राहू-केतु मात्र विन्दु हैं न कि ग्रह?
April 28, 2008 by संगीता पुरी
प्रश्न — नई दिल्ली से प्रमोद कुमार पूछते हैं कि ज्योतिष में राहू और केतु को भी ग्रह माना गया है , जबकि ये ग्रह नहीं हैं । तो इनके आधार पर भविष्यवाणी कैसे सही हो सकता है ?
उत्तर — यह तर्क बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। सबसे पहले यह जानकारी आवश्यक है कि राहू और केतु हैं क्या ? पृथ्वी को स्थिर मानने से पृथ्वी के चारो ओर सूर्य का एक काल्पनिक परिभ्रमण-पथ बन जाता है। पृथ्वी के चारो ओर चंद्रमा का एक परिभ्रमण पथ है ही। ये दोनो परिभ्रमण-पथ एक दूसरे को दो विन्दुओं पर काटते हैं । अतिप्राचीनकाल में शायद जब ज्योतिषियों को मालूम नहीं रहा हो कि एक पिंड की छाया दूसरे पिंडों पर पड़ने से ही सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण होते हैं और उन्होने सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण होते देखा, तो अपनी उत्सुकता को शांत करने के लिए वे इसके कारण ढूॅढ़ने लगे होंगे। दोनो ही समय इन्होने पाया होगा कि सूर्य, चंद्र, पृथ्वी एवं सूर्य, चंद्र के परिभ्रमण-पथ पर कटनेवाले दोनो विन्दु लम्बवत् हैं। बस उन्होने समझ लिया होगा कि इन्हीं विन्दुओं के एक सीध में होने के फलस्वरुप खास अमावस्या के दिन सूर्य तथा खास पूर्णिमा की रात्रि को चंद्र आकाश से लुप्त हो जाता है। उन्होने इन विन्दुओं को महत्वपूर्ण पाकर इन विन्दुओं का नामकरण ‘राहू’ और ‘केतु’ कर दिया। इस स्थान पर उनसे जो गल्ती हुई , उसका खामियाजा ज्योतिष विज्ञान अभी तक भुगत रहा है ,क्योंकि राहू और केतु कोई आकाशीय पिंड हैं ही नहीं , मात्र विन्दु हैं और हमलोग ग्रहों की जिस उर्जा से भी प्रभावित हो रहे हों— गुरूत्वाकर्षण, गति, किरण या विद्युत चुम्बकीय शक्ति, राहू और केतु इनमें से किसी का भी उत्सर्जन नहीं कर पाते। इसलिए इनसे प्रभावित होने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। यही कारण है कि हमनें भी पाया है कि राहू और केतु पर आधारित भविष्यवाणियां सही नहीं हो पाती।



