Posted in गत्यात्मक ज्योतिष on November 29, 2007 | No Comments »
फलित ज्योतिष के प्राचीन ग्रंथों में वर्णित ग्रहों की अवस्था और उनकी गति के अनुसार ही मनुष्य के जीवन में पड़नेवाले ग्रहों के प्रभाव के बारह-बारह वर्षों के विभाजन को `गत्यात्मक दशा पद्धति´ कहते हैं। विंशोत्तरी दशा पद्धति की तरह एकमात्र चंद्रमा का नक्षत्र ही सभी ग्रहों को संचालित नहीं करता , वरन् सभी [...]
Read Full Post »
Posted in विभिन्न आयाम on November 27, 2007 | No Comments »
मानव जीवन को प्रभावित करनेवाला दसवॉ संदर्भ पिता , समाज , रोजगार , पद और प्रतिष्ठा से संबंधित मामला होता है। किन्तु इस भाव से पिता के बारे में कोई व्यक्तिगत जानकारी नहीं दी जा सकती है। पिता कितने भाई-बहन हैं या उनकी कद काठी क्या है या वे किस प्रकार के रोजगार में हैं [...]
Read Full Post »
Posted in विभिन्न आयाम on November 25, 2007 | 2 Comments »
मानवजीवन को प्रभावित करनेवाला नवॉ संदर्भ धर्म या भाग्य हैं। किन्तु इस भाव से यह नहीं बतलाया जा सकता है कि जातक किस धर्म से संबंध रखता है — वह मंदिर जाता है या मस्जिद , गुरुद्वारा या चर्च , क्योंकि हिन्दू के बच्चे अलग समय में पैदा होते होंगे , मुस्लिम या सिख या [...]
Read Full Post »