पूर्व प्रौढ़ावस्था का प्रतीक ग्रहःशुक्र

सौरमंडल में शुक्र ग्रह की स्थिति पृथ्वी और सूर्य के मध्य में होती है , इसलिए किसी भी जन्मकुंडली में शुक्र और सूर्य साथ.साथ ही होता है। शुक्र सूर्य से अधिकतम 46.47 डिग्री की कोणात्मक दूरी पर स्थित हो सकता है। 36 वर्ष से 48 वर्ष तक का समय मनुष्य की पूर्वप्रौढ़ावस्था का समय होता है और इसी उम्र में मानवजीवन पर शुक्र के प्रभाव को महसूस किया गया है। शुक्र की शक्ति का आकलण हम उसकी गति के आधार पर आसानी से कर सकते हैं। पृथ्वी के सापेक्ष शुक्र की गति में कमी या बढ़ोत्तरी होती रहती है , यदि शुक्र की गति प्रतिदिन 1 डिग्री 10 मिनट से अधिक हो , तो शुक्र की गत्यात्मक शक्ति बहुत अधिक होगी। सूर्य.शुक्र बहिर्युति के दिन सूर्य और शुक्र की कोणात्मक दूरी शून्य होती है , इस दिन शुक्र पृथ्वी से सर्वाधिक कोणात्मक दूरी पर यानि लगभग 15 करोड़ किमी की दूरी पर स्थित होता है। यदि शुक्र की गति प्रतिदिन 1 डिग्री हो , तो शुक्र सामान्य गत्यात्मक शक्ति का होता है , इस दिन शुक्र.सूर्य की कोणात्मक दूरी लगभग 46 डिग्री होती है तथा शुक्र पृथ्वी से औसत दूरी पर यानि लगभग 7 करोड़ किमी की दूरी पर स्थित होता है , यदि शुक्र की गति प्रतिदिन 1 डिग्री से कम हो , तो शुक्र की गत्यात्मक शक्ति कुछ कम होने लगती है , लेकिन शुक्र वक्री गति में हो , तो शुक्र की गत्यात्मक शक्ति काफी कम हॅ जाती है। सूर्य-शुक्र अंतर्युति के दिन शुक्र की गत्यात्मक शक्ति शून्य होती है , इस दिन शुक्र पृथ्वी से काफी निकट यानि लगभग 3 करोड़ किमी मात्र  की दूरी पर स्थित होता है।

वैसे जातक , जिनका शुक्र अधिक गत्यात्मक शक्तिसंपन्न होता है , 36 वर्ष से 48 वर्ष की उम्र तक सफल जीवन व्यतीत करते हैं। विशेषकर 42वां वर्ष उन्हें विशेष सुख.सफलता देनेवाला होता है। वे उस.उस भाव से संबंधित सुख और सफलता प्राप्त करते हैं , जिस.जिस भाव से शुक्र संबंधित होता है। शुक्र जिस.जिस भाव का स्वामी हो , जिस भाव में वह स्थित हो , वह भाव तथा उसके राशिश का दूसरा भाव तथा जिस.जिस भाव के राशिश के साथ स्थित होता है , उन भावों पर मजबूत शुक्र अपना प्रभाव डालता है। विपरीत स्थिति में , यानि वैसे जातक , जिनका शुक्र कम गत्यात्मक शक्तिसंपन्न हो , 36 वर्ष से 48 वर्ष की उम्र तक असफल होते हैं , इस अवधि में परिस्थितियां उनके नियंत्रण में नहीं होती। विशेषकर 42वां वर्ष उन्हें विशेष कष्ट देनेवाला होता है।  वे उस उस भाव से संबंधित असफलता प्राप्त करते हैं , जिस.जिस भाव से शुक्र संबंधित होता है यही कारण है कि ओशो रजनीश की जन्मकुंडली (जन्मतिथि.11.12.1931 कुंभ लग्न) में चतुर्थ और नवम् भाव के स्वामी शुक्र के मजबूत होकर स्थित होने के प्रभाव से ही उन्होनें 1967 में यानि 36वें वर्ष में कालेज के व्याख्याता की नौकरी छोड़कर धार्मिक मिशन की शुरूआत की । भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की जन्मकुंडली (20.08.1944 सिंह लग्न) में तृतीय और दशम् भाव का स्वामी शुक्र के मजबूत होकर स्थित होने के प्रभाव से ही उन्हें 1980 में यानि 36 वर्ष की उम्र में राजनीति में पदार्पण करना पड़ा। गत्यात्मक दशा पद्धति और गत्यात्मक गोचर प्रणाली के जन्मदाता श्री विद्यासागर महथा(15.07.1939 कुंभ लग्न) की जन्मकुंडली में मजबूत होकर स्थित चतुर्थ और नवम् भाव का स्वामी शुक्र के प्रभाव से ही 36 वर्ष की उम्र में पहली बार 1975 में गत्यात्मक दशा पद्धति पर आधारित इनके दो लेखों को दो पत्रिकाओं सहारनपुर से प्रकाशित होनेवाली ज्योतिष.बोध और जयपुर से प्रकाशित होनेवाली ज्योतिष.मार्तण्ड में जगह मिली। जिनमें विंशोत्तरी दशा पद्धति की कमजोरियों को दिखाते हुए ज्योतिषियों को अन्य राह पर चलने को प्रेरित किया गया था तथा साथ ही ज्योतिष की इस नई खोज के अनुसार मानव जीवन पर चंद्रमा , बुध , मंगल , शुक्र , सूर्य , बृहस्पति , शनि , यूरेनस , नेप्च्यून और प्लूटो के प्रभाव के क्रमिक काल के औचित्य का विवरण था।इस तरह जहां एक ओर 1975 में गत्यात्मक दशापद्धति की शुरूआत हुई , वहीं दूसरी ओर 1975 में इनके अपने घर की नींव भी पड़ी। 42वें वर्ष में यानि 1981 में जहां एक ओर इन्होनें ग्रहों के गत्यात्मक शक्ति की खोज की , तो दूसरी ओर नए घर में पदार्पण भी किया।

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About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
यह प्रविष्टि गत्यात्मक ज्योतिष में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

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