5000 ठोकरों की खुशी

किसी को पांच हजार ठोकर लगें और वह खुश हो , ऐसा सिर्फ इंटरनेट में ही हो सकता है आज जब मैंने अपना ब्लाग स्टेट्स देखा , तो वह 5000 पार कर चुका था। मात्र चार महीने हुए , कादम्बिनी के ही किसी अंक में आई टी नुक्कड़ में गौरी पालीवालजी के ही निर्देशानुसार 2007 में अगस्त के अंत में  ही मैनें यह ब्लाग बनाया था। किन्तु यूनिकोड में लिख पाने ,एग्रीगेटर से जुड़ पाने या अन्य तकनीकी जानकारी के अभाव में सितम्बर सुस्त सा ही व्यतीत हुआ था। कादम्बिनी के अक्तूबर 2007 में बालेन्दु दधीचजी के ब्लाग हो तो बात बनें कवर स्टौरी पड़ने के बाद ही ब्लाग से संबंधित मेरे क्रियाकलापों में गति आ सकी थी। मै अपने ब्लाग में इसे श्रेय न दे सकी थी ,साथ ही कादम्बिनी के आई टी नुक्कड़ में अपना नाम दर्ज कराने की दावेदारी न ठोक पाने से दर्द महसूस कर रही थी , क्योंकि मैने ब्लाग पहले ही बना लिया था। ऐसी स्थिति में कादम्बिनी  के दिसम्बर अंक में प्रस्तुत किए गए नए ब्लाग में अपने ब्लाग का न सिर्फ नाम , वरन् इस ब्लाग की विषयवस्तु के अनुरूप ही ब्लाग की विवेचना भी  देखने को मिली , तो मुझे कितनी खुशी मिली होगी , इसका अंदाजा आप पाठक खुद लगा सकते हैं।  इसके लिए गौरी पालीवालजी को बहुत.बहुत धन्यवाद देना चाहूंगी।

 

 सितम्बर से जनवरी तक की मेरी यात्रा में पाठकों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है , जबकि ब्लाग बनाने के बाद कादम्बिनी  के निर्देशानुसार मैने अपने द्वारा साइट का कोई प्रचार.प्रसार नहीं किया है। सितम्बर, अक्तूबर , नवम्बर और दिसम्बर में आवश्यकता भर सामग्री डालने के बाद ही अपने क्लाएंट्स को जनवरी में नए वर्ष की शुभकामना और वर्ष 2008 की भविष्यवाणी के साथ ही अपने ब्लाग यू आर एल देने का मेरा विचार था , किन्तु उससे पहले ही पाठकों को इतनी संख्या में देखकर बहुत सुख पहुंचा है। इसका सबसे अधिक श्रेय ब्लागवाणी को दिया जा सकता है , क्योंकि मेरे किसी भी पोस्ट को ब्लागवाणी से पढ़नेवालों की संख्या कुल पाठकों की 25 प्रतिशत अवश्य होती है। बाकी के 75 प्रतिशत नारद , चिट्ठाजगत और अन्य ब्लाग एग्रीगेटर तथा विभिन्न सर्च इंजिनों से होते हैं। इसके अतिरिक्त कादम्बिनी के अक्तूबर अंक में मेरे चिट्ठे के यू आर एल के प्रकाशित हो जाने से भी पाठकों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है।  इतने दिनों में मेरे एक लेख कुंडली मिलाने की वैज्ञानिकताने सर्वाधिक पढ़े जाने का रिकार्ड बनाया है यानि इसने  यानि 265 ठोकर पाए हैं, जबकि 2 जनवरी को पोस्ट किया गया लेख लग्न राशिफल जनवरी 2008ने पहले एक सप्ताह में सर्वाधिक पढ़े जाने का रिकार्ड बनाया है यानि पहले एक सप्ताह में ही इसने 195 ठोकर पाए हैं। इसके अतिरिक्त 1 जनवरी को पोस्ट किया गया लेख हिन्दी के ब्लागर भाई.बहनों ने मनाया नववर्षने न सिर्फ सर्वाधिक सात  टिप्पणियां भी पायी हैं , वरन् काकेशजी के द्वारा 111 टिप्पणियां प्राप्त करने की शुभकामना भी प्राप्त की है। ये सब बातें मेरे लिए बहुत ही उत्साहवर्द्धक रही।

 

Advertisements

About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
यह प्रविष्टि सामयिक में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

4 Responses to 5000 ठोकरों की खुशी

  1. उन्मुक्त कहते हैं:

    ५००० ठोकंरे खाने की बधाई 🙂

  2. सुनीता(शानू) कहते हैं:

    सुर्खरूह होता है इंसा ठोकरे खाने के बाद…:)

  3. paramjitbali कहते हैं:

    ५००० हिट्स की बहुत-बहुत बधाई।

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s