राहू-केतु मात्र विन्दु हैं न कि ग्रह?

प्रश्न — नई दिल्ली से प्रमोद कुमार पूछते हैं कि ज्योतिष में राहू और केतु को भी ग्रह माना गया है , जबकि ये ग्रह नहीं हैं । तो इनके आधार पर भविष्यवाणी कैसे सही हो सकता है ?

उत्तर — यह तर्क बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। सबसे पहले यह जानकारी आवश्यक है कि राहू और केतु हैं क्या ? पृथ्वी को स्थिर मानने से पृथ्वी के चारो ओर सूर्य का एक काल्पनिक परिभ्रमण-पथ बन जाता है। पृथ्वी के चारो ओर चंद्रमा का एक परिभ्रमण पथ है ही। ये दोनो परिभ्रमण-पथ एक दूसरे को दो विन्दुओं पर काटते हैं । अतिप्राचीनकाल में शायद जब ज्योतिषियों को मालूम नहीं रहा हो कि एक पिंड की छाया दूसरे पिंडों पर पड़ने से ही सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण होते हैं और उन्होने सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण होते देखा, तो अपनी उत्सुकता को शांत करने के लिए वे इसके कारण ढूॅढ़ने लगे होंगे। दोनो ही समय इन्होने पाया होगा कि सूर्य, चंद्र, पृथ्वी एवं सूर्य, चंद्र के परिभ्रमण-पथ पर कटनेवाले दोनो विन्दु लम्बवत् हैं। बस उन्होने समझ लिया होगा कि इन्हीं विन्दुओं के एक सीध में होने के फलस्वरुप खास अमावस्या के दिन सूर्य तथा खास पूर्णिमा की रात्रि को चंद्र आकाश से लुप्त हो जाता है। उन्होने इन विन्दुओं को महत्वपूर्ण पाकर इन विन्दुओं का नामकरण राहू और केतु कर दिया। इस स्थान पर उनसे जो गल्ती हुई , उसका खामियाजा ज्योतिष विज्ञान अभी तक भुगत रहा है ,क्योंकि राहू और केतु कोई आकाशीय पिंड हैं ही नहीं , मात्र विन्दु हैं और हमलोग ग्रहों की जिस उर्जा से भी प्रभावित हो रहे हों— गुरूत्वाकर्षण, गति, किरण या विद्युत चुम्बकीय शक्ति, राहू और केतु इनमें से किसी का भी उत्सर्जन नहीं कर पाते। इसलिए इनसे प्रभावित होने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। यही कारण है कि हमनें भी पाया है कि राहू और केतु पर आधारित भविष्यवाणियां सही नहीं हो पाती।

 

 

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About संगीता पुरी

नाम - संगीता पुरी , उम्र - 42 वर्ष , पढ़ाई - रांची विश्वविद्यालय से एम ए (अर्थ शास्त्र ) , विवाह - १२ मार्च १९८८ को पति - श्री अनिल कुमार ( डी वी सी में कार्यरत ), पुत्र - दो विपुल और विभास , दोनों डी पी एस बोकारो मैं विद्यार्थी , पता - ९४ , को-operative कॉलोनी ,बोकारो स्टील सिटी रूचि - ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना , जो सिक्षा मुझे मेरे पिताजी ने डी है . प्रकाशित पुस्तकें - १. गत्यात्मक ज्योतिष : ग्रहों का प्रभाव . प्रकाशित लेख - the astrological मैगज़ीन , बाबाजी ,ज्योतिष-धाम आदि में . E-mail - gatyatmak_jyotish@yahoo.co.in
यह प्रविष्टि पाठकों के प्रश्न में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

One Response to राहू-केतु मात्र विन्दु हैं न कि ग्रह?

  1. Vikram Pancholi कहते हैं:

    I endorse the scientific approach promoted by you here. I have been a student of astrology for more than 30 years and have been endeavouring to attach logic to various astrological concepts. At this point of time, I am personally convinced about validity of astrology in a post-event scenario. This may be due to innumerable possibilities generated from combinations and permutations. The absence of Universal principles and accredation has given way to breeds of low calibre people into astrology and creating hoax in the society only to capitalize on the astrological Agyana of people.

    I appreciate your efforts in sensitizing scientific temparament while dealing with the subject.

    God Bless you.

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