मानव जीवन को प्रभावित करने वाला आठवॉ संदर्भ किसी व्यक्ति का जीवन या उसकी जीवन शैली होती है। अधिकांश ज्योतिषी इस भाव से किसी व्यक्ति की आयु को समझने की कोिशश करते हैं, परंतु यह बहुत ही मुिश्कल कार्य है। प्राचीनकाल में जब मेडिकल साइंस विकसित अवस्था में नहीं था, तो अधिकांश बालक बचपन में ही भगवान को प्यारे हो जाते थे। एक बार किसी बीमारी का प्रकोप होता तो सब माताओं की गोद सूनी हो जाती थी, लेकिन आज ऐसा नहीं है, आज दो बच्चों को जन्म देने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों की माताएं भी परिवार नियोजन के साधनों का इस्तेमाल शौक से करती हैं। उस समय की तुलना में आज मृत्यु-दर में काफी कमी देखी जा रही है, परंतु ग्रहो की स्थिति पर गौर किया जाए, तो हम पाएंगे कि उसमें कोई अंतर नहीं आया है। तब तो यह नििश्चत तौर पर कहा जा सकता है कि आज मनुष्य की आयु उसके अपने कारनामों से ही बढ़ी है, उसमें ग्रहों का खास प्रभाव नहीं है। हॉ, कभी-कभी जीवन में शारीरिक मृत्युतुल्यकष्ट आने की संभावना बनी होती है, किन्तु उस कष्ट को झेलने के बाद पुन: उनका जीवन अच्छा हो जाता है । कभी-कभी किसी खास प्रदेश में किसी प्राकृतिक दुघZटना के घटने से उस क्षेत्र के आधे से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। क्या उनमें से सबका जन्म दुनिया के अन्य प्रदेशों में जन्म लेनेवालों से अलग समयांतराल में होता है ? नहीं। ऐसा नहीं माना जा सकता।
परंतु ग्रहों के अनुसार मनुष्य के जीवन जीने का ढंग अवश्य होता है। कोई व्यक्ति अपने जीवन के मामले में महत्वाकांक्षी है, किसी भी परिस्थिति में जीवन जीने में उसे कठिनाई नहीं होती या वह सिर्फ सहज-सुखद जीवन का अभिलाषी है ? दैनिक कार्यक्रमों के प्रति वह जवाबदेह है या इसकी वह उपेक्षा करता है ? वह दिनभर अपने मन-मुताबिक कार्य करना चाहता है या फिर किसी दवाब में उसे कार्य करने को मजबूर होना पड़ता है ? जीवन के प्रति उसकी सोंच कैसी है ? उसकी जीवनशैली को लोग पसंद करते हैं या नहीं ? इन सब बातों की सूचना एक ज्योतिषी के द्वारा दी जा सकती है।
(मेरे द्वारा लिखित `गत्यात्मक झरोखे से ज्योतिष´ की पांडुलिपि से उद्धृत)



