क्या भवितव्यता टल सकती है ?

यदि किसी जन्मकुंडली में आनेवाले समय में कुछ बुरा होने का संकेत मिल रहा हो , तो उसके निदान के लिए हम ज्योतिषी उसके लिए कुछ न कुछ उपाय सुझा देते हैं , किन्तु बुरे समय को सुधारने में हमें बड़ी सफलता नहीं मिल पाती है। उस समय हमारी स्थिति कैंसर या एड्स से पीड़ित किसी रोगी का इलाज कर रहे डॉक्टर की तरह होती है , जो बीमारी के लक्षणों और कारणों का पता तो लगा चुका है , परंतु बीमारी को ठीक कर पाने का कोई उपाय न होने से विवश होकर आखिर प्रकृति की इच्छा के आगे नतमस्तक हो जाता है।

     ऐसी ही परिस्थितियों में हम मानने को मजबूर हो जाते हैं कि प्रकृति के नियम ही सर्वोपरि हैं। हमलोग पाषाण-युग , चक्र-युग , लौह-युग , कांस्य-युग से बढ़ते हुए आज आईटी युग में प्रवेश कर चुके हैं , किन्तु आज भी कई दृष्टि से हम लाचार हैं। नई-नई असाध्य बीमारियॉ , जनसंख्या-वृद्धि का संकट , कहीं अतिवृष्टि तो कहीं अनावृष्टि , कहीं बाढ़ तो कहीं सूखा , कहीं भूकम्प तो कहीं ज्वालामुखी-विस्फोट प्रकृति की इन गंभीर चुनौतियों से जूझ पाने में अववल दर्जे के वैज्ञानिक भी असमर्थ हैं।

    वास्तव में ब्रह्मांड के रहस्यों का खुलासा कर हम अपने कार्यक्रमों में इसकी मदद भर ले सकते हैं। पृथ्वी अपनी घूर्णन 24 घंटे में पूरी करती है , चंद्रमा को पृथ्वी की परिक्रमा करने में 28 दिन लगते हैं और 365 दिनों में पृथ्वी अपने परिभ्रमण-पथ पर पूरी घूम जाती है , इन्हीं तथ्यों को देखते हुए 24 घंटे की घड़ी , 28 दिनों का चंद्रमास और 365 दिनों का कैलेण्डर बनाया गया। दिन और रात , अमावस्या और पूर्णिमा , मौसम परिवर्तन सब प्रकृति के अपने नियमों के अनुसार होते हैं , पर इसकी जानकारी से हमें अपना बचाव करने में काफी सुविधा होती है।सिर्फ इस रहस्य का खुलासा कि अमुक तरह की ग्रहस्थिति  में जन्म लेनेवालों की जीवनयात्रा अमुक तरह की होगी , निस्संदेह आज की बहुत ही बड़ी उपलब्धि है। जिन्होनें भी इस धरती पर जन्म लिया है या लेनेवाले हैं , उनकी जीवनयात्रा की चर्चा की जा सकती है। साथ ही भविष्य में उत्पन्न होनेवाले बच्चे के लिए गत्यात्मक ज्योतिष वरदान हो सकता है। एक विशेष मुहूर्त में बच्चे को जन्म देकर उसकी जीवनयात्रा को महत्वपूर्ण तो बनाया ही जा सकता है।

(मेरे द्वारा लिखित `गत्यात्मक झरोखे से ज्योतिष´ की पांडुलिपि से उद्धृत)

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About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
यह प्रविष्टि इलाज़ में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

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