अनिश्चय और निश्चय के बीच पेंडुलम की तरह थिरकते रहना पड़ सकता है , किन्तु इन दोनों से ही अलग लॉटरी या शकुन पद्धति से अनुमान और सत्य दोनो की अवहेलना करते हुए जो भी हाथ लग जाए , उसे अपनी नियति मानने का दर्द झेलने को विवश होना पड़ सकता है।लेकिन जब योजना को स्वरुप देने में संसाधन की कमी हो रही हो , कई तरह की बाधाएं आ रही हों , तो ऐसी परिस्थिति में ज्योतिषी से यह सलाह अवश्य ली जा सकती है कि निकट भविष्य में कोई शुभ मुहूर्त उसके जीवन में है या नहीं ?




आपने सही कहा संगीता जी शुभ अशुभ कुछ नहीं सब मन को संतोष देने की बात है कहते हैं गुरुवार को बॉल ना कट्वाओ आख़िर क्यों हम कोंन होते हैं दिनों में भेद करने वाले दरअसल सारे दिन समय शुभ होता है
——रामकिशोर अग्रवाल
अभिवादन
ब्लोग पर आपका लेखन देखता रहता हूं आपक अच्छा लिखतेहै . आपसे एक निवेदन करना चाहता था. मै एक पत्रिका का संपादन देख रहा हूं पत्रिका राजनैतिक और सामाजिक विषय पर है. आप यदि इसके लिये कुछ लेखन सहयोग करेंगे तो मुझे अच्छा लगेगा. पत्रिका में पारिश्रमिक का प्रावधान अभी नहीं है अत्% पूर्व मे अंयत्र परकाशित् सामग्री भी आप भेज सकते हैं.
योगेश समदर्शी
yogesh.samdarshi@gmail.com