सापेक्षिक गत्यात्मक शक्ति

किसी ग्रह की गत्यात्मक शक्ति के अनुसार ही जातक किसी प्रकार की परिस्थिति प्राप्त करता है तथा उसकी कार्यक्षमता भी उसी के अनुरूप निर्धारित होती है , किन्तु फल का सकारात्मक या नकारात्मक होना किसी ग्रह की सापेक्षिक गत्यात्मक शक्ति पर निर्भर करता है। ग्रह जिस राशि में स्थित हों , उसका राशिश यदि सापेक्षिक कमजोर हो , तो उक्त ग्रह की सापेक्षिक गत्यात्मक शक्ति सकारात्मक होती है और जातक उन भावों से संबंधित सकारात्मक फल प्राप्त करता है। इसके विपरीत , ग्रह जिस राशि में स्थित हों , उसका राशिश यदि सापेक्षिक मजबूत हो , तो उक्त ग्रह की सापेक्षिक गत्यात्मक शक्ति ऋणात्मक होती है और जातक ऋणात्मक फल प्राप्त करता है।

इस दृष्टि से शीघ्री और अतिशीघ्री अवस्था के ग्रह लगभग सकारात्मक गत्यात्मक शक्ति संपन्न ही होते हैं और जातक को सुख.सफलता ही प्रदान करते हैं। लेकि यदि कभी.कभी ऋणात्मक हो जाते हैं , किसी लापरवाही की बड़ी गड़बड़ी प्रदान करते हैं। सामान्य और मंद गति के ग्रह के राशीश यदि वक्री हों , तो ग्रह सकारात्मक गत्यात्मक सक्तिसंपन्न ही होते हैं , इसलिए सामान्य तौर पर जातक अच्छी सफलता प्राप्त करते हैं। सामान्य और मंद गति के ग्रह के राशीश यदि शीघ्री या अतिशीघ्री हों , तो ग्रह लगभग ऋणात्मक गत्यात्मक शक्तिसंपन्न होते हैं , इसलिए किसी साधन से तालमेल न हो पाने के कारण जातक असफलता प्राप्त करते हैं। सामान्य और मंद गति के ग्रहों के राशीश भी यदि मंद हों , तो ग्रह सकारात्मक गत्यात्मक शक्तिसंपन्न ही होते हैं और जातक को अपनी एकाग्रता और कार्यक्षमता का बड़ा पुरस्कार प्राप्त होता है। वक्री या अतिवक्री ग्रहों के राशीश यदि वक्री या अतिवक्री ही हों , तो ग्रह लगभग सकारात्मक गत्यात्मक शक्तिसंपन्न ही होते हैं , इसलिए उस बुरी स्थिति में रहने की जातक को आदत सी हो जाती है और उसs खास बुरा नहीं लगता। वक्री या अतिवक्री ग्रहों के राशीश यदि सामाङय या मंद ग्रह हों , तो ग्रह ऋणात्मक गत्यात्मक शक्तिसंपन्न होते हैं और जातक बहुत ही बड़ी असफलता इस अवधि में प्राप्त करते हैं। वक्री या अतिवक्री ग्रहों के राशीश यदि शीघ्री या अतिशीघ्री ग्रह हों , तो ग्रह ऋणात्मक गत्यात्मक शक्तिसंपन्न ही होते हैं , इस स्थिति में जातक बहुत आरामदायक स्थिति से अपनी तुलना करते हुए अपने जीवन को तुच्छ समझने लगते हैं।

(मेरी पुस्तक  गत्यात्मक  दशा पद्धति : ग्रहों का प्रभाव से उद्धृत अंश)

 

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About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
यह प्रविष्टि गत्यात्मक ज्योतिष में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

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