मानव जीवन को प्रभावित करनेवाला छठा संदर्भ किसी प्रकार का रोग, ऋण, शत्रु यानि हर प्रकार का झंझट और उसे दूर करने की शक्ति यानि प्रभाव है। किसी प्रकार के रोग को समझने के लिए जब एक डॉक्टर मरीज के नाना प्रकार के टेस्ट, एक्सरे और सोनोग्राफी की आवश्यकता महसूस करते है, तो कुछ ज्योतिषियों का किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली देखकर उसके शरीर के रोगों के नाम बतला पाने का दावा करना कहॉ तक उचित है, यह सोंचनेवाली बात है। भिन्न-भिन्न युग में भिन्न-भिन्न रोग मेडिकल साइंस में रिसर्च करनेवालों के सिर का दर्द रहे हैं, एक को हल करने में सफलता मिलती है, तो दूसरी बीमारी की वजह से परेशानी बनी ही रहती है, जबकि युग के अनुसार जन्मकुंडली में किसी भी प्रकार का अंतर नहीं देखा जा रहा है । ऋण के संदर्भ में भी विचार करें,तो इसके प्रकार या तीव्रता को बतला पाना संभव नहीं दिखाई पड़ता है। किसी युग में लोग कर्म के ऋणी होते थे, आज भी कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा देखा जाता है कि एक के सही वक्त पर एक मजदूर का काम किसी ने किया, तो दूसरे को भी उसके समय पर एक मजदूर का काम करना पड़ता है । जब रुपए पैसे की प्रधानता नहीं थी तो लोग अनाज के ऋणी होते थे और अब रुपए पैसे के ऋणी लोागों की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले लोग मजबूरी में अपनी किसी जरुरत को पूरी करने के लिए ऋण लेते थे, पर अब लोग अपने स्तर को बढ़ाने के प्रयास में शौकिया ऋण लेते हैें। प्रवृत्ति के इस अंतर को किसी भी कुंडली को देखकर बतलाया नहीं जा सकता। इसी प्रकार शत्रु की संख्या या उसके व्यवहार की भी जानकारी नहीं दी जा सकती। किसी के प्रभाव के स्तर को भी जन्मकुंडली देखकर नहीं बतलाया जा सकता।
इस संदर्भ की बातें जन्मकुंडली देखकर की जाए, तो यह स्पष्ट तौर पर कहा जा सकता है कि जातक में रोग प्रतिरोधक क्षमता है या नहीं ? क्या जीवन में हमेशा मजबूर होकर ऋणग्रस्त बने रहने की नौबत रहती है ? या अपने स्तर को बढ़ाने के लिए ऋण लेना पड़ता है या ऋण लेने की नौबत आती ही नहीं है ? किसी प्रकार के झंझट में कूद पड़ने की हॉबी है या किसी प्रकार के झंझट से भागते रहने के बावजूद उलझना पड़ता है ? किसी प्रकार के शत्रु से हमेशा भय बना होता है ? किसी प्रकार के झंझट को दूर करने की हिम्मत, ताकत या प्रभाव उसके पास है या नहीं, यह भी बता पाना संभव है। कुल मिलाकर जातक के प्रभावशाली होने या नहीं होने की चर्चा किसी की जन्मकुंडली देखकर की जा सकती है। किसी जन्मकुंडली में असाध्य रोग से ग्रसित होने का योग किसी युग में व्यक्ति को टी बी का मरीज बनाती थी, उसके बाद कैंसर का और अभी वही योग उसे एड्स का मरीज बना देती है। इसी तरह किसी जन्मकुंडली में ऋणग्रस्तता का योग एक साधारण व्यक्ति को 500-1000 का तथा बड़े व्यवसायी को करोड़ों का ऋणी बना सकता है।
(मेरे द्वारा लिखित `गत्यात्मक झरोखे से ज्योतिष´ की पांडुलिपि से उद्धृत)



