मेरी चुनौती स्वीकार करें या फिर…………….

यदि ज्योतिष विरोधियों की यह मान्यता होती है कि ज्योतिषी नासमझ या असफल हैं , तो हमें इतना दुख नहीं होता है , जितना यह पढ़कर होता है कि ज्योतिष-शास्त्र ही गलत है , अवैज्ञानिक है , अप्रमाणित है। कुछ लोगों की धारणा है कि ज्योतिष कोरी कल्पना है , अनुमान है। मैने कल मासिक पति्रका `नवनीत´ के संपादक को एक ईमेल किया है। प्रसिद्ध खगोलशास्त्री और वैज्ञानिक जयंत नालीZकर साहब के नवनीत के अक्तूबर 2007 में प्रकािशत एक लेख को पढ़कर यह प्रतिक्रिया लिखी गयी है। इसे मै अपने चिट्ठे के पाठकों के लिए भी पोस्ट कर रही हूं , ताकि वे भी इस तथ्य का सर्वेक्षण अपने स्तर पर कर हमें कुछ रिपोर्ट दे सके। पाठकों से मेरा अनुरोध है कि वे न तो किसी प्रकार के पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर राय दें और न ही चुप्पी साधें।

पत्र की कॉपी
सेवा में,

संपादक महोदय , मासिक पति्रका `नवनीत´

महाशय`नवनीत´ के अक्तूबर 2007 के अंक में प्रकािशत लेख `भरी दोपहरी को अंधेरा´ की प्रतिक्रिया पढ़कर काफी निराशा हुई। `गत्यात्मक ज्योतिष´ की खोज के बाद किसी व्यक्ति का भविष्य जानना असंभव तो क्या मुिश्कल भी नहीं रह गया है , क्योकि व्यक्ति को प्रभावित करने में बड़ा अंश विज्ञान के नियम का होता है , छोटा अंश ही सामाजिक , राजनीतिक , आर्थिक या पारिवारिक होता है या व्यक्ति खुद तय करता है और इस कारण भविष्य दृढ़ और नििश्चत है , ऐसा भी नहीं माना जा सकता। जब भी किसी ज्योतिषीय शोध को किसी वैज्ञानिक संस्था को भेजा जाता है, तो वे कहते हैं कि यह विषय उनके विचार-क्षेत्र में आता ही नहीं है और फिर पुन: वैज्ञानिक वर्ग के लोग हमसे हमारे सिद्धांतों की वैज्ञानिकता का प्रमाण चाहते हैं , आखिर उन्हें प्रमाण दिया जाए तो कैसे ?

गणित ज्योतिष के विकास के बाद ही फलित ज्योतिष का विकास हुआ है ,इसलिए उनकी यह बात कि कुछ अवैज्ञानिक प्रवृत्ति के लोगों ने यह मानते हुए कि ग्रह अपनी इच्छानुसार विचरण करते हैं और इसलिए इनका प्रभाव पृथ्वी के मनुष्यों पर पड़ता है, बिल्कुल गलत है। मुहूत्र्त, शकुन, कुंडली-मेलापक, आदि तथ्यों के विज्ञान होने की बात गलत मानी जा सकती है, किन्तु इंसान पर ग्रहों के प्रभाव की बात बेतुकी नहीं है। वैज्ञानिकों ने इस संबंध में क्या प्रयोग किए, इसकी जानकारी तो हमें नहीं है, किन्तु हमारी संस्था द्वारा ज्योतिष को विज्ञान साबित करते हुए जो हजारो तथ्य सामने आए हैं, उनमें से एक की चर्चा आपलोगों के सम्मुख की जा रही है इस तथ्य का सर्वेक्षण कर ज्योतिष को सही या गलत रुप में समाज के सम्मुख लाने की जिम्मेदारी मै आपलोगों पर छोड़ती हूं।

अपने परिभ्रमण-पथ में मंगल ग्रह की दूरी कभी पृथ्वी से अत्यधिक निकट, कभी सामान्य और कभी काफी दूर हो जाती है,ऐसा क्यों होता है, इस तथ्य की जानकारी तो उन्हें होगी ही , इसलिए क्योकि लेखक स्वयं खगोलशास्त्री हैं और इस तथ्य को आसानी से समझ सकते हैं। पृथ्वी से सामान्य और अतिदूरस्थ मंगल होने के वक्त पृथ्वी पर जन्मलेनेवाले क्या महसूस करते हैं, इसकी चर्चा बाद में की जाएगी, सिर्फ अत्यधिक निकट मंगल हो और उस काल में किसी व्यक्ति का जन्म हो, तो उसके प्रभाव की चर्चा मैं इस पत्र में करना चाहूंगी। 1931 से 1978 के मध्य मंगल की वैसी स्थिति निम्न समयांतरालों में थी, इस समय जन्म लेनेवाले सभी व्यक्ति मंगल के कारण उत्पन्न प्रभाव को झेलने को मजबूर हुए होंगे——
15 जनवरी से 15 फरवरी 1931
15 फरवरी से 15 मार्च 1933
15 मार्च से 15 अप्रैल 1935
पूरे महीनें मई 1937
10 जुलाई से 10 अगस्त 1939
पूरे महीनें अक्तूबर 1941
20 नवम्बर से 20 दिसमबर 1943
10 जनवरी से 10 फरवरी 1946
पूरे महीनें फरवरी 1948
15 मार्च से 15 अप्रैल 1950
15 अप्रैल से 15 मई 1952
10 जून से 10 जुलाई 1954
पूरे सितम्बर 1956
पूरे नवम्बर 1958
15 दिसम्बर 1960 से 15 जनवरी 1961
15 जनवरी से 15 फरवरी 1963
पूरे मार्च 1965
पूरे अप्रैल 1967
15 मई से 15 जून 1969
20 जुलाई से 20 अगस्त 1971
10 अक्तूबर से 10 नवम्बर 1973
पूरे दिसंबर 1975
10 जनवरी से 10 फरवरी 1978

आपलोगों को शायद विश्वास ही न हो कि उपरोक्त समयांतराल में जन्मलेनेवाले लगभग शत-प्रतिशत जातक अपने जीवन में 24 वषZ से 30 वषZ की उम्र तक बढ़ते क्रम में निम्न परेशानी झेलते पाए गए हैं——-
1ण् इस समय इनके सामने विपरीत परिस्थितियॉ बनींं होती हैं और ये अपनी परिस्थितियों से असंतुष्ट अपनी जरुरतों को पूरा न होते देख तनाव में होते हैं।
2ण् अपने उत्तरदायित्व की बोझ से दबे हुए आज्ञाकारी होने की वजह से कष्ट पाते हैं।
3ण् सिर्फ अपने कर्तब्यों को जानने और समझने की वजह से जीवन अच्छी तरह नहीं जी पाते हैं इनका आत्मविश्वास भी इस अवधि में कम होता है।
4ण् युवावस्था के मध्य में भी ये वृद्ध जैसे स्वभाव का प्रदशZन करते हैं ,इनमें हिम्मत की कमी होती है, इसलिए ये नियमों से चलना पसंद करते हैं। भीड़ में भी ये पीछे-पीछे चलते हैं।

30 वषZ की उम्र के बाद उनकी परिस्थितियों में कुछ सुधार की गुंजाइश रहती है, लेकिन पूरा सुधार 36 वषZ की उम्र के बाद ही हो पाता है।इस दृिष्ट से 1978 के 10 जनवरी से 10 फरवरी के मध्य जन्मलेनेवाले, जो अपनी उम्र का 30वॉ वषZ व्यतीत कर रहे हैं , उपरोक्त कठिनाई को काफी तीव्रता से महसूस कर रहे होंगे। 24 वषZ के बाद ही उनकी जीवनयात्रा कुछ कठिनाई भरी हो गयी होगी और 36 वषZ की उम्र तक किसी न किसी रुप में बनीं ही रहेगी।
विश्व के किसी भी देश की किसी भी संस्था से यह सर्वेक्षण करवाया जा सकता है, सिर्फ उसे किसी प्रकार के पूर्वाग्रह से मुक्त रहने की आवश्यकता होगी। बिना सर्वेक्षण के ही यदि आपलोगों ने चुप्पी साधी, तो आपलोगों से एक निवेदन है , भविष्य में फलित ज्योतिष को गाली न दें, वैसे ही आपलोगों के वक्तब्य से इसे काफी नुकसान पहुंच चुका है। दीपावली की शुभकामनाओं के साथ ———

संगीता पुरी

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About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
यह प्रविष्टि शोध में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

2 Responses to मेरी चुनौती स्वीकार करें या फिर…………….

  1. atulkumaar कहते हैं:

    ज्योतिष विज्ञान सही है. ज्योतिष शास्त्र को संदिग्ध माना जाता है.

  2. Praveen कहते हैं:

    मेरा जन्‍म 17-12-1973 को हुआ हैं और मैं अभी तक सैटल नही हा पाया हू और मुझे ज्‍यातिष विधा पर पूरा विश्‍वास है और इसे मैं सीखना चाहता हू

    प्रवीण गोयल

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