मंगल सौरमंडल का एक प्रमुख ग्रह है , यह हिम्मत, ताकत , अधिकार, उमंग और उत्साह का प्रतीक ग्रह है इसलिए जिनका जन्मकालीन मंगल मजबूत होता है , वे अपनी हिम्मत , ताकत और अधिकार का उपयोग उमंग और उत्साह से करते हैं , विपरीत स्थिति में जातक को अपने अधिकार , शक्ति और ताकत का प्रयोग करने में भय होता है।
गत्यात्मक ज्योतिष में मंगल की शक्ति का आकलण सूर्य से इसकी दूरी के आधार पर ही किया जाता है। मंगल जब भी सूर्य के साथसाथ होता है , बहुत ही मजबूत स्थिति में होता है। सूर्य से 0 डिग्री की दूरी पर स्थित होने से मंगल सूर्य से सर्वाधिक दूरी पर यानि लगभग 38 करोड़ किमी की दूरी पर स्थित होता है , इस समय मंगल की गत्यात्मक शक्ति सबसे अधिक होती है। सूर्य से 90 डिग्री की दूरी पर स्थित सामान्य स्थिति का पृथ्वी से औसत दूरी पर यानि 27 करोड़ किमी की दूरी पर स्थित होता है। लेकिन जैसे ही इसकी दूरी सूर्य से 120 डिग्री से अधिक होने लगती है , यह कमजोर होने लगता है , इसकी गत्यात्मक शक्ति भी सामान्य से कम होने लगती है । सूर्य से 180 डिग्री की दूरी पर स्थित मंगल अत्यधिक कमजोर स्थिति का होता है , क्योंकि इस समय इसकी पृथ्वी से दूरी मात्र 8 करोड़ किमी की होती है।
मंगल युवावस्था का प्रतीक ग्रह है। जिन जातकों का मंगल गत्यात्मक शक्ति संपन्न होता है , वे 24 वर्ष से 36 वर्ष की उम्र तक का समय मौजमस्ती और आराम के साथ काटते हैं। विशेषकर 30वां वर्ष उनके लिए विशेष सफलता देनेवाला वर्ष होता है। जिनका म्रगल सामान्य गत्यात्मक शक्ति संपन्न होता है , वे इस अवधि में महत्वाकांक्षी होते हैं और कार्य का दवाब महसूस करते हैं। जिनका मंगल बहुत बुरा यानि सूर्य से लगभग 180 डिग्री के आसपास की दूरी पर हो , तो जातक इस अवधि में पराधीन और किंकर्तब्यविमूढ़ अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए दूसरे का मुहं जोहने को बाध्य होते हैं।विशेषकर 30वां वर्ष उनके लिए विशेष बुरा होता है।
युवावस्था व्यक्ति के लिए कुछ करने का समय होता है , मंगल के बुरे प्रभाव के पड़ने से व्यक्ति की हिम्मत या मनोबल युवावस्था में ही टूट जाती है। मंगल अपना हल्का प्रभाव 18 वर्ष की उम्र के बाद ही डालना आरंभ कर देता है। 36 वर्ष की उम्र के बाद ही ऐसे व्यक्ति नए सिरे से जिंदगी आरंभ करते हैं। इसलिए अधिकांश महान व्यक्तियों की जन्मकुंडली में सूर्य और मंगल साथ.साथ या अधिकतम 60 डिग्री की दूरी पर स्थित होते हैं , अमेरिका के आइजन होवर हों या चीन के माओत्से तुंग , रूस के स्टालीन हों या रोम के नीरो , पाकिस्तान के जिन्ना साहब हों या इटली के मुसोलिनी , भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हों या सरदार वल्लभ भाई पटेल , गोस्वामी तुलसीदास हो या रवीन्द्र नाथ टैगोर , गौतम बुद्ध हों या अरविन्द घोष , आचार्य रजनीश हों या वी भी रमण , एस राधाकृष्णन हों या वी वी गिरी –. सभी के मंगल मजबूत स्थिति में हैं। लेकिन कुछ महापुरूषों के मंगल सूर्य से 120 डिग्री से अधिक की दूरी पर भी स्थित हैं , उनमें से सभी ने 24 से 36 की अपने जीवनकाल को कठिनाई भरा पाया था। महाराणा प्रताप , छत्रपति शिवाजी , पृथ्वीराज चौहान और सुभाषचंद्र बॅस जैसे वीरों ने कमजोर मंगल के कारण उत्पन्न कठिनाई और असफलता भरे 24 से 36 वर्ष की उम्र को पार करने के कारण ही दुनिया की नजर में महान बनें। महात्मा ईसा मसीह , रामानुजाचार्य , पं बालगोविन्द ब्रह्मचारी जैसs लोग 24 वर्ष से 36 वर्ष की असफल उम्र में ही अपने लिए अलग तरह के रास्ते का चुनाव किया और विश्व में सम्मानित हुए।
मंगल अच्छी या बुरी हालत में जातक को 24 वर्ष से 36 वर्ष की उम्र तक उस.उस भाव से संबंधित कठिनाई और खुशी देता है , जिस.जिस भाव से वह संबंधित होता है। मंगल न सिर्फ जिस भाव का स्वामी होता है , वरण् जिस भाव में स्थित होता है , उस भाव और उसके राशिश के दूसरे भाव को भी प्रभावित करता है , इसके अतिरिक्त जिस.जिस ग्रह के साथ या निकटस्थ होता है , उस.उस भाव से संबंधित अच्छा या बुरा फल भी प्रदान करता है। पं जवाहरलाल नेहरू , डा राजेन्द्र प्रसाद ,अकबर बादशाह ,श्रीमती इंदिरा गांधी , अमिताभ बच्चन , राजीव गांधी आदि की जन्मकुंडली में स्थित गत्यात्मक शक्तिसंपन्न मंगल के प्रभाव को हम उनके वास्तविक जीवन के 24 वर्ष से 36 वर्ष की उम्र तक देख सकते हैं , जबकि श्रीमती मेनका गांधी , पं श्रीराम शर्मा आचार्य , पं दौलतराम जोशी , टीपू सुल्तान आदि की जन्मकुंडली में स्थित गत्यात्मक शक्तिहीन मंगल के प्रभाव को हम उनके वास्तविक जीवन के 24 वर्ष से 36 वर्ष की उम्र तक देख सकते हैं।
।




i want to know about my marriage