निम्न वर्ग के बच्चे : दो और प्रकार भी

मैंने कुछ दिन पूर्व निम्न वर्ग के 6 से 12 वषZ तक की उम्र के बच्चों के जीवन-यापन के दो ढंगों का उल्लेख करते हुए एक चिटठा पोस्ट किया था। निम्न वर्ग के ही बच्चे और दो प्रकार से जीवन-यापन करते हैं। पहले वे , जो अपने पिता के पारिवारिक धंधों में उनका हाथ बंटाते हैं , जैसे दूधवाले , छोटे-छोटे किसान , छोटे-छोटे श्रमिक , या अन्य छोटे कारीगरों के बच्चे। इनका बचपन मात्र छ: वषZ की उम्र के बाद समाप्त हो जाता है। अपने ही घर में रहते हुए उनकी बाल-मजदूरों से भी बदतर स्थिति होती है। दिनभर काम करने के बाद भी अपने थके-हारे-झल्लाए माता पिता द्वारा उन्हें छोटी-छोटी गलतियों पर मार-पीट ही मिलती है। अच्छा खाना और कपड़ा भी उनके नसीब में नहीं होता , लेकिन काम करते-करते उनकी कार्यक्षमता अवश्य ही बढ़ जाती है , जो उन्हें उस परम्परागत कला या व्यवसाय को सीखने में मदद करती है। इससे उन्हें जल्दी ही स्वावलम्बी बन पाने में मदद मिलती है , जो उनके भविष्य के मार्ग को प्रशस्त करती है।
      दूसरे वे बच्चे हैं , जो निम्न स्तर से तो हैं , पर किसी सरकारी या गैर-सरकारी संस्थानों में निम्नस्तरीय नौकरी या किसी अन्य प्रकार के छोटे व्यवसाय से ही जुड़े होने के बावजूद उनके अभिभावक का आर्थिक-पारिवारिक स्तर अच्छा है। इसलिए अभिभावकों की ओर से उच्छृंखल जीवन जीने की उन्हें छूट मिली हुई है। घर से ही हाथ में हमेशा दस-बीस रुपए भी मिल जाते हैं , कभी मॉगकर तो कभी चोरी से। इसमें से अधिकांश बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में कोई दिलचस्पी भी नहीं होती , क्योंकि इसके लिए माहौल में प्रेरक तत्वों का अभाव होता है। साथ ही अपने स्तर के अन्य बच्चों की तुलना में ये अपने को समर्थ महसूस करते हैं। माता-पिता की व्यस्तता के कारण भी इनकी परवरिश में उच्छृंखलता आती है। इन्हें किसी से डर नहीं होता। हमेशा मनमानी करते रहते हैं। हर मौसम का हर खेल इन्हें अच्छा लगता है। उन खेलों की हर सामग्री प्राप्त करने के लिए ये जी-जान लगा देते हैं। दिनभर सड़को और गलियों में घूमने और जेब में पैसे मौजूद होने के कारण अक्सर इन्हें नशे की आदत भी लग जाती है। धीरे-धीरे ये कामचोर भी होने लगते हैं। अपने कर्तब्यों से अधिक इन्हें अपने अधिकार की चिंता रहती है। जरा सोंचिए ? इनका भविष्य क्या हो सकता है ? अभिभावक पर भारस्वरुप लदे होने को छोड़कर।

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About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
यह प्रविष्टि जीवनशैली में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

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