सख्ती,कठोरता,वरदान प्रकृति का,
हर्षित हो अंगीकार कर ।
दृढ़ , अचल चरित्र देगी तुझे ,
क्रमबद्ध ढंग से यह सजकर ।
जैसे बनती हैं भव्य अट्टालिकाएं,
जुड़कर पत्थरों में पत्थर।
हर्षित हो अंगीकार कर ।
दृढ़ , अचल चरित्र देगी तुझे ,
क्रमबद्ध ढंग से यह सजकर ।
जैसे बनती हैं भव्य अट्टालिकाएं,
जुड़कर पत्थरों में पत्थर।



