स्वक्षेत्री ग्रहों का प्रभाव
Posted in गत्यात्मक ज्योतिष on December 19, 2007 | No Comments »
फलित ज्योतिष के प्राचीन ग्रंथों में स्वक्षेत्री ग्रहों को काफी महत्वपूर्ण समझा जाता है । यहाँ तक की किसी जनमकुंडली में एक या दो स्वक्षेत्री ग्रह हें , तो वह किसी भाग्यवान की ही कुंडली होगी , एसा माना जाता है। किंतु वास्तव में ऐसी बात नहीं होती है। प्रत्येक कुंडली में बारह खाने होते [...]



