फलित ज्योतिष और आध्यात्म

फलित ज्योतिष की सही जानकारी रखनेवाला कोई भी ज्योतिषी दूसरे व्यक्ति के संबंध में उसकी समस्त चारित्रिकविशेषताओं के साथ ही साथ उसके ग्रहों के प्रतिफलन-काल की सम्यक् जानकारी प्रदान कर सकता है। अत: फलित ज्योतिष आत्मज्ञानप्राप्ति का बहुत बड़ा साधन है और इसकी जानकारी के बाद उस व्यक्ति को किस तल पर रहना चाहिए , इसका उसे सही बोध हो जाता है। जीवन के किस भाग में किस प्रकार के कार्यक्रम को किस तरह निर्धारित किया जाना चाहिए , इसका सही-सही बोध भी हो जाता है। फलित ज्योतिष के रहस्य को जिसने समझ लिया , उसे भगवान के सही स्वरुप को समझ पाने में कोई कठिनाई नहीं होती। सबसे बड़ी शक्ति , उसके यांत्रिकी या प्राकृतिक नियमों पर उसे अटूट विश्वास हो जाता है। यह बात अनायास ही समझ में आ जाती है कि मनुष्य इस बड़ी शक्ति के लिए खिलौना मात्र है और उसी शक्ति से प्रेरित उसके सोंच-विचार और समस्त कार्यक्रम हैं। हर हालत में विराट शक्ति के सापेक्ष हर व्यक्ति की सफलता और असफलता है , जो नगण्य है। इस विराट शक्ति या बडे़ शक्ति को अनंतशक्तिस्वरुपा समझा जाए तो इसकी तुलना में पृथ्वी का अस्तित्व भी शून्य के बराबर है। अत: पृथ्वी पर उत्पन्न जड़-चेतन एवं चौरासी लाख योनि में उत्पन्न जीव-जंतु , मनुष्य , राक्षस और देवतासभी अस्तित्वविहीन माने जाएंगे। ये सभी अनंत शक्ति के प्रभाव से पृथ्वी की सामयिक उपज है।

                  निर्गुण , निर्विकार , इच्छारहित अनंतशक्तिस्वरुप ब्रह्म को कल्पतरु के रुप में वर्णित किया गया है। यह पारदर्शी आइने की तरह है , जहॉ अपने दृष्टिकोण के अनुरुप सर्वशक्तिमान दिखाई पड़ता है। जब कोई व्यक्ति समर्पित भावना के साथ उसे साक्षी रखकर दूसरे के हित के लिए प्रार्थना करता है , तो उसके भावनात्मक संकल्प तरंग सामनेवाले को ठीक कर देते हैं और ठीक होनेवाले के ऋणात्मक तरंग को वह स्वयं  ग्रहण कर लेता है। सच्चे मन से की गयी प्रार्थना दूसरे का कल्याण करती है , किसी भी व्यक्ति के अंत:करण को निर्मल और स्वच्छ बना सकती है , किन्तु आध्यात्मिक जगत के इस गंभीर मंद-मंद क्रिया और भावनात्मक तरंगों का विपर्यय का उपयोग व्यावहारिक जगत में केवल जनसामान्य के लिए मनोवैज्ञानिक ही होगा। बुरे समय में भगवान भले ही याद आ जाएं , किन्तु वह उस समय अपनी मुसीबतों छुटकारा प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करता है , वह इस प्रार्थना से अपनी मुसीबतों से छुटकारा नहीं पाता है , किन्तु पश्चाताप करके अपने अंत:करण की शुद्धि करने में उसे सफलता मिल ही जाती है।

(श्री विद्यासागर महथाजी द्वारा लिखित `फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ´ की पांडुलिपि से उद्धृत)

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About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
यह प्रविष्टि धर्म में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

One Response to फलित ज्योतिष और आध्यात्म

  1. hariraam कहते हैं:

    सचमुच आध्यात्म ही ज्योतिष का मूल है। अध्यात्मिक ज्ञान के परिप्रकाश में अनेक संस्थाएँ कार्यरत हैं। लेकिन उनके विचारों में आपस में कुछ साम्य है तो अनेक विरोधाभास। जरूरत है एक विज्ञान-सम्मत सर्वानुकूल आध्यात्मिक ज्ञान की।

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