हस्ताक्षर विज्ञान

विश्व के सभी व्यक्तियों के अंगूठे भिन्न-भिन्न तरह के होते हैं। जितने प्रकार के या जितने लोग हैं, उतने ही अंगूठे हैं। अत: संभावनाओं की दृृिष्ट से इन अंगूठों पर शोध करने की संभावनाएं असीमित हो सकती है। किन्तु पतली कैपिलरीज रेखाओं को ध्यान सं दंखा जाए, तो अंगूठे में बननेवाले चिन्ह शंख चक्र या सीपी ही होते हैं। इन मुख्य चिन्हों की बनावट विभिन्न हाथों में भिन्न-भिन्न प्रकार की होती है। इस कारण ही एक व्यक्ति के अंगूठे की छाप देखकर यह तय करना नििश्चत होता है कि यह किस अंगूठे का चिन्ह है, किन्तु केवल अंगूठे के चिनह को देखकर ही उसके संपूर्ण चरित्र को उद्घोषित करना बहुत ही कठिन काम है। जब पूरी हथेली के चिन्हों और रेखाओं से ही जीवन में घटित होनेवाली संपूर्ण घटनाओं की जानकारी प्राप्त कर पाना संभव नहीं है, तो सिर्फ अंगूठे से ही कितना कुछ बताया जा पाएगा, यह सोंचनेवाली बात हो सकती है।

                

हस्ताक्षर बनाने में भी अंगूठे की ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अन्य कई उंगलियों का सहयोग भी प्राप्त करना होता है। किसी व्यक्ति का हस्ताक्षर भी दूसरे व्यक्ति से भिन्न ही होता है। किसी ऑफिस या बैंक में व्यक्ति से अधिक महत्वपूर्ण उसका हस्ताक्षर ही होता है। हस्ताक्षर के विशेषज्ञ किसी के मात्र हस्ताक्षर को देखकर ही उसके चरित्र का विश्लेषण करने का दावा करते हैं। जैसे- व्यक्ति कल्पनाशील है या व्यावहारिक ? यदि कल्पनाशील है, तो उसमें सृजनात्मक शक्ति है या नहीं ? व्यावहारिक है, तो उसमें संगठनात्मक शक्ति है या नहीं ? वह व्यक्ति महत्वपूर्ण है या उसके कार्यक्रम ? प्रारंभ से अंत तक विचारों का तालमेल है या बीच में कहीं भटकाव है ? आदि तथ्यों पर प्रकाश डाने के लिए, हो सकता है,किसी व्यक्ति का मात्र हस्ताक्षर ही काफी होता है, किन्तु केवल हस्ताक्षर से ही व्यक्ति के दशाकाल की चर्चा करना, किस वषZ किस प्रकार की घटना घटेगी, किस समय धन की प्राप्ति होगी, संपत्ति की प्राप्ति होगी, किसी समस्या का अंत होगा, इन सब बातों की चर्चा कर पाना मुिश्कल ही नहीं असंभव भी है। जीवन के बहुआयामी पहलू और व्यक्ति की सभी विशेषताओं पर प्रकाश डालना किसी हस्ताक्षर से संभव नहीं हो सकता। हस्ताक्षर विज्ञान की सीमाएं बहुत छोटी है। हस्ताक्षर विज्ञान से संबंधित किसी पुस्तक को पढ़ें, तो यह ज्ञात होगा कि इसके अद्यतन विकास के बावजूद किसी भी व्यक्ति के हस्ताक्षर के फल को लिखने के लिए कुछ पंक्तियॉ ही पर्याप्त होंगी। किसी के संबंध में कल्पना का सहारा लेकर दो-चार पृष्ठ भी लिखे जा सकते हैं, किन्तु अधिकांश बातें निरर्थक ज्योतिषीय धर्मसंपुिष्ट के विरुद्ध होगी।

(श्री विद्यासागर महथाजी द्वारा लिखित `फलित ज्योतिष : कितना सच कितना झूठ´ की पांडुलिपि से उद्धृत)

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About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
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One Response to हस्ताक्षर विज्ञान

  1. mohd. shakil कहते हैं:

    hastachar bana ke samband mai ????

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