ब्लागर भाई.बहनों और पाठकों से विदाई
March 7, 2008 by संगीता पुरी
हिन्दी ब्लागिंग जगत में चल रहे मेरे क्रियाकलापों की गति पिछले महीनें से ही काफी धीमी हो गयी है और मार्च में लगभग सुसुप्त सी भी रह सकती है। इससे दूर होकर मुझे काफी खालीपन का अहसास हो रहा है , किन्तु फिर भी इसपर धयान.संकेन्दित नही कर पा रही हूं , कारण है , मेरे दोनो बेटे ,जो इस महीने सी बी एस ई बोर्ड की 10वीं और 12वी की परीक्षा दे रहे हैं । इनकी परीक्षाओं की वजह से फरवरी से ही मेरा पूरा ध्यान बच्चों पर संकेन्द्रित हो गया है और समयाभाव के कारण पिछले महीने से ही कम पोस्ट कर पा रही हूं , मार्च में शायद नहीं भी कर पाउं। बड़ी मुश्किल से समय निकालकर मैने 2 मार्च को लग्न.राशिफल पोस्ट किया , क्योंकि बहुत सारे पाठकों को इसका इंतजार रहता है। जहां मेरे पाठकों को इस महीनें पढ़ने को कुछ नया न मिल सकेगा , इसका मुझे खेद है , वहीं दूसरी ओर इस बात का अफसोस भी कि इस महीनें प्रकाशित होनेवाले बहुत सारे लेखों का आस्वादन मैं भी नहीं कर पाउंगी। मार्च के बाद न सिर्फ इस चिट्ठे पर ही नियमित तौर पर पोस्ट किया जाएगा , वरन् कई और चिट्ठे बनाने और उनमें भी नियमित तौर पर पोस्ट करने का कार्यक्रम है। आशा है , हिन्दी ब्लाग जगत से इस महीनें की मेरी अनुपस्थिति के लिए आप मुझे क्षमा करेंगे।




आपका इंतजार रहेगा
जबाब..आशीषजी, बहुत.बहुत धन्यवाद।
माना कि आप समयाभाव के कारण पोस्ट नही लिख पा रही है भलाई आप कभी भी पोस्ट लिखे पर हम ब्लॉगर भाई बहिनों को छोड़ कर न जाए . आप अपने निर्णय पर पुनः विचार करे
जवाब.. महेन्द्रजी,मै समय निकालकर पोस्ट पढ़ती रहूंगी।
Best of Luck
जबाब..चंदनजी , बहुत.बहुत धन्यवाद।
अरे नही जी आप कार्य को निपटाये ,हम आपको यही मिलेगे इंतजार मे..
जबाब..अरूणजी , बहुत.बहुत धन्यवाद इतने दिनों तक इंतजार करने के लिए।
aapke bachhon ki pariksha ke liye best of luck,aur aapka intazaar rahega aur post ke saath.
जबाब..महकजी , बहुत.बहुत धन्यवाद इतने दिनों तक इंतजार करने के लिए।
aap bachchon ka bhavishya dekhen, duniya ke bhavishya ki chinta na karen.
जबाब..अरूण आदित्यजी , फिलहाल मै बच्चो का भविष्य ही देख रही हूं , पर मुझे लगता है , आज न कल ही सही , दुनिया का भविष्य देखना ही होगा। इस जबाबदेही से इंकार नहीं किया जा सकता।
संगीता जी, यही तो अंतर है महिला और पुरुष में उत्तरदायित्व और जिम्मेदारी की भावना या कहें तो बोझ का है। अब देखिए मेरी बेटी की भी इस बार 10वीं की परीक्षा है। लेकिन मैं सारा जिम्मा पत्नी पर ढेलकर एकदम निरापद हूं। ब्लॉग लिख रहा हूं और शायद ही इसमें बेटी की परीक्षा की वजह से कोई व्यवधान पड़े।
आज महिला दिवस के मौके पर जब मैंने यह पोस्ट पढ़ी तो मेरे मन में यही विचार आए।
शुक्रिया
जबाब..अनिल रघुराजजी ,शुक्रिया.
संगीता जी, आप कृपया लिखती रहें. इससे पाठकों को नई जानकारी सीखने, समझने और पढने के लिये मिलेंगी
जबाब..अंजनाजी , मुझे खुशी हुई , यह जानकर कि आप जैसे पाठकों को भी मेरे ब्लाग से कुछ नई जानकारी मिल जाती है।