प्रश्न – धनबाद से श्री राजेश कुमार पूछते हैं कि सौरमंडल में सूर्य स्थिर है तथा अन्य ग्रह इसकी परिक्रमा करते हैं, किन्तु ज्योतिष.शास्त्र यह मानता है कि पृथ्वी स्थिर है और अन्य ग्रह इसकी परिक्रमा करते हैं। जब यह परिकल्पना ही गलत है तो उसपर आधारित भविष्यवाणी कैसे सही हो सकती है ?
उत्तर — ज्योतिष.शास्त्र की जानकारी में यह बात है कि सौरमंडल में सूर्य स्थिर है और अन्य ग्रह इसकी परिक्रमा करते हैं। तभी तो इसमें गणना के इतने मानक सूत्र मौजूद हैं। परंपरागत ज्योतिष के साथ ही साथ गत्यात्मक ज्योतिष भी यह मानता है कि जिस पृथ्वी पर हम रहते हैं , वह चलायमान होते हुए भी हमारे लिए स्थिर है और हम अंतरिक्ष की हर वस्तु को चलायमान पाते हैं , ठीक उसी प्रकार , जिस प्रकार हम किसी गाड़ी में चल रहे होते हैं , हम ट्रेन के बाहर हर चीज को चलायमान पाते हैं , क्योंकि ट्रेन हमारे लिए स्थिर होती है और किसी स्टेशन पर पहुंचते ही हम स्वाभाविक तौर पर कहते हैं , ‘अमुक शहर आ गया’ , जबकि वह शहर वहां नहीं पहुंचता , हम वहां पहुंचते हैं। जिस पृथ्वी में हम रहतें हैं , उसमें हम स्थिर सूर्य के ही उदय और अस्त का प्रभाव देखते आ रहे हैं। इसी प्रकार अन्य आकाशीय पिंडों का भी प्रभाव हमपर पड़ता है , पृथ्वी से किसी खास-खास कोण में स्थित आकाशीय पिंडों से ही हम अच्छे या बुरे रुप में प्रभावित होते हैं , इसलिए हमारे लिए पृथ्वी को स्थिर मानकर ही अन्य ग्रहों की स्थिति का अवलोकण करना आवश्यक है। पृथ्वी से कोई कृत्रिम उपग्रह को किसी दूसरे ग्रह पर भेजना होता है तो पृथ्वी को स्थिर मानकर ही उसके सापेक्ष अन्य ग्रहों की दूरी निकालनी पड़ती है। जब यह सब गलत नहीं होता तो ज्योतिष में पृथ्वी को स्थिर मानते हुए उसके सापेक्ष अन्य ग्रहों की गति पर आधारित फल कैसे गलत हो सकता है ?
(जब से मैनें ब्लाग लिखना आरंभ किया है , तब से पाठकों के बहुत प्रकार के प्रश्न मिल रहे हैं। सभी प्रकार के प्रश्नों के उत्तर देने के क्रम में इस प्रकार के पोस्ट लिखे जा रहे हैं। यदि आपके समक्ष भी ज्योतिष से संबंधित कोई महत्वपूर्ण प्रश्न हो , तो अवश्य भेजें। आपके प्रश्न का भी उत्तर दिया जाएगा।)




पहली तो बात यह कि सूर्य के स्थिर होने की मान्यता ज्योतिष की नहीं पश्चिम के धर्मशास्त्रों की है. दूसरी बात यह कि विज्ञान की यह मान्यता भी मुझे सही नहीं लगता. ऊर्जा का स्वभाव है गति और उसका एक निश्चित स्रोत है ऊष्मा. सूर्य ऊर्जा का महापिंड है, इसमें कोई विवाद नहीं है. फ़िर ऐसा हो कैसे सकता है कि वह स्थिर हो? शायद हमारा विज्ञान अभी सूर्य के सम्बन्ध में सही निर्णय तक पहुंचा नहीं है. वैसे वैज्ञानिक ऐसा कोई दावा भी नहीं करते. ऐसे दावे सिर्फ़ वे तर्कशास्त्री करते हैं, जिन्हें सिर्फ़ अपनी बात ऊपर रखने का कोई उपाय चाहिए. विज्ञान तो हर सन्दर्भ में सतत खोज में लगा होता है और वह इस सन्दर्भ में लगा ही होगा.
जबाब.- सांकृत्यायनजी ,मैने सौरमंडल में सूर्य के स्थिर होने की बात की , अनंत ब्रह्मांड में सूर्य के स्थिर होने की नहीं।