पूर्व वृद्धावस्था का प्रतीक ग्रहःबृहस्पति

दया , धर्म , न्याय आदि गुणों से युक्त बृहस्पति की स्थिति सौरमंडल में सूर्य या पृथवी से बहुत ही दूर स्थित है और इस कारण प्राचीन फलित ज्यैतिष की पुस्तकों में बृहस्पति को वृद्ध ग्रह माना गया है। गत्यात्मक ज्योतिष के अनुसार भी मनुष्य के जीवन में बृहस्पति का प्रभाव 60 वर्य की उम्र के पश्चात ही देखा गया है। सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद यदि किसी ग्रह का प्रभाव मानवजीवन पर पड़ता है , तो वह बृहस्पति ही है। बृहस्पति की शक्ति का आकलण हम सूर्य से इसकी कोणात्मक दूरी के आधार पर कर सकते हैं। बृहस्पति सूर्य से साथ.साथ हो , तो बृहस्पति मजबूत स्थिति में होता है। सू्रय से 0 डिग्री की कोणात्मक दूरी पर बृहस्पति की कोणात्मक दूरी सर्वाधिक होती है। इस समय बृहस्पति पृथ्वी से सर्वाधिक दूरी पर यानि 93 करोड़ किमी की दूरी पर स्थित होता है। सूर्य से 90 डिग्री की दूरी पर स्थित बृहस्पति की गत्यात्मक शक्ति सामान्य होती है , इस समय बृहस्पति पृथ्वी से औसत दूरी पर यानि 80 करोड़ किमी की दूरी पर स्थित होता है। किन्तु जैसे जैसे बृहस्पति की कोणात्मक दूरी सूर्य से बढ़ती जाती है , यह कमजोर होता जाता है , जैसs ही बृहस्पति की कोणात्मक दूरी सू्रय से 180 डिग्री की होती है , बृहस्पति की गत्यात्मक शक्ति शून्य हो जाती है। इस समय बृहस्पति पृथ्वी से बहुत नजदीक यानि लगभग 63 करैड़ किमी की दूरी पर आ जाता है। जिन जातकों का बृहस्पति मजबूत होता है , वे 60 वर्ष की उम्र के पश्चात सुख और सफलता प्राप्त करते हैं एविपरीत स्थिति में 60 वर्ष की उम्र के बाद उन्हें कष्ट झेलने को विवश होना पड़ता है। बृहस्पति जिस.जिस भाव का स्वामी हो , जिस भाव में स्थित हो , वह राशि और उसके राशिश के दूसरे भाव तथा जिन ग्रहों के साथ या निकट स्थित होता है , उन राशियों पर प्रभाव डालता है। विशेषकर 65वे.66वे वर्ष में बृहस्पति का अधिक प्रभाव पड़ते देखा जा सकता है। पं जवाहरलाल नेहरू 14.11.1889, कर्क लग्न के जीवन में 60 वर्ष की उम्र से 72 वर्ष की उम्र तक यानि 1948 से 1961 तक के सफल होने का कारण बृहस्पति का सू्रय से निकट स्थित होकर गत्यात्मक शक्ति सपन्न होना ही था। भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखरजी 17.04.1927 , मेष लग्न के जीवन में भी मजबूत बहस्पति का प्रभाव देखा जा सकता है , जबकि इंदिराजी की जन्मकुंडली में सूर्य से 170 डिग्री की दूरी पर स्थित बृहस्पति के कारण उन्हें 60 वर्ष की उम्र के पश्चात् यानि 1977 के पश्चात मुसीबतें झेलने को बाध्य होना पड़ा। 1977 में चुनाव में असफलता प्राप्त की , 1980 में संजय गांधी को खोया , प्रधानमंत्री का पद मिलने के बाद भी कड़ी चुनोतियों का सामना करने को विवश हुईं और 1984 में गोलियों का शिकार बनीं। श्री अर्जुन सिंहजी की जन्मकुंडली में सूर्य से 120 डिग्री की दूरी पर स्थित बृहस्पति के कमजोर होने से उन्होनें 1996 से 2002 तक असफलता प्राप्त की।

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About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
यह प्रविष्टि गत्यात्मक ज्योतिष में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

6 Responses to पूर्व वृद्धावस्था का प्रतीक ग्रहःबृहस्पति

  1. anuradha srivastav कहते हैं:

    समझने का प्रयास जारी है।

  2. Mohit Bagaria कहते हैं:

    please add in this “FALIT JYOTISH”

  3. ashok tiwari कहते हैं:

    14/07/1973

    time.8:00am

    जबाब..अशोकजी , खेद है , इस समय व्यस्तता की वजह से हम आपको कोई जबाब नहीं दे सकते हैं।

  4. anjan kumar sinha कहते हैं:

    मैं श्री महथा जी को व्‍यक्तिगत तौर पर जानता हूं । मैं 30 वर्ष के उम्र से ज्‍योतिष का अध्‍ययन कर रहा हूं और इस दिशा में कुछ नई खोज का प्रयास करता रहा । संयोगवश श्री महथा जी जब अपने एक रिश्‍तेदार श्री एच0एन0कपूर,कार्मिक प्रबंधक,भा0को0को0लि0 से मिलने आए तो उनसे परिचित हुआ और गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष की मूल हस्‍तलिखित प्रति को मैं स्‍वयं हिंदी टंकण मशीन से टंकित किया । जैसाकि उनका निदेश था कि उसकी कोई भी अतिरिक्‍त प्रति नहीं तैयार करें तद़नुसार मै वैसा ही किया । लेकिन टंकण के दौरान जो नई पद्धति से मैं अवगत हुआ उसका प्रमाण मुझे 15 वर्ष उपरांत देखने को मिला । उनके द्वारा मेरे लिए तैयार की गई कुण्‍डली और फलादेश के अनुसार मेरे जीवन का 45 वर्ष के बाद का समय अत्‍यन्‍त अच्‍छा एक ग्राफ में दर्शाया गया था । दुर्भाग्‍य से आज उसकी प्रति मेरे पास नहीं है । लेकिन मैं शतप्रतिशत यह पाया कि उसी वर्ष कर्मचारी संवर्ग से अधिकारी संवर्ग की परीक्षा में मैं सफल हुआ और मुझे उसके बाद समयानुसार पदोन्‍नति मिलते गई । जब कि विंशोत्‍तरी दशा के अनुसार ऐसा कोई बलवान योग नहीं था । अत: श्री महथा जी का सिद्धान्‍त पूर्ण वैज्ञानिक है । मेरा यह भी विचार है कि नये ज्‍योतिषीगण इस सिद्धान्‍त को ध्‍यान में रख कर यदि भविष्‍यवाणी करें तो वे ज्‍यादा सफल होंगे ।
    अंजन कुमार सिन्‍हा, सचिव(रा.भा.),जगन्‍नाथ क्षेत्र,
    महानदी कोलफील्‍डस लिमिटेड

  5. Dr Prabhat Tandon कहते हैं:

    समझने की कोशिश कर रहा हूँ ……

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