कुंडली के बारह भावों के वर्गीकरण का आधार
Posted in गत्यात्मक ज्योतिष on December 26, 2007 | 2 Comments »
प्राचीन आर्य ऋषियों , महर्षियों और अन्य ज्योतिषियों ने पूरे भचक्र के 360 डिग्री को बारह भागों में यानि 30.30 डिग्री में विभाजित कर दिया था , जिसका फलित ज्योतिष में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है , क्योंकि इन बारहों भागों का संबंध मनुष्य के अलग.अलग प्रकार के सुख और दुख से है। इन बारहों [...]



