मीन राशि में स्थित गोचर के बृहस्‍पति का जनसामान्‍य पर प्रभाव

ज्‍योतिष में रूचि रखने वाले बहुत सारे लोगों को यह मालूम होगा कि सौरमंडल का सबसे विशाल ग्रह गुरू मई के पहले सप्‍ताह से ही मीन राशि में है। यूं तो इस राशि में बृहस्‍पति स्‍वक्षेत्रीय है , पर ‘गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’ के हिसाब से इसके बावजूद सबको शुभ फल से संयुक्‍त नहीं कर सकता। दिन ब दिन बृहस्‍पति के स्‍थैतिक शक्ति में हो रही वृद्धि किसी के लिए परेशानी तो किसी के लिए खुशी का कारण बनेगी। खासकर 23 जून 2010 से लेकर जुलाई के अंतिम सप्‍ताह तक यह कुछ लोगों की मन:स्थिति को सुखद बनाएगी , तो कुछ तनाव झेलने को भी विवश होंगे। इस तरह इस एक महीनें में लोग बृहस्पति के कारण उत्पन्न होनेवाले कार्य में उलझे रहेंगे। चूंकि बहस्पति धनु और मीन राशि का स्वामी है इसलिए धनु और मीन राशि से संबंधित कार्यों में ही सुख या दुख की अधिक संभावना रहेगी।

क्‍या आप के परिवार में किसी का जन्‍म निम्‍न समयांतराल में हुआ है ….

1934 , 1946 , 1958 , 1970 , 1982 ,1993 और 2005 में जन्‍म लेनेवाले उत्साहित होकर कार्य में जुटे रहेंगे। एक महीनें तक कार्य अच्छी तरह होने के पश्चात जुलाई के मध्‍य में किसी न किसी प्रकार के व्यवधान के उपस्थित होने से कार्य की गति कुछ धीमी पड़ जाएगी। मध्‍य सितंबर तक 2009 तक काम लगभग रुका हुआ सा महसूस होगा। उसके बाद ही काम के शुरू किए जाने के लिए आशा की कोई किरण दिखाई दे सकती है। मध्‍य नवंबर के बाद ही स्थगित कार्य पुन: उसी रुप में या बदले हुए रुप में उपस्थित होकर गतिमान होगा और दिसंबर के मध्‍य तक अपने निर्णयात्मक मोड़ पर पहुंच जाएगा। बृहस्पति के कारण होनेवाले इस निर्णय से भी इन लोगों को खुशी होगी। किसी खास संदर्भ में सफलता से इनका उत्‍साह बढा रहेगा।

किन्तु बृहस्पति की इस विशेष स्थिति से कुछ लोगों को कष्‍ट या तकलीफ भी होगी। वे निराशाजनक वातावरण में कार्य करने को बाध्य होंगे। मध्‍य जुलाई के बाद कार्य के असफल होने से उन्हें तनाव का सामना करना पड सकता है। सितंबर के मध्‍य तक उनके समक्ष किकर्तब्‍यविमूढावस्‍था की स्थिति बनी रहेगी। मध्‍य नवंबर के बाद निराशाजनक वातावरण में ही स्थगित कार्य पुन: उसी रुप में या बदले हुए रुप में उपस्थित होकर गतिमान होगा और दिसंबर के मध्‍य तक अपने निर्णयात्मक मोड़ पर पहुंच जाएगा। बृहस्पति के कारण होनेवाले इस निर्णय से भी इन लोगों को कष्‍ट पहुंचेगा। ऐसा 1932 , 1944 , 1956 , 1968 , 1980 ,1992 और 2004 में जन्‍म लेनेवाले में जन्मलेने वाले लोगों के साथ अधिक देखा जा सकता है । किसी खास मुद्दे को लेकर वर्षभर इनकी परेशानी बनी रह सकती है।

इसके अलावे गोचर के इस बृहस्‍पति के कारण तुला राशि वाले शुभ प्रभाव तथा सिंह राशि वाले बुरा प्रभाव महसूस करेंगे। कुछ हद तक अक्‍तूबर माह में जन्‍म लेनेवालों के लिए बृहस्‍पति की यह स्थिति शुभ प्रभाव देने वाली होगी , जबकि अगस्‍त माह में जन्‍म लेनेवाले इसके बुरे प्रभाव से युक्‍त हो सकते हें।

गुरू बृहस्‍पति धर्म और ज्ञान से भी जुडा है , इसलिए धार्मिक क्रियाकलाप भी इस एक महीनों में जमकर होंगे। पर जैसा कि आज के युग में धर्म का रूप भी वीभत्‍स हो गया है , इसलिए युग के अनुरूप ही दो चार वर्षों से बृहस्‍पति चंद्र की इस युति के फलस्‍वरूप यत्र तत्र धार्मिक और सांप्रदायिक माहौल को भडकते हुए भी पाया गया है । आइए ,’गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष’के साथ गुरू बृहस्‍पति से प्रार्थना करें कि वे अपने शुभत्‍व को ही बनाए रखें और लोगों के समक्ष कल्‍याणकारी वातावरण ही बनाए रखें।

कम से कम मेरे सवालों का जबाब तो दे दें .. वैसे मैं हठी तो हूं ही

आज रविवार था , छुट्टियों के दिन में कोई काम न काज , सुबह उठकर 7 बजे ही कंप्‍यूटर पर ब्‍लॉगवाणी खोलकर बैठ गयी। एकदम ऊपर नया जमाना नाम के ब्‍लॉग में एक लेख दिखाई पडा ..  विज्ञान से भागते ज्‍योतिषी। शीर्षक तो मेरे लिए आकर्षित करने वाला था ही , आलेख का जो भाग पढ सकी , उससे मालूम हुआ कि उन्‍होने इस लेख में अपने ब्लॉग की एक सुंदर विदुषी और हठी यूजर की बात की है, जो ज्योतिषी भी हैं और तरह-तरह से ब्लॉगिंग में ज्योतिष का प्रचार करती रहती हैं। लिंक पर क्लिक न करने का सवाल ही न था , पढने पर जो बात समझ में आयी वह कि इनके ब्‍लॉग पर मेन्‍े गलत टिप्‍पणी की है। दरअसल एक दिन पहले जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जी का एक आलेख पढने को मिला , जिसमें उन्‍होने लिखा था कि ….
मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि सैंकड़ों सालों से ग्रहों के बारे में ज्योतिष में कोई नयी रिसर्च नहीं हुई है।

इसका जबाब देते हुए मैने लिखा था …

आपने पूछा है कि हाल फिलहाल में ज्‍योतिष पर कोई रिसर्च किया गया है .. आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि ज्‍योतिष के क्षेत्र में 25 वर्ष पूर्व हमरे केन्‍द्र द्वारा किए गए रिसर्च में कुछ महत्‍वपूर्ण तथ्‍य सामने आए हैं .. ग्रहों की गत्‍यात्‍मक और स्‍थैतिक उर्जा की खोज ने ज्‍योतिष को बहुत सटीक बना दिया है .. इसके बारे में जानकारी आपको इस लिंक पर मिल सकेगी।

थोडी ही देर में टिप्‍पणी के रूप में जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जी का जबाब हाजिर था ..
.
संगीता जी ,आपने जो सामग्री लिंक में दी है वह प्राचीन फलित ज्योतिष की किताबों में उपलब्ध है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भारत के किसी भी संस्कृत विश्वविद्यालय में आधुनिक वेधशाला नहीं है और नहीं आधुनिक अनुसंधान की किसी भी तरह की व्यवस्था है। आप ज्योतिषी हैं यह अच्छी बात है लेकिन किसी भी ज्योतिषी ने अभी तक कोई आधिकारिक रिसर्च ग्रहों पर नहीं की है। पुराने ज्योतिषी ग्रहों के बारे में अनुमान से जानते थे उनके सारे अनुमान गलत साबित हुए हैं। सिर्फ पृथ्वी से विभिन्न ग्रहों की दूरी को ही लें तो पता चल जाएगा कि पुराने ज्योतिषी सही हैं या आधुनिक विज्ञान सही है। आशा है इंटरनेट पर उपलब्ध ग्रहों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी को कृपया पढ़ने की कृपा करेंगी। सिर्फ अंग्रेजी में नाम मात्र लिख दें हजारों पन्नों की जानकारी घर बैठे मुफ्त में मिल जाएगी,आज जितनी जानकारी ग्रहों के बारे में विज्ञान की कृपा सें उपलब्ध है उसकी तुलना में एक प्रतिशत जानकारी भी प्राचीन और आधुनिक ज्योतिषी उपलब्ध नहीं करा पाए हैं।

मैने इस टिप्‍पणी के जबाब में यह लिखा …..

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जी .. मैने जो सामग्री आपको दी .. उसे पढे बिना ही आपने कह दिया कि यह प्राचीन ज्‍योतिष की पुस्‍तकों में है .. प्राचीन ज्‍योतिष की किस पुस्‍तक में इस प्रकार की दशा पद्धति का विवरण है .. सबके जीवन पर क्रमवार सातों ग्रहों का प्रभाव पडता है .. इसे हमलोगों ने ढूंढा है .. हमलोग अपने इस रिसर्च का दावा कहां पेश करें .. आप ही बताएं .. मैं प्रमाणित करके दिखा सकती हूं .. पुराने ज्‍योतिष के पास ग्रहों की जितनी जानकारी थी .. उतना ही किसी व्‍यक्ति के बारे में जानकारी देने में पर्याप्‍त है .. और आज किसी भी संस्कृत विश्वविद्यालय में आधुनिक वेधशाला नहीं है और न हीं आधुनिक अनुसंधान की किसी भी तरह की व्यवस्था है .. इसमें सरकार की गल्‍ती है .. भला किसी विषय का क्‍या दोष ??

आप उस लिंक में भी जाकर देख सकते हैं ,मैने कौन सी आपत्तिजनक बाते कहीं कि उन्‍हे आज अपने नए लेख विज्ञान से भागे हुए ज्‍योतिषी में लिखना पडा …

हमारे ब्लॉग की एक सुंदर विदुषी और हठी यूजर हैं,वे ज्योतिषी भी हैं और तरह-तरह से ब्लॉगिंग में ज्योतिष का प्रचार करती रहती हैं उनका नाम है संगीता पुरी।

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जी ने न तो मेरी बातों पर गौर किया , न मेरे प्रश्‍नों का जबाब ही दिया , ना मुझे कोई पता बताया , जहां अपने रिसर्च का दावा पेश कर सकूं , वरन् उन्‍होने मुझे हठी कहा .. वैसे मैं तो हठी हूं ही , खासकर समाज से ज्‍योतिषीय भ्रांतियों को दूर करने के मामलों में , क्‍यूंकि मुझे मालूम है कि ज्‍योतिष वह भी नहीं , जो एक वैज्ञानिक कहते हैं और न ही वह है जो एक अंधविश्‍वासी कहते हैं। इन दोनो के मध्‍य से निकलकर एक रास्‍ता ज्‍योतिष की ओर जाता है , इसलिए मैं ज्‍योतिष के सटीक तथ्‍यों का प्रचार करने में पीछे तो नहीं रह सकती,इसे मेरी मजबूरी ही समझा जा सकता है। मैं ब्‍लॉगस्‍पाट वाले अपने ब्‍लॉग पर महत्‍वपूर्ण लेख लिख रही हूं , इसलिए इस पोस्‍ट को दूसरे ब्‍लॉग में डाल दिया है ।

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