मेरे पोस्ट पुनः ब्लागवानी, चिटठाजगत, नारद सहित अन्य एग्रीगेटरों पर

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                         पिछले महीनें मेरे ब्लाग में कोई तकनीकी गड़बड़ी रही या एग्रीगेटर के कारण ऐसा हुआ , यह मै नहीं समझ सकी , मेरी कोई भी पोस्ट किसी भी एग्रीगेटर द्वारा न दिखायी जा सकी , इस कारण पिछले महीनें के लगभग सभी पोस्टों को पाठकों का नुकसान सहना पड़ा , सिर्फ सर्च इंजिन से ही इस साइट पर पाठक आ सके। यह ऐसा महीना था , जिसमें मैनें हिन्दी ब्लागरों के आपसी सहयोग से होते कार्यक्रमों की विवेचना करते हुए दो लेख देखिए यहां और वहां लिखे थे। वैसे तो ज्योतिष की साइट होने के बावजूद मेरे पोस्ट सिर्फ ज्योतिषियों  के लिए न होकर ज्योतिष.प्रेमियों के लिए होते हैं , पर ये दोनों पोस्ट सिर्फ ज्योतिषप्रेमियों के लिए न होकर सामान्य पाठक के लिए भी थे। ऐसे में पाठकों का नुकसान मेरे लिए थोड़ा तनाव बढ़ानेवाला था। एग्रीगेटरों को मैने इसकी सूचना दी , पर उसका कोई फायदा नहीं हुआ। इसका असर मेरे पोस्ट लिखने पर भी पड़ा। इस समस्या से परेशान मै एक अलग एड्रेस पर ब्लाग बनाने की तैयारी कर रही थी , पर कल अचानक मैने एक पोस्ट लग्न.राशिफल फरवरी 2008′ पोस्ट किया और ब्लागवानी के आइकन पर क्लिक करते ही पाया की मेरी पोस्ट ब्लागवानी पर आ रही है , एक बार पुनः रिफ्रेश करने पर पाया कि 13 जनवरी के बाद पोस्ट किया गया सारा पोस्ट ब्लागवानी के साथ ही साथ चिटठाजगत में भी आ रहा है , तो मेरी खुशी का ठिकाना न रहा ।

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About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
यह प्रविष्टि सामयिक में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

2 Responses to मेरे पोस्ट पुनः ब्लागवानी, चिटठाजगत, नारद सहित अन्य एग्रीगेटरों पर

  1. drjcp कहते हैं:

    आपने इस लेख को “फुल जस्टिफाई” किया है. यह इंटरनेट एस्क्प्लोरर में तो सही दिखता है, लेकिन फायरफाक्स में इसका एक शब्द भी नहीं पढा जाता है. सारे के सारे अक्षर खंडित हैं.

    चूंकि आज जाल पर 50% अधिक फायरफाक्स या उसके इंजन पर अधारिक ब्राउसरों का प्रयोग करते हैं, अत: हिन्दीजगत के आधे से अधिक लोग आप का चिट्ठा नहीं पढ पाते.

    जब कोई चिट्ठा पढने की स्थिति में नहीं है तो लोग उसे छोड कर आगे बढ जाते हैं. उनको कोई नुक्सान नहीं लेकिन चिट्ठाकार को नुक्सान है क्योंकि जिन लोगों के लिये उसने मेहनत से यह चिट्ठा तय्यार किया है उसमें से आधे लोग इसे पढ नहीं पाते हैं.

    कृपया भविष्य में सिर्फ “लेफ्ट जस्टिफाई” का प्रयोग करें जिस से आपके चिट्ठे पर आने वाले 100% लोग इसे पढ सकें.

  2. उन्मुक्त कहते हैं:

    वर्ड प्रेस में हिन्दी में चिट्ठा लिखने पर कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उसमें यह मुश्किल एक है। इसका मुख्य कारण है हिन्दी में लम्बी श्रेणियां या जिसे आप विविधिता कह रहीं हैं उसका होना। इसे यदि आप हिन्दी में लिखती हैं तो छोटा करिये अन्यथा अंग्रेजी में लिखें।

    दूसरी प्रमुख मुश्किल Error-404 है। इसका मुख्य कारण आपके पोस्ट का हिन्दी में पता होना है। जैसा कि आपने इस चिट्ठी में किया है। हो सकता है कि आपको अभी इस मुश्किल का सामना ना करना पड़ा हो।

    मैं इन दोनो मुश्किलों से गुजर चुका हूं। मैंने इन दोनो के बारे में वर्ड प्रेस पर हिन्दी चिट्ठे की एक और मुश्किल और उसका हलhttp://unmukts.wordpress.com/2006/06/02/error-404/ और Error 404 नाम से लिखी है। आप इन्हें देख लें।

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