माता, चल-अचल संपत्ति, वाहन और ज्योतिष

मानव जीवन के चौथे पक्ष के रुप में माता, मातृभूमि, चल-अचल संपत्ति, मकान, वाहन आदि संदर्भों को महत्वपूर्ण माना गया है । इन सबकी भी परिमाणात्मक विशेषताओं की चर्चा कर पाना फलित ज्योतिष में संभव नहीं है। किसी व्यक्ति का मकान कितना मंजिला होगा ? माता कैसी कद-काठी या रुप-रंग की होगी ? वाहन कौन सा होगा ? फैक्टरी किससे संबंधित होगी ? कोई खास भूमि या मकान जातक के लिए सुखद या दुखद होगी ? इन सब प्रश्नों का उत्तर कदापि नहीं दिया जा सकता । वास्तव में इस चौथे भाव से किसी व्यक्ति की स्थायित्व की स्थिति बतलायी जा सकती है, जो जातक के लिए सुखद या दुखद हो सकती है। किसी युग में एक ऐसी गुफा ही जातक को भरपूर स्थायित्व प्रदान करती थी, जिसमें जाड़े,गरमी और बरसात सभी ऋतुओं में वह आराम से रह पाता था और उसे गुफा को बदलने की जरुरत नहीं पड़ती थी, जबकि अन्यो को हर ऋतु में अपने रहने की जगह को बदलना पड़ जाता था। न सिर्फ गुफा को ही, वरन् किन्ही-किन्ही जातियों को तो हर ऋतु में अपने क्षेत्र को ही छोड़ने को मजबूर होना पड़ता था। इसी प्रकार यदि माता अपनी ही हो और उनसे विचारों का तालमेल न हो, तो कष्ट हो सकता है, जबकि सौतेली माता भी सुख प्रदान करनेवाली हो सकती है, इस हालत की एक ज्योतिषी भला किस प्रकार व्याख्या कर सकता है ? एक सामान्य किसान को एक कार पेट्रोल न भरा पाने का कष्ट प्रदान करेगी, जबकि एक बैलगाड़ी हर प्रकार का सुख, इसलिए उसके वाहन का अच्छा योग उसे बैलगाड़ी ही प्रदान करेगा । इस प्रकार हम उपरोक्त पक्षों के गुणात्मक पहलू की ही चर्चा कर सकते हैं।

     फलित ज्योतिष के द्वारा हम यह बतला सकते हैं कि जातक को माता का भरपूर प्यार प्राप्त हो रहा है या फिर उसके हिस्से में माता की नफरत ही लिखी है ? उसकी माता और हर प्रकार की संपत्ति उसके जरुरत की पूर्तिकरनेवाले गुणों से युक्त है या वंचित ? उसे कदम-कदम पर माता या हर प्रकार की संपत्ति का सहयोग मिल पाता है या नहीं ? अपनी माता या हर प्रकार की संपत्ति से संबंधित मुद्दों को लेकर वह गंभीर है या नहीं ? हर प्रकार की संपत्ति उसके स्थायित्व को मजबूत बना रहीं हैं या फिर वे सब तनाव का ही कारण हैं ? वाहन उसकी समस्याओं को बढ़ानेवाली हैं या फिर आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं ? मकान आज की आवश्यकताओं के अनुरुप हैं या वह उसे विरासत की तरफ से मिले बोझ की तरह ढ़ोने को बाध्य है ? किसी प्रकार की संपत्ति को प्राप्त करने के लिए वह कितना महत्वाकांक्षी है ? इन बातों के अतिरिक्त फलित ज्योतिष के द्वारा यह भी बतलाया जा सकता है कि हर प्रकार की संपत्ति के कारण समाज में उसका क्या स्तर है तथा किस समयांतराल में संपत्ति से संबंधित मामले सुखद और किस समयांतराल में दुखद बनें रहेंगे ?

     वास्तव में फलित ज्योतिष को एक सांकेतिक विज्ञान के रुप में परिभाषित किया जा सकता है। जैसे किसी जन्मकुंडली में मजबूत वाहन का योग प्राचीनकाल में हाथी, घोड़े आदि का संकेतक था, किन्तु आज वह मोटरसाइकिल, स्कूटर और कार का संकेत देता है। आज अमेरिका के हर व्यक्ति के पास मोटरगाड़ी है। क्या उनमें से सबका जन्म दुनिया के पिछड़े देशों में जन्म लेनेवाले मनुष्यों से अलग समय में हुआ है ?

(मेरे द्वारा लिखित `गत्यात्मक झरोखे से ज्योतिष´ की पांडुलिपि से उद्धृत)

Advertisements

About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
यह प्रविष्टि विभिन्न आयाम में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s