मनोवैज्ञानिक चिकित्सा के रुप में झाड़-फूंक

गलती हर इंसान से होती है ,

किन्तु सही इंसान वही माना जाता है ,

जो बार-बार एक ही गलती न करे ,

वरन् एक बार की गयी गलतियों से सीख लेकर अपने व्यक्तित्व को सुधारने का प्रयास करता रहे। किन्तु कभी-कभी इसमें बड़ी-बड़ी बाधाएं आती हैं ,

इंसान की छोटी-मोटी गलतियों को तो समाज माफ कर देता है ,

किन्तु उससे यदि कोई बड़ी गलती हो जाती है ,

तो चाहे वह अपने जीवन को पश्चाताप की अग्नि में झोंक भी क्यों न दे,

समाज उसे हेय दृिष्ट से ही देखता है। इसके कारण उसका जीवन नरक समान ही हो जाता है। उसकी भविष्य में सामान्य जीवन जी पाने की कोई गुंजाइश नहीं रह जाती है। इस कारण उसे कभी आत्महत्या कर अपने जीवन का अंत करना होता है तो कभी विक्षिप्त होकर पूरी जिंदगी गुजारने को बाध्य होना पड़ता है।

      

इस समस्या को दूर करने के लिए ही हमारे ज्ञानी और गुणी लोगों के द्वारा झाड़-फूंक द्वारा इलाज किए जाने का स्वांग रचा जाता था। इस विधि के द्वारा जहॉ एक ओर शैतान के नाम पर व्यक्ति को मार-पीट और यातना देकर उसके किए की सजा भी दी जाती थी , ताकि भविष्य में वह कोई गलती करने का दुस्साहस न करे ,

वहीं दूसरी ओर समाज के लोगों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि इसने जो गलती की , वह इसके द्वारा नहीं वरन् इसके शरीर में विद्यमान शैतान के द्वारा किया गया था ,

ताकि भविष्य में वह समाज के बुरी दृिष्ट का िशकार न हो और उसका आत्मविश्वास बढ़ सके। लेकिन कालांतर में अंधविश्वास समझते हुए इसका वैज्ञानिक स्वरुप विलुप्त हो गया और समाज के निचले तबकों के लिए यह एक अभिशाप के रुप मौजूद हो गया और अभी तक इसका यही स्वरुप हम देख सकते हैं।

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About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
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