धन-कोष और ज्योतिष

किसी जातक के धन के परिमाणात्मक पहलू को जन्मकुंडली के द्वारा नहीं बतलाया जा सकता। किसी भी कुंडली को देखकर  जातक सहस्रपति है या हजारपति , लखपति है या करोड़पति इस बात का जवाब दे पाना मुश्किल ही नहीं , असंभव ही है। इसका कारण भी वही है , युग , समाज , प्रदेश और देश का प्रभाव। किसी विकसित देश और अविकसित देश में एक ही दिन एक ही लग्न में जन्म लेनेवाले एक जैसे कुंडली प्राप्त करनेवाले बच्चों के आर्थिक स्तर में काफी अंतर देखा जा सकता है। देश की बात छोड़ भी दी जाए , तो एक ही देश में एक समय में किसी मंत्री के पुत्र के जन्म के समय ही एक सामान्य कृषक के पुत्र का भी जन्म हो सकता है , जबकि दोनो के आर्थिक स्तर में काफी फर्क होगा। इसी प्रकार दो युगों में भी आर्थिक स्तर और नीतियो के अंतर को भी नकारा नहीं जा सकता। यहॉ कोई प्रश्न नहीं किया जा सकता , क्योंकि शरीर की तरह ही जातक के आर्थिक स्तर का कोई निश्चित स्वरुप नहीं होगा।

          किन्तु शरीर की तरह ही धन के गुणात्मक पहलू की चर्चा करना काफी आसान है , वास्तव में हर युग और प्रदेश में धन का अर्थ वह साधन है , जिसके द्वारा अपनी सारी आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सके। मनुष्य की आवश्यकताएं समाज , परिवार और अपनी मानसिक बनावट के अनुसार घटती बढ़ती हैं। यदि जन्मकुंडली में धन की स्थिति सुखद हो , तो मंत्री का पुत्र भी अपनी धन की स्थिति से संतुष्ट हो सकता है और सामान्य कृषक का पुत्र भी। किन्तु यदि धन की स्थिति गड़बड़ होगी , तो मंत्री के पुत्र को भी अपने स्तर के अनुरुप निर्वाह करने में धन से असंतुष्टी बनी रहेंगी और ऐसा ही कृषक के पुत्र के साथ भी हो सकता है। धन के मामले में लापरवाही का योग होगा , तो दोनो ही लापरवाह हो सकते हैं। इसी प्रकार धन कमाने में दोनो का ही ध्यानसंकेन्द्रण हो सकता है । इसमें सफलता और असफलता दोनो को ही मिल सकती है , परंतु चूंकि यहॉ शुरुआत में ही स्तर का बड़ा फर्क है , इसलिए अंत में भी स्तर का बना रहना स्वाभाविक है और इस कारण पूरे जीवन धन कमाने की प्रबल इच्छा , कार्यक्षमता और सफलता के बावजूद भी हो सकता है , एक किसान का पुत्र उस स्तर तक नहीं पहुंच पाए , जहॉ से एक मंत्री के पुत्र ने अपनी यात्रा आरंभ की थी , लेकिन इसके बावजूद धन के प्रति दोनों के दृष्टिकोण , कार्यप्रणाली और और सफलता-असफलता के एक जैसे होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता , जिसके कारण अपने-अपने क्षेत्र में दोनों ही महत्वपूर्ण बनें रहेंगे।

          इस तरह जन्मकुंडली देखकर धन के बारे में यह बतलाया जा सकता है कि जातक धन के मामले में भाग्यशाली है या नहीं ? धनविषयक कार्यक्रमों में वह गंभीरता रखता है या निश्चिंती ? यदि निश्चिंती है , तो इसका कोई भयावह परिणाम दिखाई पड़ने की संभावना है या नहीं ? यदि वह गंभीरता रखता है , तो उसका सकारात्मक फल प्राप्त करेगा या नहीं ? यदि धन के मामले में उसकी स्थिति दयनीय है , तो उसमें सुधार आएगा या नहीं ? न सिर्फ इन सब प्रश्नों के उत्तर दे पाना ही संभव है , वरन् यह भी बतलाना संभव है कि ये बातें किस उम्र में अधिक फलदायी बनें रहेंगे।

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About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
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9 Responses to धन-कोष और ज्योतिष

  1. महोदया,
    आपका लेख सराहनीय है,लेकिन मेरी तरफ़ से कुछ सुझाव जरूर आपके प्रति है अगर खराब लगें तो मानसिक रूप से अपने विचारों को नही बदलना.
    आपने लिखा है कि वास्तविक रूप से धन के बारें में कथन करना असम्भव है,और आपने उस जगह पर मंत्री पुत्र और कृषक पुत्र का समायोजन भी किया है,क्या आप इन बातों को झुठला सकते है:-
    १.यह एक स्वाभाविक तथा वास्तविक उपयोगिता का प्रश्न है कि हमको कितना धन प्रति मास मिलेगा,तथा किस ग्रह की दशा और अन्तर्दशा में मिलेगा.
    २.महर्षि पराशर के उपदेशित नियमो के अनुसार वह ग्रह जो केन्द्र तथा त्रिकोण का स्वामी हो,अथवा अन्य शुभ भावों का स्वामी हो तो धन पदवी आदि वांछित पदार्थों की उपलब्धि करवाता है,अत: यह परिणाम सहज ही निकाला जा सकता है,कि पाराशरीय राजयोग कारक तथा अन्य पाराशरीय शुभ ग्रह उन ग्र्हों की अपेक्षा जो ऐसे राजयोग कारक अथवा शुभ नही,अधिक धन देंगे.
    ३.इस सम्बन्ध में आप जानते होंगे कि पाराशरीय पद्धति के अनुसार जो भाव पापी अथवा बुरे ठहरते है,वे अथवा उनके स्वामी यदि केवल पाप प्रभाव में हों,तो भी पापत्व के नाश द्वारा शुभत्व अथवा धन की सृष्टि करते हैं.
    ४.प्रश्न उठता है कि पाराशरीय पद्धति में अच्छे बुरे ग्रहों को हम कोई मूल्य रुपयों में दे सकते हैं,और कह सकते हैं,कि ग्रह की कीमत इतने रुपये में है,ग्रहों का रुपयों में मूल्यांकन करते समय यह बात याद रखनी पडती है,कि एक ही लग्न के योग कारकों का मूल्य भिन्न भिन्न हो सकता है,क्यंकि एक कुन्डली में वह योगकारक साधारण बली है,दूसरे में वह चारों लग्नों में वह योग कारक निकलता है,इसलिये विशेष बली माना जा सकता है.
    ५.किसी भी कुन्डली की दशा में अन्तर्दशा में,फ़ल रुपयों के मूल्य में कहने से पहले यह देख लेना होगा कि कुन्डली साधारण स्तर की है,या ऊंचे स्तर की है.
    ६.किसी भी कुन्डली को ऊंचे स्तर या साधारण स्तर की देखने की पद्धति यह होगी कि हम देखें कि उस कुन्डली में कौन से शुभ धन दायक योग हैं,उन योगों की संख्या जितनी अधिक होगी,वह कुन्डली उतनी ही ऊम्चे स्तर की होगी.
    ७.शुभ धन दायक योग इस प्रकार से हैं:-
    (अ)शुक्र का एक या अधिक लगनो से बारहवेम भाव में विराजमान होना.
    (ब)लग्न दूसरे नवें और ग्यारहवें भाव के बलवान स्वामियों का परस्पर युति अथवा द्रिष्टि द्वारा संबन्ध होना.
    (स)पाराशरीय योगों के बाहुल्य होना,जैसे नवें,दसवें भाव के स्वामियों का सम्बन्ध चौथे पांचवें भावों के स्वामियों का सम्बन्ध,शुभ सप्तमेश और नवमेश का सम्बन्ध,सप्तमेश और पंचमेश का आपसी सम्बन्ध भी ध्यान में रखना पडता है.
    (द)खराब भावों तीसरे,छठे,आठवें,और बारहवें, के स्वामियों का अपनी राशियों से बुरे भावों अथवा दूसरे बुरे भावों में विराजमान होना,और केवल बुरे भावों के बुरे ग्रहों के द्वारा ही देखा जाना,उदाहरण के लिये मेष लग्न हो और बुध आठवें भाव में पडा हो,और शनि के पाप प्रभाव में हो तो बुध बहुत ही कमजोर हो जायेगा,कारण वह एक तो अनिष्टदायक आठवें भाव में है,दूसरे वह शत्रु राशि में है,तीसरे वह शनि द्वारा द्रिष्ट है,चौथे वह छठे स्थान से तीसरा होकर छठे के लिये बुरा है,ऐसी स्थिति में बुध की यह निर्बल स्थिति तीसरे और छठे भावों की अशुभता को खत्म करने के कारण विपरीत राजयोग को पैदा करेगी और धन दायक स्थिति पैदा करेगी.
    (य)लग्न के स्वामी चन्द्र लग्न के स्वामी,सूर्य लग्न के स्वामी,और नवमांश में लग्न,चन्द्र लग्न,और सूर्य लग्न, के स्वामियों का परस्पर सम्बन्ध भी धन के मामले में सूचना देगा.
    (र)शुक्र का गुरु द्वारा बारहवें बैठना.
    (ल)चार अथवा चार से अधिक भावों के स्वामियों द्वारा खुद को देखा जाना.
    (व)अधियोगों की उपस्थिति यानी सूर्य से लग्न से चन्द्र से सातवें और आठवें शुभ ग्रहों की स्थिति का होना.
    (व)सुदर्शन पद्धति से तीनो ही लग्नों से किसी ग्रह का शुभ बन जाना.
    (ह)किसी भी शुभ ग्रह द्वारा मूल्य का प्राप्त कर लेना,अर्थात दूसरे और ग्यारहवें स्थान के अधिपति गुरु द्वारा युक्त होना या देखा जाना,अथवा बुध द्वारा युक्त होना या देखा जाना,अथवा सूर्य,चन्द्र या नवांश के राशि स्वामी का गुरु के द्वारा अधिष्ठित होना.
    (त)सूर्य अथवा चन्द्र का नीच भंग होना.
    (थ)किसी उच्च ग्रह का शुभ स्थान में होना तथा उस स्थान के स्वामी का पुन: उच्च में जाना,आदि कारणो के बाद भी कितने ही कारण है,जो वास्तव में धन का प्रभाव बताते है,इसलिये सर्वप्रथम धारणा देने से पहले योग धारणा की प्राप्ति कर लेना और एक एक कारण का निराकरण करने के बाद ही ज्योतिष का उच ज्ञान कहा जा सकता है,किसी भी त्रुटि के लिये क्षमा करें.

  2. DHARAMVIR DHIMAN कहते हैं:

    my date of birth is 24 / 12 / 1976
    tell me more

  3. GOVIND SAXENA कहते हैं:

    D.O.B.07\10\1987 GOVIND SAXENA MERE PASS PAISA KAB AYEGA EMAIL ID (GOVINDSAXENA45@GMAIL.COM

  4. anshu kumar कहते हैं:

    dear sir,

    i am many problem face in 2009 ( money related, carrier)

    mera 2010 kaiysa jayega ,
    my DOB : 12/07/1978
    time: 10:30am
    birth place : raipur (Chhattisgarh)

  5. anshu kumar कहते हैं:

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  6. Nalinikant Ojha कहते हैं:

    Sangita ji aur Bhadauriya sahab ko namaskar!

    Sangita ji aapne dhan ki uplabdhta ke bare me bhawisya kathan kahne ko bataya hai – magar kaise – kis bhav se – kis grah se – nahi bataya

    Aur Bhadauriya – Bhawo se dhan sambandhi jankari ikcha ki purti karne ka jatil paramarsh diya hai –

    – Jyotish wigyan ke prati jitni Shradha / wiswas / awiswas janmanas me hai utna kisi me nahi – karan kuch mamlo me satik bhawisyawani logo ko achambhit karti hai – sutra samanya astar ke jyotish ko bhi mil gaye hai-

    – sangita ji aapse and bhadauriya ji se anurodh hai – kripya is mamle aap apne anubhav / shodh ko pramanik swaroop me prastut kare (udahran ke saath) ya kam jagah ho to kuch aise ki hamara gyan wardhan ho

  7. gautam कहते हैं:

    prya lekhak aap aaisa kaise bol sakte ho lagta hai aap ko jotishi ka bilkul bhi ghyan nahi hai .jane do aap sirf mere ek prashna ka uthar do ,kya kabhi koi chaprashi mukhya mantri nahi bana sushil kumar shende jo ek chaprashi the vo cm bane mayawati na jane kitne udharan hai mai dete dete aur tum padhte padhte thak jaonge ,aur kitne hi uche log jo jamin par aagai kuch bhi likhne se pahle jara us me malumat kr lena chaiye

  8. RAJKUMAR कहते हैं:

    Mera naam rajkumar hai mera date of barth 25/10/1994 hai janm samay 5:25pm kripya mera rasi aur bhavishyafal bataye

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