विश्वविद्यालयों में ज्योतिष

आज जब हमारी प्राचीन वैदिक ज्ञानसंपदा सामाजिक , राजनीतिक , आर्थिक , नैतिक , धार्मिक ,वैज्ञानिक , पर्यावरणीय और स्वास्थ्य की दृfष्ट से सहीसाबित हो रही है , तो फिर विश्वविद्यालयों में ज्योतिष की पढ़ाई को लेकरइतना बवाल क्यों मचाया जा रहा है ? वैज्ञानिक संसाधनों के अभाव केबावजूद हमारे ऋषि मुनियों  के द्वारा `गणित ज्योतिष´ का विकास जब इतनासटीक है , तो उन्हीं के द्वारा विकसित `फलित ज्योतिष´ अंधविश्वास कैसे होसकता है ?

 

भले ही सदियों की उपेक्षा के कारण वह अन्य विज्ञानों की तुलनामें कुछ पीछे रह गया हो और इस कारण उसके कुछ सिद्धांत आज कीकसौटी पर खरे न उतरते हों। भले ही व्यक्ति अपनी मेहनत , अपने स्तरऔरअपने कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त करता हो , किन्तु उनकी परिस्थितियोंऔर चारित्रिक विशेषताओं पर ग्रह का ही नियंत्रण होता है और `गत्यात्मकज्योतिष´ द्वारा इसे सिद्ध किया जा सकता है।

 

  

मानव जब जंगल में रहते थे , उस समय भी उनकी जन्मपत्री बनायीजाती , तो वैसी ही बनती , जैसी आज के युग में बनती है। वही बारह खानेंहोते , उन्हीं खानों में सभी ग्रहों की स्थिति होती , विंशोत्तरी के अनुसारदशाकाल का गणित भी वही होता , जैसा अभी होता है। आज भी अमेरिकाजैसे उन्नत देश तथा अफ्रीका जैसे  पिछड़े देश में लोगों की जन्मपत्र एकजैसी बनती है। मानव जाति ने अपने बुfद्ध के प्रयोग से जंगलों की कंदराओंको छोड़कर सभ्य और प्रगतिशील समाज की स्थापना की है , ये सब किसीके भाग्य में लिखे नहीं थे , ये चिंतन , अन्वेषण और प्रयोग के ही परिणामहैं।

 

लेकिन यह तो मानना ही होगां कि इसके लिए प्रकृति  ने अन्य जानवरोंकी तुलना में मानव को अतिरिक्त बुfद्ध से नवाजा। यदि यह नहीं होता , तोमनुष्य आज भी पशुओं की तरह ही होते। बस इसी तरह प्रकृति हमारी मददकरती है।

  

विश्वविद्यालय में ज्योतिष का प्रवेश विवाद का विषय नहीं होना चाहिए , विवाद सिर्फ इसपर हो कि ज्योतिष के विभाग में नियुक्ति किनकी हो और पुस्तकें कैसी रखी जाएं ? यदि इसमें भी राजनीति हुई , तो ज्योतिष जैसा पवित्र विभाग भी मैला हो जाएगा। 

 

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About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
यह प्रविष्टि सामयिक में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

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