कमजोर चंद्रमाःअसाधारण व्यक्तित्व

गत्यात्मक ज्योतिष में सूर्य से 40 डिग्री तक की दूरीवाले चांद को कमजोर माना जाता है , जिसके कारण बाल्यावस्था के वातावरण में किसी प्रकार की कमी रह जाती है , जिसे बच्चा मन ही मन महसूस करता है और बाद के जीवन में यदि अन्य ग्रह उसकी मदद करते हैं तो वह अपनी कमजोरी को दूर करने के लिए असाधारण कार्य कर डालता है और असाधारण व्यक्तित्व का स्वामी बन जाता है। इस प्रकार किसी महान व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण में कमजोर चंद्रमा की बहुत बड़ी पृष्ठभूमि होती  है—-.

झांसी की महारानी लख्मीबाई का जन्म संवत्1891 में कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष कह चतुर्दशी तिथि को तुला लग्न में हुआ था। इनका चंद्रमा दशम भावाधिपति कमजोर होकर लग्न में स्थित है , इसलिए उन्होनें बाल्यावस्था में शरीर और पिता के सुख में कमी का अहसास किया और इसकी क्षतिपूर्ति के लिए ऐसा असाधारण कार्य कर बैठी कि पूरी दुनिया उनके व्यक्तित्व का लोहा मानती है और प्रतिष्ठा देती है।

महात्मा गांधी का जन्म 02.10.1869 को तुला लग्न में ही हुआ था , चंद्रमा दशम भावाधिपति एकादश भाव में स्थित है , इस कारण बचपन में लाभ और प्रतिष्ठा की कमी महसूस की आर ऐसा असाधारण कार्य कर डाला कि पूरी दुनिया इनके लाभ प्राप्ति के तरीके की इज्जत करती है।

पं रविन्द्र नाथ टैगोर का जन्म 07.05.1861 में मीन लग्न में हुआ था , कमजोर चंद्रमा बुद्धि का अधिपति लग्न में स्थित है , इसलिए बाल्यावस्था की शारीरिक और बौद्धिक कमजोरी को दूर करने के लिए बाद में असाधारण पुस्तकें लिखकर असाधारण व्यक्तित्व के स्वामी बन गए।

हैदर अली शाह ने दिसम्बर 1772 में तुला लग्न और वृश्चिक राशि में जन्म लिया था , यानि कमजोर चंद्रमा दशम भावाधिपति द्वितीय भाव में स्थित था। इन्होनें बाल्यावस्था में पिता , प्रतिष्ठा और धन तीनों की कमी को महसूस किया और बाद के जीवन में तीनों को ही मजबूती दे सकें।

श्री आदि शंकराचार्य ने कर्क लग्न में जन्म लिया था , इनका लग्नाधिपति कमजोर चंद्रमा लाभ स्थान में स्थित था , जिसके कारण बाल्यावस्था में शारीरिक कष्ट और लाभ की कमी को महसूस किया और बाद में शरीर लाभ का असाधारण कार्य कर बैठे।

स्वर्गीय देवकी नारायण खत्रीजी का जन्म संवत् 1924 पौष कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मिथुन लग्न में हुआ था , द्वितीय भावाधिपति चंद्रमा कमजोर होकर षष्ठ भाव में स्थित है, जिसके कारण इन्होनें बाल्यावस्था में झंझटों , पेचीदगियों जैसी समस्याओं के कारण आर्थिक कमजोरी महसूस की और बाद में अनेक जासूसी और तिलिस्मी उपन्यास लिखे , जिनसे उन्हें आर्थिक लाभ हुआ।

रामकृष्ण परमहंसजी का जन्म 18.02.1836 को कुंभ लग्न में हुआ था , इनका षष्ठ भावाधिपति चंद्रमा कमजोर होकर लग्न में स्थित है , जिसके कारण बाल्यावस्था में इन्होनें शारीरिक और अन्य जटिलताओं को महसूस किया और बाद में मोक्ष की प्राप्ति हेतु असाधारण कार्य कर बैठे।

मथुरा के प्रसिद्ध सुख संचारक कंपनी के मालिक पं क्षेत्रपाल शर्माजी ने कुंभ लग्न और मकर राशि के अंतर्गत जन्म लिया था , षष्ठ भावाधिपति चंद्रमा द्वादश भाव में स्थित था , जिसके कारण बाल्यावस्था में रोगों की उपस्थिति और क्रयशक्ति की कमजोरी का अनुभव किया और बाद में विश्व स्तर पर लोकप्रिय होनेवाली असाधारण दवाइयां निकाली।

भगवान रजनीश का जन्म 11.12.1931 को कुंभ लग्न में हुआ था , इनका भी षष्ठ भावाधिपति चंद्रमा एकादश भाव में स्थित है , इस कारण बाल्यावस्था में अनेक प्रकार के झंझटों के कारण लाभप्राप्ति के लिए अपने को कमजोर पाया और बाद में लाभप्राप्ति के अनोखे मार्ग को चुना तथा असाधारण व्यक्तित्व के स्वामी बनें।

फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन का जन्म 10.10.1942 को मीन लग्न मे हुआ था , पंचम भावाधिपति चंद्रमा कमजोर होकर अष्टम भाव में स्थित है , जिसके कारण बाल्यावस्था में बौद्धिक और जीवनशैली की कमजोरी महसूस की और उसे दूर करने के लिए असाधारण कार्य कर असाधारण व्यक्तित्व के स्वामी बनें।

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About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
यह प्रविष्टि गत्यात्मक ज्योतिष में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

4 Responses to कमजोर चंद्रमाःअसाधारण व्यक्तित्व

  1. कृपया देवकी नारायण के स्थान पर सही कर लें- ‘ देवकीनन्दन’ ।

  2. eswami कहते हैं:

    आपके ये हर ग्रह को एक टाईम-स्लाट अलाट करने वाले फ़ंडे अपनी खोपडी के बाहर हैं.

    आपने रजनीश की आत्मकथा नहीं पढी शायद – उनके जैसा प्यारा बचपन किसी का क्या होगा? अमिताभ एक बहुत सशक्त परिवार से हैं और उन्होंने अपने बचपन के अंतर्मुखी व्यक्तित्व और किताबों से प्रेम के बारे में कई बार कहा है – कोई बौद्धिक कमजोरी नहीं थी!

    जहां तक बचपन का प्रश्न है हर एक के बचपन में किसी ना किसी चीज़ की कमी रहती है – कोई असंतोषी तो मनघडंत कमी/वजह भी बना लेगा.. और कमियां हमेशा बडा हो कर पूरा करने की ललक हर एक में होती ही है.

    मेरे सू. , चं, बु ३ में कुंभ के हैं – तो अपने चंद्र की तो वाट ही लगी होनी चाहिए! नहीं क्या? लेकिन अब भी पत्रिका में जब भी चंद्र की कोई दशा आती है कुछ परेशानी देती है – क्योंकी वो अष्टमेश है. जहां तक बचपन का प्रश्न है बडा ही नो टैंशन टाईप था.

    फ़िर भी आपके हिसाब से चलें तो भी इस लिस्ट में अपना नाम जुडने का कोई स्कोप नही दिख रहा है.

  3. prakashpandey कहते हैं:

    mujhe aapki baaton se lag raha hai ki aap ki bat aur tark kisi had tak sahi hai . meri kundali main bhi lagnesh chandra navam bhav mein hai . mera janm bhadrapad krishna shasthi ka hai. aap apni research jari rakhen

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