ग्रह-गति का मानव जीवन पर प्रभाव

गत्यात्मक ज्योतिष की जानकारी के बाद किसी व्यक्ति के जन्म के समय ग्रहों की गति मात्र को देखकर ही जातक के बरे में काफी कुछ बतलाया जा सकता है , यहाँ तक की उसकी जन्म-तिथि से ही उसके पूरे जीवन के उतर चढाव का जीवन-ग्राफ खिंचा जा सकता है , किंतु बिना जन्म-समय या जन्मस्थान के खास संदर्भों की चर्चा नहीं की जा सकती है . किसी व्यक्ति के जन्म के दिन अधिकांश ग्रह अतिशीघ्री या शिघ्री अवस्था में हो , टू जातक के ग्रहों को गत्यात्मक शक्ति की प्रचुरता प्राप्त होगी और उसका जीवन ग्राफ उपर ही उपर होता है .  ऐसे ग्राफ वाले जातक जीवन में अनायास सुख और सफलता प्राप्त करतें हैं , थोड़े परिश्रम से ही अपने स्तर के अनुरूप जीवन-यापन में कोई बढ़ा न आने से तथा कोई बड़ी कठिनाई न आने से उनकी कार्यक्षमता और महत्वाकांक्षा काम होती है तथा वे निश्चिंत और लापरवाह स्वभाव के भी देखे जाते हैं. वे स्वतंत्र होते हैं तथा सेवा-भावना अंधविश्वास और धार्मिक भय का उनके व्यक्तित्वा में नामोनिशान भी नहीं होता .

लेकिन यदि किसी व्यक्ति के जन्म के दिन अधिकांश ग्रह वक्री स्थिति में हो , तो जातक के ग्रहों को काफी कम या शुन्य गत्यात्मक शक्ति प्राप्त होगी . और उसका जीवन ग्राफ नीचे ही नीचे स्थित होगा . ऐसे ग्राफ वाले जातक दुखमय वातावरण प्राप्त करते हैं, अपने स्तर के अनुरूप रहने में लाख कठिनाइयों का सामना करते हैं , अपनी कठिन परिस्थिति को सुधरने में चाहे कितना भी म्हणत कर लें , उसे सुधारनें में सफलता नही प्राप्त कर पाते हैं . उनका जीवन किसी न किसी की सेवा में ही लगा होता है , अधिकांश समय वे पराधीन और लाचार होते हैं , हमेशा कठिनाइयों के उपस्थिति के कारण धर्मिक अभिरुचि जगती है और अंधविश्वास की ओर भी ये आकर्षित होने लगते हैं . इन दोनों के ही विपरीत , यदि किसी व्यक्ति के जन्म के दिन अधिकांश ग्रह सामान्य और मंद अवस्था में हो तो जातक के ग्रहों को सामान्य गत्यात्मक शक्ति प्राप्त होती है और उसका जीवन-ग्राफ के मध्य में स्थित होता है . ऐसे जातक बड़े स्तर में रहने के बावजूद और अधिक महत्वाकांक्षी होते हैं , उनकी कार्यक्षमता भी काफी होती है , सोच का स्तर बड़ा होता है . ये न तो विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं और नही तनावग्रस्त रहते हैं , बल्कि उनका ध्यान सिर्फ़ कार्य करने पर लगा होता है . कार्य के प्रति अपने इसी ध्यान-संकेन्द्रण के कारण ये यशस्वी होते हैं , वैसे कभी कभी बड़ी विफलता भी यही प्राप्त करते हैं .

( मेरी पुस्तक गत्यामक दश पद्धति : ग्रहों का प्रभाव से उद्धृत )

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About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
यह प्रविष्टि गत्यात्मक ज्योतिष में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

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