स्वक्षेत्री ग्रहों का प्रभाव

फलित  ज्योतिष  के प्राचीन ग्रंथों  में स्वक्षेत्री ग्रहों को काफी महत्वपूर्ण  समझा जाता है ।  यहाँ तक  की किसी  जनमकुंडली में एक या दो स्वक्षेत्री ग्रह हें , तो  वह  किसी भाग्यवान की ही कुंडली होगी , एसा माना जाता है। किंतु वास्तव में ऐसी  बात नहीं होती  है। प्रत्येक  कुंडली में बारह खाने होते हैं , जिनमे  से किसी  ग्रह के एक भाव में आने  की संभावना 1\12 हागी। लेकिन सूर्य और  चंद्र को  छोड़कर  अन्य  सभी ग्रहों  के आधिपत्य  में दो-दो राशियां  हैं इसिलए उन ग्रहों  की अपने ही भाव में आने की संभावना 1\6 होगी । इसलिए दो ग्रहों के स्वक्षेत्री होने  की संभावना 72 कुंडलिया में से एक में अवशय होनी  चाहिए , जबिक जनसंखया का १२ वां भाग भाग्यवान  नहीं माना जा सकता।ग्रहों  का स्वक्षेत्रिया होना सामान्य  सी बात है , उनका स्वाभाव  एक सा नहीं हो  सकता। उनके स्वाभाव की विभिन्नता  का कारण उनकी गत्यात्मक शक्ति ही है । इसलए किसी  भी कुंडली में स्वक्षेत्री ग्रहों की गत्यात्मक शक्ति का अध्ययन आवश्यक  है।
यदि स्वक्षेत्री ग्रह आधिक गत्यात्मक शक्ति संपन्न हों तो  जातक पूर्वजों से ही या भाग्य से उस ग्रह के भावों से संबंधित कोई ऐसी चीज  प्राप्त करता है ,जिससे उसका मन संतुष्ट हो जाता है , उसे कुछ पाने या हासिल करने की लालसा नहीं रह जाती है। यदि पूर्वजों से न भी प्राप्त हो  , तो थोड़े मेहनत से ही उस ग्रह के भावों से संबंधित अधिक उपलबधि से वह संतुष्ट होता है। यदि स्वक्षेत्री ग्रह सामान्य या मंद गति का हो , तो उस ग्रह से संबंधित मामलो में जातक की महतवाकांक्षा काफी बड़ी हाेती है , उसी के अनुसार उसकी कायर्क्षमता भी होती है। ग्रह के दशाकल  में उस  विषय पर उसकी ध्यान संकेंद्रता और स्तर देखने लायक होता है । इसी प्रकार यदि स्वक्षेत्री ग्रह वक्री स्थिति में हो तो  उस ग्रह के भावों  से संबंिधत मामले कष्ट और तनाव देते हैं। किसी प्रकार की दुर्घटना या असफलता का बुरा प्रभाव उन संदर्भों  पर पड़ता है और  इनका स्वक्षेत्री ग्रह  भी  अपने दशाकाल में कोई  उपाय नहीं कर पाता है।
(मेरी पुस्तक  गत्यात्मक  दशा पद्धति : ग्रहों का प्रभाव से उद्धृत अंश)

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About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
यह प्रविष्टि गत्यात्मक ज्योतिष में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

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