40 वर्ष से अधिक उम्रवालों के लिए तोहफा
April 12, 2008 by संगीता पुरी
यूं तो ग्रहों का अच्छा या बुरा प्रभाव बच्चों से लेकर बूढ़े ,बुजुर्ग सबों पर पडता है ,पर इनकी तीव्रता में कुछ अंतर तो हो ही जाया करता है। बचपन में ग्रहों के प्रभाव से मनोवैज्ञानिक विकास में कुछ बाधा भले ही हो जाए , पर वास्तविक जीवन में उनका कोई खास महत्व नहीं होता। सभी बच्चे अपने.अपने वातावरण में ही जीना सीख लेते हैं। यदि हम मानव.जीवन के बालपन पर धयान दें तो पाएंगे कि हर स्तर के बच्चों के पास पालन.पोषण या मनोरंजन के साधन भी अलग.अलग प्रकार के होते हैं और जिनको जो मिलता है , उसी से वे संतुष्ट होते हैं। इससे आगे बढ़कर विद्यार्थी.जीवन की ओर बढ़े , तो यहां भी हम पाएंगे कि सभी किशोर अपने.अपने स्तर पर ज्ञानार्जन करने में व्यस्त हैं। अपने.अपने बुद्धि , माहौल और स्तर के अनुसार कोई पढ़ाई में आगे है , तो कोई पीछे , कोई परंपरागत व्यवसाय सीखने में तल्लीन है , तो कोई लापरवाह , कोई मजदूरी करते हुए कुछ सीखने में व्यस्त है , तो कुछ गुंडागर्दी के ही गुर सीखने में व्यस्त। लेकिन फिर भी अपनी स्थिति से लगभग संतुष्ट। इससे भी आगे बढ़े , तो युवा वर्ग का चेहरा सामने आता है। कैरियर के चुनाव का समय उपस्थित हो जाता है। अपने अपने स्तर के अनुरूप या कभी घटा.बढ़ाकर सबों को किसी न किसी कार्य की जवाबदेही संभालने को बाध्य होना पड़ता है। ऐसा नहीं कि इन तीनों दौर में ग्रहो का प्रभाव नहीं होता, पर लोगों को महसूस नहीं होता कि सारे वातावरण , परिस्थितियों या मानव के व्यवहार पर ग्रहों का प्रभाव है। वे परिस्थितियों के लिए खुद को भी जिम्मेदार समझते है। और ज्योंहि उन्हे इस बात का अहसास होता है , वे जी.जान से मेहनत कर अपनी परिस्थितियों को सुधारने की कोशिश में लग जाते हैं। मेहनत के अनुरूप परिस्थितियों में सुधार हो या न हो , वे इतने व्यस्त हो जाते हैं कि भाग्य , धर्म के चिंतन के लिए उन्हें समय ही नहीं होता।
इस तरह 40 या अधिकतम 45 वर्ष की उम्र तक लोगों को अपने स्तर में जी पाने में कोई विशेष कठिनाई नहीं होती , चाहे वे अपने जीवन में काफी सफल हों या न हों। लेकिन उसके बाद की परिस्थितियों पर उनका अपना वश नहीं होता , क्योकि अपना एक स्तर बन चुका होता है , उसके अनुरूप ही सारे कार्यों को अंजाम देना आवश्यक होता है। शरीर कमजोर होने लगता है ,संतान या परिवार की सफलता का अधिक महत्व दिखाई पड़ता है , सफलता या असफलता अपने हाथ में न होकर संतान के हाथ में चली जाती है , यह समय अच्छा हो, तो कहना ही क्या, पर यदि बुरा हो, तो हिम्मत ही तोड़नेवाला होता है। सही समय पर अपना कोई आवश्यक काम न हो पाने से या संतान पक्ष का काम न हो पाने से जीवन में कोई रस नहीं बच जाता है। ऐसे लोगों को निराशाजनक परिस्थितियों से बाहर लाने के लिए ज्योतिषीय परामर्श को आवश्यक समझते हुए उनके लिए इस मंच पर निःशुल्क व्यवस्था की गयी है। इसके लिए 40 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग टिप्पणी के लिए छोड़ी गयी जगह पर अपने प्रश्न अपनी जन्मतिथि, जन्मसमय और जन्मस्थान के साथ भेज सकते हैं। जब से मैनें ब्लाग लिखना आरंभ किया है ,चर्चा करने के लिए बहुत से पाठकों ने अपनी जन्मकुंडली मुझे भेजी है , खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि समयाभाव के कारण उनका जवाब नहीं दे पायी। 40 वर्ष से अधिक उम्र के किसी पाठक ने यदि पहले अपनी जङमकुंडली भेजी हो और जवाब न मिला हो , तो पुनः एक बार भेज दें, जवाब दिया जाएगा।




namaskar..
40 ke baad ka tohpha….. ?
aap ke hisab se 40ki umar ke baad manushiya bekar ho jata hai…..sab kuchh bachho pe kendrit ho jata hai
aap ka hi ek lekhh padha hu jisme aap ne likha ki gandhiji
vachpeyi ji.manmohanji.umar ke 70saal ke baad hi uchhpad per pahuche hai………phir ye kia ?
ye bhi jivan me saphalta ki paari hai.jo ub tak ghar pariwar ke karan piche chut gaye purii hogi
kiu ki jivan ki kundali me 60saal tak shani 2 chakra guroo 5 chakra rahu-ketu lagbhag 4 chakra pure kar chuke hoge.
aap apne aaspaas dekhiye 40-45 baad hi lagbhag aadmi makan banata hai .viyapar me saphal hota hai. job me tarraki pata hai chaye uske bachhe kuchh bhi bane kai loogo ne 50-60 ke baad hi achhi pustake likhi hai kiu ki shani +goru kia kia karate hai aap jaise mahan jotishi ko pata hi hai .
sorry ke saath.
dhaniyawad
srigovind
hyderabad
ans– 40 varsh ke bad grahon ke sath na dene se aisa hota hai .achhe grah hon to pure jivan safalta milti hi rahti hai.
नमस्कार ,
आपका आलेख पढा । लेकिन मैं आपकी इस बात से सहमत नहीं हूं कि ४० के बाद व्यक्ति बेकार -लाचार और निरुद्देश्य हो जाता है । जीवन का हर दिन एक नया सबक है । कामयाबी और उद्देश्य को हासिल करने की ना तो कोई सीमा होती है और ना ही कोई उम्र । फ़िर सभी के जीवन के टारगेट अलग _अलग होते हैं । कया आप मेरी कुंड्ली की विवेच्ना कर सकेंगी ?
जन्म लग्न मकर शनि और केतु
द्वितिय स्थान कुंभ चन्द्र
तीसरा मीन गुरु
चतुर्थ मेष शुक्र
पंचम व्रष सूर्य और बुध
छ्ठा -
सातवां कर्क मंगल और राहु