मानव जीवन को प्रभावित करनेवाला ग्यारहवां संदर्भ जातक के अपने इच्छित लाभ , लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम और मंजिल को माना गया है। किन्तु जातक के लक्ष्य के बारे में कोई क्षेत्र या स्थान नहीं बतलाया जा सकता है , साथ ही वह कितनी ऊंचाई प्राप्त कर सकता है , यह भी नहीं बतलाया जा सकता है ,क्योंकि हम हर युग और हर क्षेत्र में लोगों के लक्ष्य में अंतर पा रहे हैं। पढ़ाई&लिखाई के क्षेत्र में ही देखा जाए , तो कभी स्कूली पढ़ाई में ही पढ़ाई का अंत हो जाता था , कभी कालेज की पढ़ाई ही काफी थी ,फिर युनिवर्सिटी में पढ़ाई हाेने लगी , अाज प्रोफेशनल पढ़ाई ही पढ़ाई का लक्ष्य बन गया है। पहले प्रथम श्रेणी ही ला पाना गर्व की बात थी , पर अब के मेधावी छात्रों के लिए 95 प्रतिशत से ऊपर लाना संभव है। रोजगार के क्षेत्र में भी देखा जाए , तो पहले अपने गांव या कस्बे के ही बड़े आफिसर या व्यवसायी के रूप में चर्चित होने पर ही लोग खुश रहते थे , पर अब लक्ष्य बढ़ता ही जा रहा है और तरक्की के लिए कोई सीमा नहीं रह गयी है। नेतृत्व के क्षेत्र में भी लोगो की लालसा को बढ़ते ही देखा जा रहा है , जबकि ग्रह तो लाखों वषों से ज्यो के त्यों चल रहे हैं और उनके अनुसार यदि जन्मकुंडली बनायी जाए , तो लाखों वर्षों में वह एक जैसी ही बनेगी।
किसी की जन्मकुंडली को देखकर किसी व्यक्ति की अपने लक्ष्य के प्रति लगन और निष्ठा को बतलाया जा सकता है। किस उम्र में वह इस दृष्टि से सफल हो सकता है अोर किस उम्र में मेहनत के बावजूद असफलता की संभावना बनेगी , इसकी चर्चा की जा सकती है।
मेरे द्वारा लिखित गत्यात्मक झरोखे से ज्योतिष की पांडुलिपि से उद्धृत



