उत्तर.प्रौढ़ावस्था का प्रतीक ग्रहःसूर्य

सूर्य सौरमंडल का आधार है। यूं तो सौरमंडल में सूर्य स्थिर है और अन्य सभी ग्रह इसकी परिक्रमा करते हैं , किन्तु फलित ज्योतिष में जब हम पृथ्वी को स्थिर मान लेते हैं, तो उसके सापेक्ष सूर्य का एक काल्पनिक परिभ्रमण.पथ बन जाता है, जिसमें वह प्रतिदिन 1 डिग्री के हिसाब से खिसकता हुआ एक वर्ष बाद  पुनः उसी विन्दु पर पहुंच जाता है। पूरे परिभ्रमण.काल में एक सी गति होने के कारण इससे एक सी ही उर्जा प्रवाहित होती है और इसी कारण सूर्य की गत्यात्मक शक्ति को हर वक्त सामान्य माना जाता है। सूर्य के दशाकाल में मानवजीवन पर इसके पड़नेवाले प्रभाव में अंतर सूर्य की सापेक्षिक गत्यात्मक शक्ति के अनुसार हुआ करता है। यह अंतर सूर्य जिस राशि में स्थित होता है ,उसके राशिश की शक्ति के सापेक्षिक सूर्य के कमजोर या मजबूत होने के आधार पर किया जाता है। जैसे सूर्य यदि मेष या वृष राशि में स्थित हो और मंगल सामान्य से अधिक गत्यात्मक शक्ति संपन्न हो , तो सूर्य कमजोर होता है , इसके विपरीत मंगल सामान्य से कम गत्यात्मक शक्तिसंपन्न हो , तो सूर्य मजबूत होता है।मानवजीवन पर सूर्य का प्रभाव 48 से 60 वर्ष की उम्र तक दिखाई देता है। जिनका सूर्य मजबूत होता है , इस उम्र में उस.उस भाव से संबंधित सफलता प्राप्त करते हैं , जिस.जिस भाव से सूर्य संबंधित होता है।यदि सूर्य कमजोर हो , तो जातक उन्हीं भावों से संबंधित बुरा फल प्राप्त करते हैं।सूर्य जिस.जिस राशि का स्वामी हो , जिस राशि में स्थित हो वह भाव , उसके राशिश का दूसरा भाव ,जिस.जिस भाव के स्वामी के साथ या निकटतम स्थित हो ,उस भाव से संबंधित प्रभाव जातक प्राप्त करता है। विशेषकर 54वां.55वां वर्ष जातक के लिए सूर्य से संबंधित विशेष सुख या कष्ट प्रदान करनेवाला होता है। स्मृतिशेष इंदिरा गांधी (19.11.1917 ,सिंह लग्न) के 48 वर्ष से 60 वर्ष की उम्र तक यानि 1966 से 1977 तक बिना परिवर्तन प्रधानमंत्री के पद पर डटे होने का कारण इनका मंगल की राशि में सुर्य का सकारात्मक रूप से मजबूत होना ही था। स्मृतिशेष जाॅन मेजर (29.03.1943 , मकर लग्न) के जीवन में भी इनके सकारात्मक सूर्य का प्रभाव हम देख सकते हैं। इस के विपरीत स्मृतिशेष जेड ए भुट्टो (05.01.1928 , मिथुन लग्न) तथा स्मृतिशेष ओशो रजनीश (11.12.1931 कुंभ लग्न) के जीवन में ऋणात्मक सूर्य का प्रभाव देखा जा सकता है। रजनीश के पिता की मृत्यु भी 1979 में ही हुई , जब ये 48 वर्ष के थे।h

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About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
यह प्रविष्टि गत्यात्मक ज्योतिष में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

3 Responses to उत्तर.प्रौढ़ावस्था का प्रतीक ग्रहःसूर्य

  1. Narendra Kumar Agrawal कहते हैं:

    बिलकुल नई जानकारी, आभार

    नरेन्‍दग कुमार अग्रवाल
    http://narendraag.blogspot.com/

  2. anupma kapoor कहते हैं:

    can i ask about my future through this blog

  3. srigovind कहते हैं:

    namaskar
    aati uttam vishleshan

    srigovind
    hyd

    ans–dhanyawad.

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