अरे, नहीं भई, मै अप्रैलफूल नहीं बना रही
April 1, 2008 by संगीता पुरी
हां , आज आप सभी ब्लागर भाई-बहनों के साथ अप्रैलफूल मनाने का मेरा कोई इरादा नहीं। परीक्षाओं का मौसम खत्म हुआ और सारे परीक्षार्थियों के साथ ही साथ कुछ अभिभावक भी दवाबमुक्त हुए। वैसे ही अभिभावकों में मेरा नाम भी लिया जा सकता है , जिसे बच्चों की परीक्षाओं के कारण ही एक महीनें ब्लाॅगिंग की दुनिया से जुदाई झेलनी पड़ी। कल 31 मार्च को ही मेरे बेटे का अंतिम पेपर हुआ और यह महज संयोग है कि मै अप्रैल माह की पहली तारीख को ही ब्लागिंग की दुनिया में वापस लौट रही हूॅ और कल 2 अप्रैल को लग्न.राशिफल-अप्रैल 2008 नियत समय पर पोस्ट किया जा सकेगा। हालांकि इस एक महीनें में मैने बहुत कुछ खोया। इतने सारे ब्लाॅगर भाई-बहनों द्वारा प्रकाशित किए जानेवाले मनोरंजक , ज्ञानवर्द्धक पोस्टों , ब्लाॅगिंग जगत की नयी-नयी खबरों , उनके लिए की जानेवाली मजेदार टिप्पणियों–को न पड़ पाने से काफी खालीपन का अहसास होता रहा। साथ ही मेरी अनुपस्थिति में ही मेरा ब्लाॅग-स्टेट्स 10,000 और 11,000 को भी छूते हुए निकल गया। इसकी खुशी भी मै वक्त पर महसूस न कर सकी। किन्तु इस खालीपन को भरने के लिए एक सुखद अहसास काफी था , वह था , मेरे बच्चों की परीक्षाएं , जो काफी संतोषजनक हुईं और इंतजार है , परीक्षा-परिणामों का , जिसे शायद मई के अंतिम सप्ताह में आना है। अभी मेरा छोटा पुत्र विभास 10वी की परीक्षा खत्म हो जाने की खुशी में शहर से बाहर अपने चाचाजी के पास मजे कर रहा है और बड़ा विपुल 12वीं की परीक्षा के बाद भी क्रमशः 13 अप्रैल और 27 अप्रैल को होनेवाली आई आई टी और ए आई ई की प्रवेश परीक्षा की तैयारी में व्यस्त है , वहीं मै अपने अन्य नियमित कार्यों के साथ नए उमंग और उत्साह से पुनः ब्लाॅगिंग की दुनिया में वापस आ गयी हू ।
पिछले महीने 2 और 3 मार्च के पोस्ट के बाद मै एक भी पोस्ट नहीं कर पायी। इसके बावजूद मेरे पाठकों की संख्या में कोई कमी नहीं आयी , सितम्बर 2007 से जबसे मैनें ब्लाॅग लिखना आरंभ किया है , तब से मासिक आधार पर देखा जाए तो मेरे पाठकों की संख्या निरंतर बढ़ती ही जा रही है। आज के वैज्ञानिक युग में जहां कम्प्यूटर का प्रयोग करनेवाले उच्च या उच्च मध्यमवर्गीय वर्ग ही हैं ,मेरे चिट्ठे की विषयवस्तु ज्योतिष है ,को पढ़ने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं , यह हमारे लिए ताज्जुब की ही नहीं , काफी खुशी की बात हैं , लेकिन फिर भी मैं खुश नहीं हो पा रही हूं , क्योंकि ज्योतिष जैसे विवादास्पद विषय पर अपनी लेखनी उठाने में मेरा सबसे बड़ा उद्देश्य था , समाज से धार्मिक , पारंपरिक और अन्य प्रचलित भ्रांतियों को दूर कर पाना , जिसमें मुझे सफलता मिलती नहीं दिखाइ पड़ रही है। मेरे द्वारा लिखे गए 11 हजार से अधिक पृष्ठ अभी तक पलटे जा चुके हैं , परंतु मुझे नहीं लगता कि 11 लोगों को भी इस बात का पता चल सका है कि गत्यात्मक ज्योतिष परंपरागत ज्योतिष से काफी अर्थों में भिन्न है , वैज्ञानिक है , तथ्यपरक है। जबतक पाठकों को ये बात समझ में नहीं आ जाती , आनेवाले युग में एक वैज्ञानिक दृष्टिकोणयुक्त समाज की कल्पना , जो मेरा लक्ष्य है , मैं नहीं कर सकती।




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जबाब-.अविनाशजी , मैनें इन लिंक्सों को क्लिक किया , पर करना क्या है , समझ नहीं पायी।