आज रविवार था , छुट्टियों के दिन में कोई काम न काज , सुबह उठकर 7 बजे ही कंप्यूटर पर ब्लॉगवाणी खोलकर बैठ गयी। एकदम ऊपर नया जमाना नाम के ब्लॉग में एक लेख दिखाई पडा .. विज्ञान से भागते ज्योतिषी। शीर्षक तो मेरे लिए आकर्षित करने वाला था ही , आलेख का जो भाग पढ सकी , उससे मालूम हुआ कि उन्होने इस लेख में अपने ब्लॉग की एक सुंदर विदुषी और हठी यूजर की बात की है, जो ज्योतिषी भी हैं और तरह-तरह से ब्लॉगिंग में ज्योतिष का प्रचार करती रहती हैं। लिंक पर क्लिक न करने का सवाल ही न था , पढने पर जो बात समझ में आयी वह कि इनके ब्लॉग पर मेन्े गलत टिप्पणी की है। दरअसल एक दिन पहले जगदीश्वर चतुर्वेदी जी का एक आलेख पढने को मिला , जिसमें उन्होने लिखा था कि ….
मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि सैंकड़ों सालों से ग्रहों के बारे में ज्योतिष में कोई नयी रिसर्च नहीं हुई है।
इसका जबाब देते हुए मैने लिखा था …
आपने पूछा है कि हाल फिलहाल में ज्योतिष पर कोई रिसर्च किया गया है .. आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि ज्योतिष के क्षेत्र में 25 वर्ष पूर्व हमरे केन्द्र द्वारा किए गए रिसर्च में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं .. ग्रहों की गत्यात्मक और स्थैतिक उर्जा की खोज ने ज्योतिष को बहुत सटीक बना दिया है .. इसके बारे में जानकारी आपको इस लिंक पर मिल सकेगी।
थोडी ही देर में टिप्पणी के रूप में जगदीश्वर चतुर्वेदी जी का जबाब हाजिर था ..
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संगीता जी ,आपने जो सामग्री लिंक में दी है वह प्राचीन फलित ज्योतिष की किताबों में उपलब्ध है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भारत के किसी भी संस्कृत विश्वविद्यालय में आधुनिक वेधशाला नहीं है और नहीं आधुनिक अनुसंधान की किसी भी तरह की व्यवस्था है। आप ज्योतिषी हैं यह अच्छी बात है लेकिन किसी भी ज्योतिषी ने अभी तक कोई आधिकारिक रिसर्च ग्रहों पर नहीं की है। पुराने ज्योतिषी ग्रहों के बारे में अनुमान से जानते थे उनके सारे अनुमान गलत साबित हुए हैं। सिर्फ पृथ्वी से विभिन्न ग्रहों की दूरी को ही लें तो पता चल जाएगा कि पुराने ज्योतिषी सही हैं या आधुनिक विज्ञान सही है। आशा है इंटरनेट पर उपलब्ध ग्रहों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी को कृपया पढ़ने की कृपा करेंगी। सिर्फ अंग्रेजी में नाम मात्र लिख दें हजारों पन्नों की जानकारी घर बैठे मुफ्त में मिल जाएगी,आज जितनी जानकारी ग्रहों के बारे में विज्ञान की कृपा सें उपलब्ध है उसकी तुलना में एक प्रतिशत जानकारी भी प्राचीन और आधुनिक ज्योतिषी उपलब्ध नहीं करा पाए हैं।
मैने इस टिप्पणी के जबाब में यह लिखा …..
जगदीश्वर चतुर्वेदी जी .. मैने जो सामग्री आपको दी .. उसे पढे बिना ही आपने कह दिया कि यह प्राचीन ज्योतिष की पुस्तकों में है .. प्राचीन ज्योतिष की किस पुस्तक में इस प्रकार की दशा पद्धति का विवरण है .. सबके जीवन पर क्रमवार सातों ग्रहों का प्रभाव पडता है .. इसे हमलोगों ने ढूंढा है .. हमलोग अपने इस रिसर्च का दावा कहां पेश करें .. आप ही बताएं .. मैं प्रमाणित करके दिखा सकती हूं .. पुराने ज्योतिष के पास ग्रहों की जितनी जानकारी थी .. उतना ही किसी व्यक्ति के बारे में जानकारी देने में पर्याप्त है .. और आज किसी भी संस्कृत विश्वविद्यालय में आधुनिक वेधशाला नहीं है और न हीं आधुनिक अनुसंधान की किसी भी तरह की व्यवस्था है .. इसमें सरकार की गल्ती है .. भला किसी विषय का क्या दोष ??
आप उस लिंक में भी जाकर देख सकते हैं ,मैने कौन सी आपत्तिजनक बाते कहीं कि उन्हे आज अपने नए लेख विज्ञान से भागे हुए ज्योतिषी में लिखना पडा …
हमारे ब्लॉग की एक सुंदर विदुषी और हठी यूजर हैं,वे ज्योतिषी भी हैं और तरह-तरह से ब्लॉगिंग में ज्योतिष का प्रचार करती रहती हैं उनका नाम है संगीता पुरी।
जगदीश्वर चतुर्वेदी जी ने न तो मेरी बातों पर गौर किया , न मेरे प्रश्नों का जबाब ही दिया , ना मुझे कोई पता बताया , जहां अपने रिसर्च का दावा पेश कर सकूं , वरन् उन्होने मुझे हठी कहा .. वैसे मैं तो हठी हूं ही , खासकर समाज से ज्योतिषीय भ्रांतियों को दूर करने के मामलों में , क्यूंकि मुझे मालूम है कि ज्योतिष वह भी नहीं , जो एक वैज्ञानिक कहते हैं और न ही वह है जो एक अंधविश्वासी कहते हैं। इन दोनो के मध्य से निकलकर एक रास्ता ज्योतिष की ओर जाता है , इसलिए मैं ज्योतिष के सटीक तथ्यों का प्रचार करने में पीछे तो नहीं रह सकती,इसे मेरी मजबूरी ही समझा जा सकता है। मैं ब्लॉगस्पाट वाले अपने ब्लॉग पर महत्वपूर्ण लेख लिख रही हूं , इसलिए इस पोस्ट को दूसरे ब्लॉग में डाल दिया है ।
जून 13, 2010 को 3:58 अपराह्न पर
maine aaj tak koi khaas jyotish sambandhi paramarsh nahi liya…par ,mujhe isme sachchayi dikhti hai….lekin ye bhi janta hun..adhiktar kehne wale hain karne wale kam hi hai…
जून 13, 2010 को 4:06 अपराह्न पर
संगीता जी,लाजबाब सवालों के जबाब कोई नहीं दे सकता।
जून 13, 2010 को 4:11 अपराह्न पर
हमने भी वहाँ आपकी टिप्पणी पढ़ी थी और ये भी देखा कि उन्होंने आपको कोई जबाब नहीं दिया |
ये बिना तथ्यों के बे सिर पैर की बात करने वाले लोग है इन साहब को हिंदू जैसी सहनशील जाति सबसे बड़ी आतंकवादी लगती है तो ज्योतिष तो इन्हें बुरा लगेगा ही |
आखिर ये महाशय वामपंथी विचार धारा वाले जो ठहरे |
इनका आपकी टिप्पणी पर जबाब न देने पर हम तो यही कहेंगे ” विज्ञानं से ज्योतिषी नहीं ज्योतिष से विज्ञानं वाले भाग रहे है “
जून 13, 2010 को 4:19 अपराह्न पर
विचारणीय पोस्ट…..आभार
जून 13, 2010 को 7:53 अपराह्न पर
संगीता जी, ज्योतिष के प्रति आपका समर्पण प्रशंसनीय है. परन्तु आपके द्वारा जो ग्रहों का क्रमवार प्रभाव वाली बात कही गयी है, यदि आप मानसागरी का अध्ययन करें तो आपको उसमे यह बात मिल जाएगी. मेरे पास आपनी स्वयं की कुंडली है जिसमे ये सभी तालिकाएँ विस्तृत रूप से बनी हुई है. इन्हें मैंने बीना के एक माने हुए ज्योतिषी महोदय से बनवाया था.
मुझे आप अन्यथा न लें, मुझे ज्योतिष में उतनी ही आस्था है जितनी आपको या किसी और को भी होगी. किन्तु मैं प्राचीन भारतीय आचार्यों को सर्वज्ञ मानता हूँ. मैं यह नहीं मान सकता कि उन्होंने कोई भी क्षेत्र अपने प्रभाव से अछूता छोड़ा होगा.
जून 14, 2010 को 3:35 पूर्वाह्न पर
जो लिंक मैने चतुर्वेदी साहब को भेजा है .. वो ‘गत्यात्मक ज्योतिष’ का अपना रिसर्च है .. हमलोगों ने अनेक पत्र पत्रिकाओं में इसकी चर्चा की है .. किसी विद्वान ने अभी तक इन नियमों के किसी भी पुस्तक में होने का दावा नहीं किया .. आज आपलोग पहली बार ऐसा कह रहे हैं .. यदि यह सही है तो हमारा सम्मान ऋषि मुनियों के प्रति और बढ जाएगा .. आप कृपया मानसागरी के उन पृष्ठों का स्कैन भेजे !!
जून 14, 2010 को 6:26 पूर्वाह्न पर
वर्डप्रेस पर यह ब्लॉग आपका बहुत खूबसूरत है….. मैंने तो आज देखा इसे…..
जून 14, 2010 को 7:32 पूर्वाह्न पर
संगीता जी,
यह कार्य तो आपको स्वयं ही करना होगा. कारण यह है कि मैं अभी भारत में नहीं हूँ. मुझे इस बात पर कोई आपत्ति नहीं है कि गत्यात्मक ज्योतिष को आप अपना मौलिक शोध कहें. मेरा बस इतना ही कहना है कि थोडा और शोध करें, मुझे विश्वास है कि हमारे ऋषियों ने जातक पर ग्रहों के क्रमवार प्रभाव को लेकर विस्तृत व्याख्या की है और आप ढूंढेंगी तो आपको और जानकारी मिलेगी. आप तो ज्योतिषी हैं और दशा अन्तर्दशा को समझती ही हैं. यदि आपने इसी दृष्टान्त को आगे बढाया है तो आपको साधुवाद. यदि आपका सिद्धांत इससे अलग है तो निस्संकोच मैं अपनी भूल स्वीकार करूंगा एवं आपके सिद्धांत को समझने का प्रयत्न करूंगा.
चतुर्वेदी जी के पृष्ठ पर मैंने कोई टिप्पणी नहीं की. उनके विचार वामपंथी हैं और वामपंथियो को कुछ कहना भैंस के आगे बीन बजाना है.
भवदीय,
सोमेन्द्र
जून 17, 2010 को 6:05 पूर्वाह्न पर
जहा तक मैंने ज्योतिष को देखा है इसमें केवल सच्चाई है, ४-५ साल पहले मैं डिप्रेसन और भी कई अन्य परेशानी से ग्रस्त था. एक विद्वान ज्योतिष ने मेरी कुंडली के आधार पर कुछ उपाय बताया और मैं पहले से लाख गुनाअच्छा हूँ . एक टिपण्णी यहाँ पर सही लिखी है की विज्ञान ज्योतिष से भाग रहा है.
ज्योतिष उतना ही सच है जितना की मैं और आप.
इसके अलावा मेरे ही काई रिश्ते दारो की कुंडली पूरी की पूरी सच बनी है.